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Bareilly News: ब्लैक स्पॉट सूची में नैनीताल हाईवे, भोजीपुरा सीएचसी को ट्रॉमा सेंटर बनाने की तैयारी

Sat, 04 Jul 2026 04:23 PM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Sat, 04 Jul 2026 04:23 PM IST
सार

बरेली के भोजीपुरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को ट्रामा सेंटर बनाया जाएगा। यह नैनीताल हाईवे पर दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों को कम करने में मदद करेगा। इसके लिए पांच विशेषज्ञ चिकित्सक और 68 उपकरण मांगे गए हैं। 

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Preparations underway to upgrade Bhojipura CHC to a trauma center in Bareilly
भोजीपुरा सीएचसी - फोटो : संवाद

विस्तार

बरेली के भोजीपुरा से गुजर रहा नैनीताल हाईवे दुर्घटना बहुल (ब्लैक स्पॉट) सूची में शामिल है। जीरो फैटिलिटी डिस्ट्रिक्ट मुहिम में हादसों में कमी आई है। अब सुरक्षित सफर समेत बेहतर इलाज के लिए सीएचसी को ट्रॉमा सेंटर बनाने की तैयारी है। इसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सक और उपकरण मांगे गए हैं।

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जिला मोटर वाहन दुर्घटना निधि ट्रस्ट के नोडल अधिकारी डॉ. पवन कपाही के मुताबिक शुक्रवार को अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य ने शून्य मृत्यु दर जिला (जेडएफडी) की समीक्षा के दौरान भोजीपुरा सीएचसी पर ट्रॉमा सेंटर संबंधी संचालन को शामिल किए जाने की जानकारी दी। इसके लिए एक-एक ऑर्थो, न्यूरो, एनेस्थेटिक समेत पांच विशेषज्ञ चिकित्सक की मांग की है। इसके अलावा ट्रॉमा सेंटर के लिए जरूरी 68 उपकरणों का भी प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। 
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इसकी जानकारी समीक्षा के दौरान अपर मुख्य सचिव को दी गई। ताकि कवायद तेजी से पूरी हो सके। बताया कि पूर्व में पांच सीएचसी  फरीदपुर, बिथरी चैनपुर, भोजीपुरा, मीरगंज, बहेड़ी को ट्रॉमा सेंटर के तौर पर विकसित करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें भोजीपुरा का चयन हुआ है। बताया कि जब तक विशेषज्ञ चिकित्सक और उपकरण नहीं होंगे, ट्रॉमा सेंटर नहीं बन पाएगा। 

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निजी अस्पतालों को फिर दिया जाएगा प्रशिक्षण
डॉ. कपाही के मुताबिक सरकारी अस्पतालों में फिलहाल एक ही सीएचसी का चयन हुआ है। जबकि इसके अलावा 30 निजी अस्पतालों में भी गोल्डन ऑवर के तहत हाईवे पर दुर्घटना के घायलों का इलाज कैशलेस होगा। उनकी सूची जिला प्रशासन को भेज दी गई है। अस्पतालों के स्टाफ का पूर्व में प्रशिक्षण हो चुका है, लेकिन संवेदीकरण के लिए फिर से कार्यशाला होगी ताकि इलाज, भुगतान, रिकॉर्ड में अड़चन न रहे।

जानिए, क्या है शून्य मृत्युदर
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और सेवलाइफ फाउंडेशन की एक पहल है। इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों पर अंकुश लगाना है। उत्तर प्रदेश के 20 जिलों को शामिल किया गया है। जहां जीवन सुरक्षा रणनीति के तहत पांच बिन्दुओं पर कार्य किया जा रहा है। इसमें इंजीनियरिंग, प्रवर्तन, आपातकालीन देखभाल, जागरूकता और मूल्यांकन शामिल हैं।

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