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Bareilly News: सूख रही राजनीति की नर्सरी, छात्र संगठनों के अस्तित्व पर भी संकट
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बरेली। छात्रसंघ यानी राजनीति की नर्सरी सूख रही है। कॉलेज से लेकर विश्वविद्यालय तक विद्यार्थियों की आवाज बुलंद करने वाले छात्र संगठन अब अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। रुहेलखंड विवि हो या फिर बरेली कॉलेज, सभी जगह छात्र संगठनों की हालत दयनीय है। आलम यह है कि कॉलेज में छात्रहित के मुद्दे उठाने के लिए पदाधिकारियों को विद्यार्थियों का सहयोग नहीं मिल रहा। जिन छात्र संगठनों की ओर से आंदोलन की घोषणा भर से ही विवि प्रशासन हिल जाता था, अब वह बेअसर साबित हो रहे हैं।
वर्ष 2013-14 में छात्रसंघ चुनाव निरस्त होने के बाद संगठन अपना काम करते रहे। लंबे समय तक छात्र नेताओं का शिक्षण संस्थानों में दबदबा कायम रहा, लेकिन वर्तमान में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हो, समाजवादी छात्र सभा या अन्य संगठन। सभी के पदाधिकारी, विद्यार्थियों के बीच अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए मशक्कत कर रहे हैं।
प्रदर्शन के लिए कार्यकर्ताओं की कमी होने पर बाहरी लोगों को कॉलेज में बुलाया जा रहा है। वहीं, एनएसयूआई का संगठन तो सिर्फ जिलाध्यक्ष पद तक सीमित रह गया है, जबकि इसे कभी छात्र राजनीति में काफी सक्रिय माना जाता था।
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वसूली के भी लगे आरोप
बरेली कॉलेज में छात्रहित में आवाज उठाने का दावा करने वाले कुछ संगठनों के सदस्यों पर वसूली करने और फर्जी रसीद बनाने तक के आरोप लग चुके हैं। फर्जी रसीद मामले में एक विद्यार्थी पकड़ा गया। विद्यार्थियों को फर्जी रसीद देने वाले के विरुद्ध छात्र संगठनों की दबी आवाज ने भी छात्र-छात्राओं के बीच उनकी छवि को प्रभावित किया। रैगिंग व विद्यार्थियों से मारपीट में भी छात्र नेताओं का नाम सामने आया है।
आंदोलन की चेतावनी देकर भूल गए
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने नवीन कार्यकारिणी का गठन करने के बाद पहला प्रदर्शन 19 जुलाई को किया। बरेली कॉलेज में व्याप्त अव्यवस्थाओं का विरोध करते हुए प्राचार्य को ज्ञापन दिया गया। तीन दिन में समाधान नहीं होने पर उग्र आंदोलन करने की चेतावनी भी दी। इसके बाद भी व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ। छात्रनेता भी दोबारा आवाज बुलंद करने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
आश्वासन मिला और धरना खत्म
समाजवादी छात्र सभा की ओर से सात जून को बीएएमएस छात्रों के चुनौती मूल्यांकन फॉर्म खुलवाने के संबंध में रुहेलखंड विश्वविद्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया गया। परीक्षा नियंत्रक ने आश्वासन दिया कि वे कुलपति के साथ एक-दो दिन के बाद बैठकर वार्ता करेंगे। यह वार्ता नहीं हो सकी और न ही विद्यार्थियों की मांगों का समाधान हुआ। संवाद
छात्रनेता और विद्यार्थी के साथ ही गुरु और शिष्य के बीच का संपर्क भी समाप्त होता जा रहा है। छात्र नेताओं को विद्यार्थियों के बीच रहना चाहिए। हमने छात्रनेता रहते हुए साइकिल स्टैंड, फीस व अन्य अनियमितताओं को लेकर छात्रहित में आवाज उठाई। कुलपति तक का विद्यार्थियों के साथ घेराव किया। छात्रसंघ चुनाव नहीं होने का भी प्रभाव अब दिख रहा है। - अनुराग सिंह नीटू, पूर्व अध्यक्ष छात्रसंघ (वर्ष 2003-04 )
बरेली कॉलेज छात्र राजनीति समय और संघर्ष मांगती है। वर्तमान में छात्र नेताओं से ये दोनों चीजें नहीं हो पा रही हैं। कॉलेज से लेकर विवि तक व्यवस्थाएं ऑनलाइन होने से छात्र नेताओं से विद्यार्थी जुड़ाव नहीं महसूस कर पा रहे हैं, क्योंकि वे कैंपस में ही नहीं आते। छात्रनेता भी खामियों को खुलकर उजागर नहीं कर पा रहे हैं। -ह्रदेश यादव, पूर्व महामंत्री छात्रसंघ, बरेली कॉलेज
नई शिक्षा नीति में कॉलेज में पढ़ाई का माहौल नहीं रहा है। विद्यार्थियों की भावना हो गई है कि अगर वह प्रवेश लेंगे तो भी उन्हें जाना नहीं पड़ेगा। इस कारण छात्र नेताओं से संपर्क नहीं हो पा रहा है। - मुकेश यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष, समाजवादी छात्र सभा
नियमित कक्षाएं नहीं लगने से विद्यार्थी कॉलेज नहीं आ रहे हैं। ऐसे में उनसे संपर्क भी प्रभावित हो रहा है। हम लोगों की ओर से भी विद्यार्थियों को जागरूक करने में कहीं न कहीं कमी हो रही है। - अविनाश मिश्रा, जिलाध्यक्ष, समाजवादी छात्र सभा
विद्यार्थी कॉलेज आएंगे, तभी छात्र नेताओं से उनका जुड़ाव हो पाएगा। छात्रसंघ का चुनाव न होने का असर भी शिक्षण संस्थानों में दिख रहा है। - श्रेयांश वाजपेयी, विभाग सह संयोजक, एबीवीपी
इन मुद्दों पर नहीं उठाई आवाज
-बरेली कॉलेज फर्जी रसीद देने के प्रकरण में, जिसमें छात्र नेताओं का भी नाम आया।
- कक्षाएं लगाए बिना परीक्षाएं कराने पर।
- छात्र से रैगिंग मामले में।
-छात्रावास खुलवाने को लेकर।
-कॉलेज के सुंदरीकरण व खेलकूद व्यवस्था में सुधार के लिए।
- विवि में बैक की फीस व परीक्षा संबंधी अनियमितताओं को पर।
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वर्ष 2013-14 में छात्रसंघ चुनाव निरस्त होने के बाद संगठन अपना काम करते रहे। लंबे समय तक छात्र नेताओं का शिक्षण संस्थानों में दबदबा कायम रहा, लेकिन वर्तमान में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हो, समाजवादी छात्र सभा या अन्य संगठन। सभी के पदाधिकारी, विद्यार्थियों के बीच अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए मशक्कत कर रहे हैं।
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प्रदर्शन के लिए कार्यकर्ताओं की कमी होने पर बाहरी लोगों को कॉलेज में बुलाया जा रहा है। वहीं, एनएसयूआई का संगठन तो सिर्फ जिलाध्यक्ष पद तक सीमित रह गया है, जबकि इसे कभी छात्र राजनीति में काफी सक्रिय माना जाता था।
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वसूली के भी लगे आरोप
बरेली कॉलेज में छात्रहित में आवाज उठाने का दावा करने वाले कुछ संगठनों के सदस्यों पर वसूली करने और फर्जी रसीद बनाने तक के आरोप लग चुके हैं। फर्जी रसीद मामले में एक विद्यार्थी पकड़ा गया। विद्यार्थियों को फर्जी रसीद देने वाले के विरुद्ध छात्र संगठनों की दबी आवाज ने भी छात्र-छात्राओं के बीच उनकी छवि को प्रभावित किया। रैगिंग व विद्यार्थियों से मारपीट में भी छात्र नेताओं का नाम सामने आया है।
आंदोलन की चेतावनी देकर भूल गए
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने नवीन कार्यकारिणी का गठन करने के बाद पहला प्रदर्शन 19 जुलाई को किया। बरेली कॉलेज में व्याप्त अव्यवस्थाओं का विरोध करते हुए प्राचार्य को ज्ञापन दिया गया। तीन दिन में समाधान नहीं होने पर उग्र आंदोलन करने की चेतावनी भी दी। इसके बाद भी व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ। छात्रनेता भी दोबारा आवाज बुलंद करने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
आश्वासन मिला और धरना खत्म
समाजवादी छात्र सभा की ओर से सात जून को बीएएमएस छात्रों के चुनौती मूल्यांकन फॉर्म खुलवाने के संबंध में रुहेलखंड विश्वविद्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया गया। परीक्षा नियंत्रक ने आश्वासन दिया कि वे कुलपति के साथ एक-दो दिन के बाद बैठकर वार्ता करेंगे। यह वार्ता नहीं हो सकी और न ही विद्यार्थियों की मांगों का समाधान हुआ। संवाद
छात्रनेता और विद्यार्थी के साथ ही गुरु और शिष्य के बीच का संपर्क भी समाप्त होता जा रहा है। छात्र नेताओं को विद्यार्थियों के बीच रहना चाहिए। हमने छात्रनेता रहते हुए साइकिल स्टैंड, फीस व अन्य अनियमितताओं को लेकर छात्रहित में आवाज उठाई। कुलपति तक का विद्यार्थियों के साथ घेराव किया। छात्रसंघ चुनाव नहीं होने का भी प्रभाव अब दिख रहा है। - अनुराग सिंह नीटू, पूर्व अध्यक्ष छात्रसंघ (वर्ष 2003-04 )
बरेली कॉलेज छात्र राजनीति समय और संघर्ष मांगती है। वर्तमान में छात्र नेताओं से ये दोनों चीजें नहीं हो पा रही हैं। कॉलेज से लेकर विवि तक व्यवस्थाएं ऑनलाइन होने से छात्र नेताओं से विद्यार्थी जुड़ाव नहीं महसूस कर पा रहे हैं, क्योंकि वे कैंपस में ही नहीं आते। छात्रनेता भी खामियों को खुलकर उजागर नहीं कर पा रहे हैं। -ह्रदेश यादव, पूर्व महामंत्री छात्रसंघ, बरेली कॉलेज
नई शिक्षा नीति में कॉलेज में पढ़ाई का माहौल नहीं रहा है। विद्यार्थियों की भावना हो गई है कि अगर वह प्रवेश लेंगे तो भी उन्हें जाना नहीं पड़ेगा। इस कारण छात्र नेताओं से संपर्क नहीं हो पा रहा है। - मुकेश यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष, समाजवादी छात्र सभा
नियमित कक्षाएं नहीं लगने से विद्यार्थी कॉलेज नहीं आ रहे हैं। ऐसे में उनसे संपर्क भी प्रभावित हो रहा है। हम लोगों की ओर से भी विद्यार्थियों को जागरूक करने में कहीं न कहीं कमी हो रही है। - अविनाश मिश्रा, जिलाध्यक्ष, समाजवादी छात्र सभा
विद्यार्थी कॉलेज आएंगे, तभी छात्र नेताओं से उनका जुड़ाव हो पाएगा। छात्रसंघ का चुनाव न होने का असर भी शिक्षण संस्थानों में दिख रहा है। - श्रेयांश वाजपेयी, विभाग सह संयोजक, एबीवीपी
इन मुद्दों पर नहीं उठाई आवाज
-बरेली कॉलेज फर्जी रसीद देने के प्रकरण में, जिसमें छात्र नेताओं का भी नाम आया।
- कक्षाएं लगाए बिना परीक्षाएं कराने पर।
- छात्र से रैगिंग मामले में।
-छात्रावास खुलवाने को लेकर।
-कॉलेज के सुंदरीकरण व खेलकूद व्यवस्था में सुधार के लिए।
- विवि में बैक की फीस व परीक्षा संबंधी अनियमितताओं को पर।