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Bareilly News: समय से मिलती मदद तो बच सकती थी दोनों की जान
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फतेहगंज पश्चिमी। ट्रैक्टर खाई में पलटने के बाद उसके नीचे दबे पिता-पुत्र की जान बचने का कोई जरिया न बन सका। करीब चार घंटे तक दोनों इसी तरह ट्रैक्टर के नीचे दबे पड़े रहे। चार घंटे बाद जिस किसान ने उन्हें देखा, उसके पास मोबाइल न होने से गांव जाकर ही वह लोगों को बता सका। अगर समय पर मदद मिल जाती तो दोनों की जान बच सकती थी।
थाना के प्रभारी निरीक्षक अभिषेक कुमार ने बताया कि जिस संकरे और सुनसान खेतिहर रास्ते पर हादसा हुआ, वहां दिन में भी आवाजाही बेहद कम रहती है। खासतौर पर इस ओर जिन किसानों की खेती है, वही इधर जाते हैं। ऐसे में दोनों पिता-पुत्र ट्रैक्टर के नीचे सुबह आठ बजे से दोपहर 12 बजे तक करीब चार घंटे दबे रहे। दोपहर में खेत से गन्ना छीलने के बाद खाना खाने घर जा रहे किसान धर्मपाल ने उन्हें दबा देखा तो उसके पास मोबाइल फोन नहीं था। धर्मपाल भागकर गांव पहुंचा तो ग्रामीणों व परिवार को सूचना दी। परिजनों समेत कई ग्रामीण तब मौके पर पहुंच गए। दूसरे ट्रैक्टर की मदद से दोनों को जब तक निकाला गया, उनकी मौत हो चुकी थी। इससे परिजनों हाल बेहाल हो गया। संवाद
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टायर बेचने का करते थे काम
ग्रामीणों ने बताया कि सुमित पाल की शादी नहीं हुई थी। करीब 20 साल पहले नंदप्रकाश परिवार के साथ शाही रोड पर भिटौरा पुलिया के पास घर बनाकर रह रहे थे। घर के बाहरी हिस्से में बनी दुकान में वह टायर का व्यवसाय करते थे। बेटे भी व्यवसाय व खेती में उनका हाथ बंटाते थे।
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थाना के प्रभारी निरीक्षक अभिषेक कुमार ने बताया कि जिस संकरे और सुनसान खेतिहर रास्ते पर हादसा हुआ, वहां दिन में भी आवाजाही बेहद कम रहती है। खासतौर पर इस ओर जिन किसानों की खेती है, वही इधर जाते हैं। ऐसे में दोनों पिता-पुत्र ट्रैक्टर के नीचे सुबह आठ बजे से दोपहर 12 बजे तक करीब चार घंटे दबे रहे। दोपहर में खेत से गन्ना छीलने के बाद खाना खाने घर जा रहे किसान धर्मपाल ने उन्हें दबा देखा तो उसके पास मोबाइल फोन नहीं था। धर्मपाल भागकर गांव पहुंचा तो ग्रामीणों व परिवार को सूचना दी। परिजनों समेत कई ग्रामीण तब मौके पर पहुंच गए। दूसरे ट्रैक्टर की मदद से दोनों को जब तक निकाला गया, उनकी मौत हो चुकी थी। इससे परिजनों हाल बेहाल हो गया। संवाद
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टायर बेचने का करते थे काम
ग्रामीणों ने बताया कि सुमित पाल की शादी नहीं हुई थी। करीब 20 साल पहले नंदप्रकाश परिवार के साथ शाही रोड पर भिटौरा पुलिया के पास घर बनाकर रह रहे थे। घर के बाहरी हिस्से में बनी दुकान में वह टायर का व्यवसाय करते थे। बेटे भी व्यवसाय व खेती में उनका हाथ बंटाते थे।
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