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जांच न एक्स-रे... अब खांसने के तरीके से होगी टीबी मरीज की पहचान

Fri, 04 Feb 2022 01:48 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 04 Feb 2022 01:48 AM IST
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No X-ray test... now TB patient will be identified by coughing method
No X-ray test... now TB patient will be identified by coughing method
बरेली। अब तक टीबी मरीजों की पहचान बलगम की जांच, एक्स-रे और सीबी नाट मशीन से होती है, लेकिन जल्द इन सब झंझटों से मुक्ति मिल जाएगी। अब महज खांसने के तरीके से ही टीबी मरीजों की पहचान हो सकेेगी। इसके लिए सेंट्रल टीबी डिविजन की ओर से पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। टीबी के सक्रिय मरीजों समेत उनके कॉन्टैक्ट और संदिग्ध लोगों के खांसने की रिकॉर्डिंग हो रही है। इस पर विशेषज्ञ स्टडी कर खांसी के तरीके से ही टीबी मरीज की पहचान करेंगे।
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तीन हफ्ते से ज्यादा किसी को खांसी रहने पर उसे टीबी संदिग्ध माना जाता है पर जरूरी नहीं है कि तीन हफ्ते से ज्यादा खांसी आने पर भी व्यक्ति टीबी की जांच कराने पहुंचे। संबंधित व्यक्ति को टीबी है या नहीं यह बगैर बलगम की जांच के पता नहीं लग सकता। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. केके मिश्र ने बताया कि वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य है। लिहाजा टीबी के मरीजों को ट्रेस कर उन्हें स्वस्थ बनाना बेहद जरूरी है, ताकि और लोगों को संक्रमण से बचाया जा सके। इसलिए सेंट्रल टीबी डिविजन ने खांसी के तरीके से संदिग्ध मरीज की पहचान के लिए स्टडी शुरू की है।
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बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर देश के सभी राज्यों के चुनिंदा जिलों से टीबी मरीज, उनके संपर्क में रहे लोगों और संदिग्ध रोगियों की खांसने, बोलने की आवाज रिकॉर्ड की जा रही है। इसके लिए ‘फील्डी’ एप बनाया गया है। इस पर स्वास्थ्यकर्मी प्राप्त दिशानिर्देश के तहत विभिन्न चरणों के तहत वॉयस रिकॉर्डिंग कर रहे हैं। चार फरवरी तक लक्ष्य के सापेक्ष वॉयस रिकॉर्डिंग करके सेंट्रल टीबी डिविजन को भेज दी जाएगी।
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सात साल से अधिक उम्र के बच्चों वयस्कों की रिकॉर्ड हो रही वॉयस : डॉ. मिश्रा के मुताबिक डिविजन की ओर से प्राप्त निर्देश के तहत सात साल से अधिक उम्र के टीबी मरीजों, संदिग्धों और कॉन्टैक्ट में रहे लोगों की ही वॉयस रिकॉर्डिंग की जा रही है। सीनियर टीबी लैब सुपरवाइजर प्रतीक सिंह के मुताबिक फील्डी एप में वॉयस रिकॉर्ड करने से पहले संबंधित व्यक्ति, मरीज का पूरा डाटा भरा जाता है। इसके बाद अलग-अलग चार चरणों में रिकॉर्डिंग होती है। पहला, एक से दस तक गिनती, दूसरा, खांसी की आवाज, तीसरा आ, ई, ऊ तीन शब्दों को तीन-तीन बार बोलने, चौथा रिकॉर्डिंग के दौरान बैकग्राउंड आवाज रिकॉर्ड की जा रही है।
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से टीबी के मरीज खोजने की होगी स्टडी : प्रोजेक्ट का मकसद मोबाइल एप (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) के जरिए महज खांसी की ध्वनि से संदिग्ध मरीज की पहचान करना है। कई बार लोग लंबे समय तक खांसी आने के बावजूद डर/संकोच के चलते जांच नहीं कराते हैं, वे खुद ही मोबाइल में एप इंस्टाल कर अपनी जांच कर सकेंगे। अगर संदिग्ध रिपोर्ट मिलेगी तो उम्मीद है कि वह स्वस्थ होने के लिए टीबी की नियमित जांच कराएंगे। साथ ही, टीबी के रोगियों को खोजने में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों को भी संदिग्ध मरीज खोजने में मदद मिलेगी, क्योंकि कई बार लोगों को संदिग्ध बताने पर विरोध का सामना करना पड़ता है।

बरेली मंडल के जिलों को मिला लक्ष्य : एडी हेल्थ कार्यालय से प्राप्त जानकारी के मुताबिक बरेली को 175, बदायूं को 106, पीलीभीत को 66, शाहजहांपुर को 86 वॉयस सैंपल का लक्ष्य मिला है। इसके लिए 27 जनवरी को जिला क्षय रोग केंद्र में स्वास्थ्यकर्मियों को वॉयस रिकॉर्ड करने का प्रशिक्षण भी दिया गया था। जिला क्षय रोग केंद्र के जिला पीपीएम समन्वयक विजय के मुताबिक बरेली को प्राप्त 175 सैंपल में 57 टीबी के मरीज, 66 संदिग्ध और 52 कॉन्टैक्ट में रहे लोगों के वॉयल सैंपल लिए जा रहे हैं। इसी तरह अन्य जिलों में भी तीन श्रेणियों में वॉयस सैंपल लेकर सेंट्रल टीबी डिविजन को भेज रहे हैं।
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