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कई अस्पताल में भटका झुलसी बच्ची को लेकर किसी ने भर्ती नहीं किया
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जिला अस्पताल पहुंचा तो डाक्टरों ने भी इलाज से मना किया, मौत
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बरेली। इसे गरीबी कहें या डाक्टरों की संवदेनहीनता। गंभीररूप से ढाई साल की झुलसी बच्ची को लेकर परिजन कई अस्पताल गए लेकिन किसी ने उसको भर्ती करके इलाज नहीं किया। अंत में इलाज की आस में जिला अस्पताल पहुंचा, वहां भी डाक्टरों ने संवेदनहीनता दिखाते हुए घर ले जाने को कहा। जिला अस्पताल से बाहर आते समय गेट पर उसकी मौत हो गई। आंखों में आंसू लिए माता पिता बच्ची का शव लेकर घर चले गए।
थाना सीबीगंज के गांव बंडिया निवासी बसीर अहमद मजदूर है। गरीबी होने से उसके घर में बिजली तक नहीं है। शुक्रवार रात साढ़े आठ बजे उसे ढाई वर्षीय पुत्री गुड़िया फोल्डिंग चारपाई पर सो रही थी। कमरे में मोमबत्ती जल रही थी। जबकि बशीर अपने परिवार के साथ बरामदे में बैठा हुआ था। किसी समय जलती हुई मोमबत्ती मच्छरदानी पर गिर गए गई। मच्छरदानी में लगी आग से फोल्डिंग चारपाई में आ गई। गुड़िया की रोने की आवाज सुनकर बशीर अंदर गया तो देखा कि गुड़िया बुरी तरह से झुलसी हुई थी। वह अपनी पत्नी के साथ गुड़िया को लेकर मिनी बाईपास के कई अस्पताल में गया, लेकिन सभी अस्पतालों ने भर्ती करने से मना कर दिया। अंत में उसे जिला अस्पताल का ही आसरा दिखा। रात साढ़े दस बजे वह उसे लेकर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचा। वहां मौजूद डाक्टर ने उसे देखकर कहा कि घर ले जाओ। यह सुनते ही बशीर रोने लगा। उसने भर्ती करने के लिए डाक्टर के हाथ पैर जोड़े। भर्ती न होने पर वह बच्ची को गोद में लेकर बाहर आ गया। अस्पताल गेट पर पहुंचते ही गुड़िया ने दमतोड़ दिया। उसे यह भी पता नहीं चला, वह फिर अस्पताल पहुंचा तो डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद वह बच्ची का शव लेकर घर आ गया।
थाना सीबीगंज के गांव बंडिया निवासी बसीर अहमद मजदूर है। गरीबी होने से उसके घर में बिजली तक नहीं है। शुक्रवार रात साढ़े आठ बजे उसे ढाई वर्षीय पुत्री गुड़िया फोल्डिंग चारपाई पर सो रही थी। कमरे में मोमबत्ती जल रही थी। जबकि बशीर अपने परिवार के साथ बरामदे में बैठा हुआ था। किसी समय जलती हुई मोमबत्ती मच्छरदानी पर गिर गए गई। मच्छरदानी में लगी आग से फोल्डिंग चारपाई में आ गई। गुड़िया की रोने की आवाज सुनकर बशीर अंदर गया तो देखा कि गुड़िया बुरी तरह से झुलसी हुई थी। वह अपनी पत्नी के साथ गुड़िया को लेकर मिनी बाईपास के कई अस्पताल में गया, लेकिन सभी अस्पतालों ने भर्ती करने से मना कर दिया। अंत में उसे जिला अस्पताल का ही आसरा दिखा। रात साढ़े दस बजे वह उसे लेकर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचा। वहां मौजूद डाक्टर ने उसे देखकर कहा कि घर ले जाओ। यह सुनते ही बशीर रोने लगा। उसने भर्ती करने के लिए डाक्टर के हाथ पैर जोड़े। भर्ती न होने पर वह बच्ची को गोद में लेकर बाहर आ गया। अस्पताल गेट पर पहुंचते ही गुड़िया ने दमतोड़ दिया। उसे यह भी पता नहीं चला, वह फिर अस्पताल पहुंचा तो डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद वह बच्ची का शव लेकर घर आ गया।
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