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समस्या लेकर आए हो... पहले स्वच्छता सर्वेक्षण का फीडबैक तो देने दो
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अधिकारी और कर्मचारी खुद ही स्वच्छता एप पर लोगों की ओर से दे रहे हैं फीडबैक
ओडीएफ के तहत शनिवार को केेंद्रीय टीम ने शौचालयों का किया औचक निरीक्षण
बरेली। साल भर तक नगर निगम में मेयर और नगर आयुक्त के बीच तनातनी चलती रही तो दूसरी ओर, शहरवासी गंदगी, चोक नाले नालियां, गंदे शौचालय और जगह-जगह अतिक्रमण और जाम से जूझते रहे। आखिरकार अब परेशान लोगों को अफसरों को सबक सिखाने का मौका मिला तो उन्होंने फीडबैक देने से हाथ खींच लिए। इससे निपटने के लिए नगर निगम के कर्मचारियों ने नया तरीका ढूंढलिया है। जो फरियादी नगर निगम पहुंच रहे हैं, उनके मोबाइल में एप्लीकेशन डाउनलोड कराकर खुद ही फीडबैक दे रहे हैं। वहीं, स्वच्छता के दूत जमीनी हकीकत देखने के लिए वार्डों का निरीक्षण कर रहे हैं।
बताया जाता है कि केंद्र सरकार के स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर तय मानकों पर नगर निगम का उतर पाना बेहद कठिन है। करीब साल भर तक अफसर विकास का दावा करते रहे, लेकिन कोई भी प्रयास धरातल पर नहीं उतरा। इससे नाराज जनता ने फीडबैक देनेे में उदासीन रवैया अपना लिया है, जिसे देखते हुए रैंकिंग इस बार भी काफी निचले पायदान पर होने की सुगबु़गाहट नगर निगम में शुरू हो गई है। ऐसे में नगर निगम के सभी विभागों के अधिकारी, कर्मचारी मोबाइल फोन पर स्वच्छता एप के जरिए लोगों की ओर से खुद ही फीडबैक देकर नंबर बढ़ाने में जुटे हैं। बता दें कि सर्वेक्षण में फीडबैक के भी अंक जुड़ेंगे। इसके लिए आबादी का करीब दो प्रतिशत यानी दो लाख लोगों का फीडबैक मिलना जरूरी है।
निरीक्षण में केंद्रीय टीम को खराब मिली शौचालयों की स्थिति
शनिवार को सुबह से ही छह सदस्यीय केंद्रीय टीम अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शहर का जायजा लेने में जुटी रही। किला, कुदेशिया फाटक, स्टेडियम रोड, डेलापीर, सुभाषनगर और सिविल लाइंस में बनाए गए शौचालयों की स्थिति देखी। बताते हैं कि एक ओर टीम निरीक्षण में जुटी थी तो दूसरी ओर निगम की टीम शौचालयों की सफाई और सड़कों के किनारे ओडीएफ आदि की व्यवस्था बनाने में जुटी थी। किला और स्टेडियम रोड स्थित शौचालयों की स्थिति बेहद खराब मिली है।
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ओडीएफ के तहत शनिवार को केेंद्रीय टीम ने शौचालयों का किया औचक निरीक्षण
बरेली। साल भर तक नगर निगम में मेयर और नगर आयुक्त के बीच तनातनी चलती रही तो दूसरी ओर, शहरवासी गंदगी, चोक नाले नालियां, गंदे शौचालय और जगह-जगह अतिक्रमण और जाम से जूझते रहे। आखिरकार अब परेशान लोगों को अफसरों को सबक सिखाने का मौका मिला तो उन्होंने फीडबैक देने से हाथ खींच लिए। इससे निपटने के लिए नगर निगम के कर्मचारियों ने नया तरीका ढूंढलिया है। जो फरियादी नगर निगम पहुंच रहे हैं, उनके मोबाइल में एप्लीकेशन डाउनलोड कराकर खुद ही फीडबैक दे रहे हैं। वहीं, स्वच्छता के दूत जमीनी हकीकत देखने के लिए वार्डों का निरीक्षण कर रहे हैं।
बताया जाता है कि केंद्र सरकार के स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर तय मानकों पर नगर निगम का उतर पाना बेहद कठिन है। करीब साल भर तक अफसर विकास का दावा करते रहे, लेकिन कोई भी प्रयास धरातल पर नहीं उतरा। इससे नाराज जनता ने फीडबैक देनेे में उदासीन रवैया अपना लिया है, जिसे देखते हुए रैंकिंग इस बार भी काफी निचले पायदान पर होने की सुगबु़गाहट नगर निगम में शुरू हो गई है। ऐसे में नगर निगम के सभी विभागों के अधिकारी, कर्मचारी मोबाइल फोन पर स्वच्छता एप के जरिए लोगों की ओर से खुद ही फीडबैक देकर नंबर बढ़ाने में जुटे हैं। बता दें कि सर्वेक्षण में फीडबैक के भी अंक जुड़ेंगे। इसके लिए आबादी का करीब दो प्रतिशत यानी दो लाख लोगों का फीडबैक मिलना जरूरी है।
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निरीक्षण में केंद्रीय टीम को खराब मिली शौचालयों की स्थिति
शनिवार को सुबह से ही छह सदस्यीय केंद्रीय टीम अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शहर का जायजा लेने में जुटी रही। किला, कुदेशिया फाटक, स्टेडियम रोड, डेलापीर, सुभाषनगर और सिविल लाइंस में बनाए गए शौचालयों की स्थिति देखी। बताते हैं कि एक ओर टीम निरीक्षण में जुटी थी तो दूसरी ओर निगम की टीम शौचालयों की सफाई और सड़कों के किनारे ओडीएफ आदि की व्यवस्था बनाने में जुटी थी। किला और स्टेडियम रोड स्थित शौचालयों की स्थिति बेहद खराब मिली है।
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