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दुकानें बंद, घरों पर ही करें माता का पूजन
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प्रतीकात्मक फोटो
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बरेली। मां दुर्गा की आराधना और पूजन करने के लिए पावन नवरात्र 25 मार्च से प्रारंभ हो रहा है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक रेवती नक्षत्र और ब्रह्मयोग में शुरू हो रही नवरात्र में माता का पूजन बेहद शुभकारी होगा। दूसरी ओर, लॉक डाउन के चलते शहर के बाजार में पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है। सोमवार को हवन पूजन सामग्री खरीदने के लिए लोग भटकते रहे। हालांकि, तमाम गलियों और मोहल्लों में चोरी छिपे खोली गई दुकानों पर पहुंचकर लोगों ने माता के लिए चुनरी, नारियल समेत हवन सामग्री की खरीदारी की।
सोमवार को पूजन सामग्री खरीदने के लिए लॉक डाउन के बावजूद श्रद्धालु घरों से निकले। कुतुबखाना, कोहाड़ापीर, श्यामगंज आदि प्रमुख बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। ऐसे में परंपरानुसार पूजन सामग्री के बगैर माता का पूजन कैसे की जाए, इस पर चर्चा चलती रही। ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार ने बताया कि इन विपरीत परिस्थितियों में माता की मौन आराधना किए जाने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि मौन साधना में पदार्थो की आवश्यकता नहीं होती है। ऐसे ऋतु परिवर्तन के समय ईश्वर के समीप बढ़ने से आत्मा के प्रति परमात्मा की जो सन्देश ध्वनियां आती हैं, उन्हें मन और वाणी से मौन होकर ही सुना जा सकता है। कहा, भगवती की साधना में जप और मौन साधना का विशेष महत्व है। इसमें बाह्य इन्द्रियों के साथ अंत: इन्द्रियों का भी शुद्धिकरण हो जाता है। बताया कि पूजन सामग्री न होने के बाद भी भगवती की फोटो के सामने देसी घी का दिया जलाकर कलश में चावल, जौ डालकर उसपर दीपक रखकर भगवती को ध्यान के माध्यम से नमन करें। पुष्प की जगह चावल और चुनरी की जगह कलावा प्रयोग कर सकते हैं। साधना के समय दीया जलता रहे और आंख बंद कर भगवती को ध्यान स्वरूप में सभी वस्तुए चढ़ायें।
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सोमवार को पूजन सामग्री खरीदने के लिए लॉक डाउन के बावजूद श्रद्धालु घरों से निकले। कुतुबखाना, कोहाड़ापीर, श्यामगंज आदि प्रमुख बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। ऐसे में परंपरानुसार पूजन सामग्री के बगैर माता का पूजन कैसे की जाए, इस पर चर्चा चलती रही। ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार ने बताया कि इन विपरीत परिस्थितियों में माता की मौन आराधना किए जाने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि मौन साधना में पदार्थो की आवश्यकता नहीं होती है। ऐसे ऋतु परिवर्तन के समय ईश्वर के समीप बढ़ने से आत्मा के प्रति परमात्मा की जो सन्देश ध्वनियां आती हैं, उन्हें मन और वाणी से मौन होकर ही सुना जा सकता है। कहा, भगवती की साधना में जप और मौन साधना का विशेष महत्व है। इसमें बाह्य इन्द्रियों के साथ अंत: इन्द्रियों का भी शुद्धिकरण हो जाता है। बताया कि पूजन सामग्री न होने के बाद भी भगवती की फोटो के सामने देसी घी का दिया जलाकर कलश में चावल, जौ डालकर उसपर दीपक रखकर भगवती को ध्यान के माध्यम से नमन करें। पुष्प की जगह चावल और चुनरी की जगह कलावा प्रयोग कर सकते हैं। साधना के समय दीया जलता रहे और आंख बंद कर भगवती को ध्यान स्वरूप में सभी वस्तुए चढ़ायें।
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