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Bareilly News: रैन बसेरे खाली, खुले में ठिठुर रही जिंदगी
Thu, 04 Jan 2024 01:43 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Thu, 04 Jan 2024 01:43 AM IST
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बरेली। नगर निगम के अस्थायी रैन बसेरों में बेसहारा, असहाय, गरीब और जरूरतमंद लोगों को जगह नहीं मिल पा रही है। वहां तखत और रजाई-गद्दे की व्यवस्था तो है, पर सर्द रातों में इनका इस्तेमाल करने के लिए जरूरतमंदों को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। केयर टेकर की लापरवाही से अस्थायी रैन बसेरों के बेडों पर कुत्ते आराम फरमा रहे हैं। सेटेलाइट, पुराने बस अड्डे, चौपुला, रेलवे स्टेशन समेत अन्य स्थानों पर लोगों को खुले में रात काटनी पड़ रही है।
सेटेलाइट बस अड्डे के पास 25, पुराने बस अड्डे में 30, अटल सेतु के नीचे 25 बेड के अस्थायी रैन बसेरे बने हैं। तीनों रैन बसेरों में बुधवार की रात दो-दो, तीन-तीन लोग ही मिले। हालांकि, केयर टेकर ने दावा किया कि मंगलवार रात रैन बसेरों में ठहरने वाले लोगों की संख्या ज्यादा रही। अटल सेतु के नीचे स्थित रैन बसेरे में कुत्ता बेड पर बैठा मिला।
सेटेलाइट बस अड्डे के पास स्थित रैन बसेरे में बुधवार रात तीन लोग ही मिले। बाकी 27 बेड खाली थे। वहीं, बस अड्डे के टिन शेड के नीचे फर्श पर 10-12 मजबूर लोग सिर्फ चादर ओढ़कर सोते मिले। यहां सो रहे निगोही के हरभजन ने बताया कि रैन बसेरे में आधार कार्ड मांगते हैं। उनके पास आधार कार्ड नहीं है। वह मजदूरी करते हैं और रात को बस अड्डे पर ही सो जाते हैं।
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पुराने बस अड्डे में बने रैन बसेरा में बिजली गुल होने के कारण घुप्प अंधेरा था। वहां केवल चार लोग ही ठहरे थे। रैन बसेरा नाले के पास होने के कारण बदबू से यहां रुकना भी मुश्किल होता है। बाहर अलाव तो लगाया गया था, लेकिन लकड़ी कम होने के कारण रात 12 बजे तक वह ठंडा पड़ गया। दूसरी ओर बस अड्डे के टिन शेड में कई लोग सर्द रात में फर्श पर सोते मिले।
अटल सेतु के नीचे बना रैन बसेरा ही लावारिस नजर आया। आसपास लोग फुटपाथ पर सोते नजर आए। वहीं, रैन बसेरे में तीन जरूरतमंद लोगों के साथ बेड पर एक कुत्ता आराम फरमाता मिला। यहां केयर टेकर भी मौजूद नहीं था। पूछने पर एक मुसाफिर ने बकाया कि कुछ देर पहले केयर टेकर कहीं चला गया था। रैन बसेरा में रात को कई कुत्ते आ जाते हैं।
नगर निगम स्थित 12 बेड के स्थायी रैन बसेरे में 17 लोग मिले। कुछ बेड पर दो-दो लोग सोए थे तो कुछ लोग जमीन पर लेटे मिले। केयर टेकर धर्मेंद्र ने बताया कि नगर निगम की टीम रात 11 बजे फुटपाथ पर सो रहे सात-आठ लोगों को रैन बसेरे में लेकर पहुंची थी। यहां सभी 12 बेड पहले से ही फुल थे। ऐसे में एक बेड पर दो-दो लोगों को लिटाना पड़ा। कुछ लोग जमीन पर भी सो रहे हैं।
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सेटेलाइट बस अड्डे के पास 25, पुराने बस अड्डे में 30, अटल सेतु के नीचे 25 बेड के अस्थायी रैन बसेरे बने हैं। तीनों रैन बसेरों में बुधवार की रात दो-दो, तीन-तीन लोग ही मिले। हालांकि, केयर टेकर ने दावा किया कि मंगलवार रात रैन बसेरों में ठहरने वाले लोगों की संख्या ज्यादा रही। अटल सेतु के नीचे स्थित रैन बसेरे में कुत्ता बेड पर बैठा मिला।
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सेटेलाइट बस अड्डे के पास स्थित रैन बसेरे में बुधवार रात तीन लोग ही मिले। बाकी 27 बेड खाली थे। वहीं, बस अड्डे के टिन शेड के नीचे फर्श पर 10-12 मजबूर लोग सिर्फ चादर ओढ़कर सोते मिले। यहां सो रहे निगोही के हरभजन ने बताया कि रैन बसेरे में आधार कार्ड मांगते हैं। उनके पास आधार कार्ड नहीं है। वह मजदूरी करते हैं और रात को बस अड्डे पर ही सो जाते हैं।
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पुराने बस अड्डे में बने रैन बसेरा में बिजली गुल होने के कारण घुप्प अंधेरा था। वहां केवल चार लोग ही ठहरे थे। रैन बसेरा नाले के पास होने के कारण बदबू से यहां रुकना भी मुश्किल होता है। बाहर अलाव तो लगाया गया था, लेकिन लकड़ी कम होने के कारण रात 12 बजे तक वह ठंडा पड़ गया। दूसरी ओर बस अड्डे के टिन शेड में कई लोग सर्द रात में फर्श पर सोते मिले।
अटल सेतु के नीचे बना रैन बसेरा ही लावारिस नजर आया। आसपास लोग फुटपाथ पर सोते नजर आए। वहीं, रैन बसेरे में तीन जरूरतमंद लोगों के साथ बेड पर एक कुत्ता आराम फरमाता मिला। यहां केयर टेकर भी मौजूद नहीं था। पूछने पर एक मुसाफिर ने बकाया कि कुछ देर पहले केयर टेकर कहीं चला गया था। रैन बसेरा में रात को कई कुत्ते आ जाते हैं।
नगर निगम स्थित 12 बेड के स्थायी रैन बसेरे में 17 लोग मिले। कुछ बेड पर दो-दो लोग सोए थे तो कुछ लोग जमीन पर लेटे मिले। केयर टेकर धर्मेंद्र ने बताया कि नगर निगम की टीम रात 11 बजे फुटपाथ पर सो रहे सात-आठ लोगों को रैन बसेरे में लेकर पहुंची थी। यहां सभी 12 बेड पहले से ही फुल थे। ऐसे में एक बेड पर दो-दो लोगों को लिटाना पड़ा। कुछ लोग जमीन पर भी सो रहे हैं।