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काम तो ज्यादा थे ही, ये बताओ टेंडर किस नियम से बांटे
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बरेली। नगर निगम में 234 निर्माण कार्यों के टेंडर टुकड़ों में निकालने के मामले में प्रभारी चीफ इंजीनियर संजय चौहान को जवाब देते नहीं बन रहा है। बृहस्पतिवार को उन्होंने मेयर उमेश गौतम को लिखित जवाब भी भेजा और खुद भी पेश होकर स्पष्टीकरण दिया लेकिन मेयर इससे संतुष्ट नहीं हुए। संजय चौहान ने मेयर को बताया कि कामों की संख्या ज्यादा होने के चलते टेंडर अलग-अलग निकाले गए लेकिन जब मेयर ने इसका नियम पूछा तो वह कोई जवाब नहीं दे सके। अब प्रभारी चीफ इंजीनियर को दोबारा स्पष्टीकरण देना होगा।
लोकसभा चुनाव के बाद 16 अगस्त को नगर निगम में हुई 14वें वित्त आयोग की बैठक में 28.85 करोड़ रुपये की लागत से 234 निर्माण कार्यों को मंजूरी दी गई थी। इस राशि से नगर निगम क्षेत्र में सड़कों और नाले-नालियों के निर्माण होने थे। मगर निर्माण विभाग ने एकसाथ मंजूर हुए इन कार्यों के टेंडर टुकड़ों में निकाले। मेयर उमेश गौतम ने इसे चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की कोशिश मानते हुए बुधवार को प्रभारी चीफ इंजीनियर संजय चौहान से चार बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा। संजय चौहान ने बृहस्पतिवार को लिखित एवं मेयर के समक्ष पेश होकर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्यों की संख्या ज्यादा होने के कारण टेंडर अलग-अलग निकाले गए लेकिन अब ई-टेंडरिंग होती है इसलिए गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है। मगर मेयर उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हैं, उनका कहना है कि टेंडर का बंटवारा किस नियम से किया गया, इस पर दोबारा जवाब तलब करेंगे।
मार्च तक कैसे पूरा होगा काम
मेयर के मुताबिक प्रभारी चीफ इंजीनियर ने उन्हें बताया है कि यह निर्माण कार्य मार्च 2020 तक पूरे हो जाएंगे, जबकि कुछ कार्य ऐसे हैं, जिनके अभी टेंडर तक नहीं हुए हैं, फिर उनके वर्क ऑर्डर जारी होंगे। मेयर का कहना है कि उन्हें यकीन नहीं है कि मार्च तक यह कार्य पूरे हो सकेंगे।
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मैंने मेयर साहब को अपना स्पष्टीकरण दे दिया है। कामों की संख्या ज्यादा होने के चलते उन्हें टुकड़ों में निकाला गया। ई-टेंडरिंग में पूरे प्रदेश के ठेकेदार शामिल होते हैं। इसमें गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं होती है। - संजय चौहान, प्रभारी चीफ इंजीनियर
जवाब संतोषजनक नहीं है। ज्यादा काम के टेंडर निकलने से समाज को एक अच्छा संदेश मिलता। प्रभारी चीफ इंजीनियर से दोबारा स्पष्टीकरण मांगा जाएगा, वह बताएं कि टेंडर का बंटवारा किस नियम के तहत किया। - उमेश गौतम, मेयर
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लोकसभा चुनाव के बाद 16 अगस्त को नगर निगम में हुई 14वें वित्त आयोग की बैठक में 28.85 करोड़ रुपये की लागत से 234 निर्माण कार्यों को मंजूरी दी गई थी। इस राशि से नगर निगम क्षेत्र में सड़कों और नाले-नालियों के निर्माण होने थे। मगर निर्माण विभाग ने एकसाथ मंजूर हुए इन कार्यों के टेंडर टुकड़ों में निकाले। मेयर उमेश गौतम ने इसे चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की कोशिश मानते हुए बुधवार को प्रभारी चीफ इंजीनियर संजय चौहान से चार बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा। संजय चौहान ने बृहस्पतिवार को लिखित एवं मेयर के समक्ष पेश होकर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्यों की संख्या ज्यादा होने के कारण टेंडर अलग-अलग निकाले गए लेकिन अब ई-टेंडरिंग होती है इसलिए गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है। मगर मेयर उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हैं, उनका कहना है कि टेंडर का बंटवारा किस नियम से किया गया, इस पर दोबारा जवाब तलब करेंगे।
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मार्च तक कैसे पूरा होगा काम
मेयर के मुताबिक प्रभारी चीफ इंजीनियर ने उन्हें बताया है कि यह निर्माण कार्य मार्च 2020 तक पूरे हो जाएंगे, जबकि कुछ कार्य ऐसे हैं, जिनके अभी टेंडर तक नहीं हुए हैं, फिर उनके वर्क ऑर्डर जारी होंगे। मेयर का कहना है कि उन्हें यकीन नहीं है कि मार्च तक यह कार्य पूरे हो सकेंगे।
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मैंने मेयर साहब को अपना स्पष्टीकरण दे दिया है। कामों की संख्या ज्यादा होने के चलते उन्हें टुकड़ों में निकाला गया। ई-टेंडरिंग में पूरे प्रदेश के ठेकेदार शामिल होते हैं। इसमें गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं होती है। - संजय चौहान, प्रभारी चीफ इंजीनियर
जवाब संतोषजनक नहीं है। ज्यादा काम के टेंडर निकलने से समाज को एक अच्छा संदेश मिलता। प्रभारी चीफ इंजीनियर से दोबारा स्पष्टीकरण मांगा जाएगा, वह बताएं कि टेंडर का बंटवारा किस नियम के तहत किया। - उमेश गौतम, मेयर