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Bareilly News: लाइसेंस न होने के कारण प्रतियोगिताओं में भाग नहीं ले पाते खिलाड़ी
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बरेली। राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले निशानेबाज कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा ही नहीं ले पाते हैं। वजह, उनके पास शस्त्र लाइसेंस नहीं होता है। शहर के कई खिलाड़ी लंबे समय से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। कभी-कभी उधार के शस्त्र से काम चल जाता है, लेकिन कई बार तो हजारों खर्च करने पर भी शस्त्र किराये पर नहीं मिल पाते। निशानेबाज शस्त्र इसलिए ही खरीदते है कि रोजाना उसके इस्तेमाल से वह प्रतियोगिता में भी पूरे आत्मविश्वास के साथ उतर सकें, लेकिन लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया में उलझे खिलाड़ी अब बस डीएम की स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं। खिलाड़ियों को 45 हजार तक खर्च कर शस्त्र उधार लेना पड़ता है। कई बार पैसे खर्च करने के बाद भी शस्त्र किराये पर नहीं मिल पाते। ऐसे में वे प्रतियोगिता में प्रतिभाग नहीं कर पाते, क्योंकि हर खिलाड़ी के शस्त्र की अलग से माॅनिटरिंग की जाती है।
अधिकारियों के कहने पर भी नहीं होता काम
लाइसेंस बन वाले के लिए खिलाड़ियों ने विधायक व यूपी शूटिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष द्वारा स्वीकृत प्रार्थना पत्र कई बार जिलाधिकारी कार्यालय में दिया, लेकिन लाइसेंस नहीं बन सका। वहीं, कुछ लोगों का लाइसेंस चंद दिनों में ही जारी किया जा रहा है।
ऑनलाइन पोर्टल भी ठप
खिलाडियों ने ऑनलाइन आवेदन करने की भी कई बार कोशिश की है, लेकिन शहर में पोर्टल चलता ही नहीं है। अगर चल भी जाए तो उसकी हार्ड कॉपी भी कार्यालय में जमा करनी पड़ती है और फिर वही प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
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छह महीनों से पिस्टल लाइसेंस का इंतजार कर रहा हूं। तीन महीनों से तो फाइल जिलाधिकारी के कार्यालय में अटकी हुई है। पांच से छह बार प्रार्थना पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। हाल ही में एक नेशनल प्रतियोगिता में हिस्सा लेना था, लेकिन लाइसेंस न होने के कारण प्रतिभाग नहीं कर सका। - पीयूष प्रजापति
कई बार अधिकारियों से लिखित व मौखिक प्रार्थना कर चुके हैं। हर बार टाल दिया जाता है। जवाब मिलता है कि जैसे पहले होता था, वैसे ही प्रतियोगिता में हिस्सा लो। हर बार 45 हजार खर्च कर शस्त्र चलाने से नतीजों पर असर पड़ता है और अर्थिक समस्या भी बढ़ रही है। - जीवन सिंह
2021 में लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। 2014 में अंतरराष्ट्रीय ट्रायल्स में प्रतिभागी होने का प्रमाण पत्र भी लगाया, लेकिन दस्तावेज जिलाधिकारी कार्यालय तक ही नहीं पहुंचे। दो साल में कई बार आवेदन कर चुके हैं। हर बार कुछ न कुछ बहाना बनाकर लौटा दिया जाता है। - आकाश सोलंकी
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अधिकारियों के कहने पर भी नहीं होता काम
लाइसेंस बन वाले के लिए खिलाड़ियों ने विधायक व यूपी शूटिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष द्वारा स्वीकृत प्रार्थना पत्र कई बार जिलाधिकारी कार्यालय में दिया, लेकिन लाइसेंस नहीं बन सका। वहीं, कुछ लोगों का लाइसेंस चंद दिनों में ही जारी किया जा रहा है।
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ऑनलाइन पोर्टल भी ठप
खिलाडियों ने ऑनलाइन आवेदन करने की भी कई बार कोशिश की है, लेकिन शहर में पोर्टल चलता ही नहीं है। अगर चल भी जाए तो उसकी हार्ड कॉपी भी कार्यालय में जमा करनी पड़ती है और फिर वही प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
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छह महीनों से पिस्टल लाइसेंस का इंतजार कर रहा हूं। तीन महीनों से तो फाइल जिलाधिकारी के कार्यालय में अटकी हुई है। पांच से छह बार प्रार्थना पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। हाल ही में एक नेशनल प्रतियोगिता में हिस्सा लेना था, लेकिन लाइसेंस न होने के कारण प्रतिभाग नहीं कर सका। - पीयूष प्रजापति
कई बार अधिकारियों से लिखित व मौखिक प्रार्थना कर चुके हैं। हर बार टाल दिया जाता है। जवाब मिलता है कि जैसे पहले होता था, वैसे ही प्रतियोगिता में हिस्सा लो। हर बार 45 हजार खर्च कर शस्त्र चलाने से नतीजों पर असर पड़ता है और अर्थिक समस्या भी बढ़ रही है। - जीवन सिंह
2021 में लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। 2014 में अंतरराष्ट्रीय ट्रायल्स में प्रतिभागी होने का प्रमाण पत्र भी लगाया, लेकिन दस्तावेज जिलाधिकारी कार्यालय तक ही नहीं पहुंचे। दो साल में कई बार आवेदन कर चुके हैं। हर बार कुछ न कुछ बहाना बनाकर लौटा दिया जाता है। - आकाश सोलंकी