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Bareilly News: अब गूगल सुना रहा कहानी, वृद्धाश्रम में सिसक रहीं दादी-नानी

Thu, 19 Sep 2024 07:05 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 19 Sep 2024 07:05 AM IST
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Now Google is telling the story, grandmothers and grandmothers are sobbing in the old age home
पितृ पक्ष पर विशेष: समाजशास्त्री के मुताबिक एकल परिवार होने से बुजुर्गों के प्रति बदल रही बच्चों की सोच
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बरेली। ''बीते तीन दशक में सामाजिक ताने-बाने में तेजी से बदलाव हुआ है। एकल परिवार होने की वजह से बच्चे, बुजुर्गों से दूर हो रहे हैं। अब वे गूगल से लोरी और कहानियां सुन रहे हैं। दादा-दादी, नाना-नानी वृद्धाश्रम में सिसक रहे हैं। बच्चों को पालने और उनको कामयाब बनाने में माता-पिता कर कदम पर उनका साथ देते हैं। बदले में उनको अकेलेपन का दर्द मिल रहा है। वृद्धाश्रम में बुजुर्गों की बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है।''
बरेली कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष डॉ. नवनीत कौर आहूजा ने ये बातें कहीं। एक शोधार्थी के अध्ययन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवारों के टूटने और एकल परिवारों के बढ़ते चलन की वजह से समाज में यह विसंगति आ रही है। पहले दादा-दादी, नाना-नानी और परिवार के अन्य सदस्यों के बीच बच्चों का विकास होता था। वे उनसे भावनात्मक रूप से जुड़े रहते थे। अब इसका अभाव है।
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बुजुर्गों को भर्ती कराकर छोड़ जाते हैं बेटे
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. आशीष के मुताबिक कई लोग बुजुर्गों को लेकर अस्पताल आते हैं और उनको भर्ती कराकर चले जाते हैं। बाद में वे लौटकर नहीं आते। ऐसे परिजन को जब कॉल करके बताया जाता है कि मरीज ठीक हो चुका है तो वे आकर ले जाते हैं। अकेले रहने और परिवार में मान-सम्मान न मिलने से ज्यादातर बुजुर्ग अवसादग्रस्त हो जाते हैं।
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बच्चे नहीं करते बात
डॉ. आशीष के मुताबिक छह माह पूर्व एक बुजुर्ग जख्मी हालत में अकेले ही इलाज कराने पहुंचे थे। इलाज के दौरान सप्ताहभर तक उन्होंने किसी से बातचीत नहीं की। बाद में पूछताछ में बताया कि उनके पास अच्छी संपत्ति है, पर बच्चे उनसे बात नहीं करते। इस वजह से वे परेशान रहते हैं। अमर उजाला ब्यूरो
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दिखावा नहीं, अपनत्व की जरूरत
पितृ पक्ष में श्राद्ध-तर्पण करने से ज्यादा जरूरी है बुजुर्गों को अपनत्व का एहसास कराना। माता-पिता की सेवा करने से बच्चों को भी सीख मिलेगी। संस्कार के रूप में यह अगली पीढ़ी में स्थानांतरित होता रहेगा। - हरिओम गौतम, गांधीपुरम।

बुजुर्गों की सेवा करना जरूरी है। अन्यथा सामाजिक ताना-बाना प्रभावित होगा और मरने के बाद भी उनकी आत्मा दुखी रहेगी। ऐसी स्थिति में श्राद्ध और तर्पण करने का कोई लाभ नहीं। - पंडित तुलसी राम शर्मा, गांधीपुरम।
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