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Bareilly News: गोशाला वार बनाए गए नोडल अधिकारी, मांगी रिपोर्ट
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बरेली। सरकारी गोशालाओं में भूसा खरीद में गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद अब जिला प्रशासन और अधिक सतर्क हो गया है। जिला स्तरीय अधिकारी को गोशाला वार नोडल बना दिया गया है। इन सभी अधिकारियों से उनके नाम से आवंटित हुई गोशाला की वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट भी प्रशासन ने मांगी है।
दरअसल, गोशालाओं में अप्रैल 2024 से मई 2025 तक हुई भूसा खरीद में बड़े स्तर पर नियमों की अनदेखी की गई। टेंडर प्राप्तकर्ता फर्म पर मिट्टी व रेतायुक्त गुणवत्ताविहीन भूसा देने का आरोप लगाया और सक्षम स्तर पर बिना अनुमति के ग्राम पंचायतों ने 15 करोड़ रुपये से भी अधिक लागत का भूसा भी खरीद डाला। ब्लॉक से लेकर जिले तक के अधिकारी इस फर्म को कार्रवाई से बचाते भी दिखे। यह मामला सार्वजनिक होने के बाद शासन स्तर से आई तीन टीमों ने आरोपों की जांच भी की है, जिसकी रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। इसी मामले के बाद डीएम अविनाश सिंह ने गोशालाओं की व्यवस्था के प्रति कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
डीएम ने बताया कि जिले में सरकारी 118 गोशालाएं हैं। जिनमें 15,525 हजार से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। इन प्रत्येक गोशाला की जिम्मेदारी एक-एक जिला स्तरीय अधिकारी को दी गई है। इन लोगों से गोशाला की वर्तमान स्थिति और व्यवस्थाओं की एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत से ब्लॉक एवं तहसील तक अभी तक जिन लोगों को गोशालाओं की जो भी जिम्मेदारी रही है, वह उसे निभाते रहेंगे और नोडल अधिकारी अपना काम करेंगे। अब गोशालाओं में व्यवस्था और अव्यवस्था की जिम्मेदारी नोडल अधिकारी की भी तय कर दी गई है। संवाद
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दरअसल, गोशालाओं में अप्रैल 2024 से मई 2025 तक हुई भूसा खरीद में बड़े स्तर पर नियमों की अनदेखी की गई। टेंडर प्राप्तकर्ता फर्म पर मिट्टी व रेतायुक्त गुणवत्ताविहीन भूसा देने का आरोप लगाया और सक्षम स्तर पर बिना अनुमति के ग्राम पंचायतों ने 15 करोड़ रुपये से भी अधिक लागत का भूसा भी खरीद डाला। ब्लॉक से लेकर जिले तक के अधिकारी इस फर्म को कार्रवाई से बचाते भी दिखे। यह मामला सार्वजनिक होने के बाद शासन स्तर से आई तीन टीमों ने आरोपों की जांच भी की है, जिसकी रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। इसी मामले के बाद डीएम अविनाश सिंह ने गोशालाओं की व्यवस्था के प्रति कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
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डीएम ने बताया कि जिले में सरकारी 118 गोशालाएं हैं। जिनमें 15,525 हजार से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। इन प्रत्येक गोशाला की जिम्मेदारी एक-एक जिला स्तरीय अधिकारी को दी गई है। इन लोगों से गोशाला की वर्तमान स्थिति और व्यवस्थाओं की एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत से ब्लॉक एवं तहसील तक अभी तक जिन लोगों को गोशालाओं की जो भी जिम्मेदारी रही है, वह उसे निभाते रहेंगे और नोडल अधिकारी अपना काम करेंगे। अब गोशालाओं में व्यवस्था और अव्यवस्था की जिम्मेदारी नोडल अधिकारी की भी तय कर दी गई है। संवाद
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