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मल्टीस्टोरी पार्किंग
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कुतुबखाना पर मल्टीस्टोरी
पार्किंग का साफ रास्ता
- आम रास्ता बताकर बीडीए ने लगाई थी आपत्ति, निगम ने अपनी जमीन होने के दिए सबूत
- पुराने प्रोजेक्ट के अनुसार ही होगा काम, मेयर ने शीघ्र कार्रवाई पूरी करने के दिए निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। कुतुबखाना पर नगर निगम ने मल्टीस्टोरी पार्किंग बनाने का प्रस्ताव तैयार किया था, लेकिन बीडीए ने यहां आम रास्ता होने की बात कहकर नक्शा पास करने में अड़ंगा लगा दिया। नगर निगम में राजस्व विभाग ने रिकार्ड की जांच पड़ताल की तो सामने आया कि रास्ता निगम की जमीन से होकर गुजरता है और वहां सारी जमीन नगर निगम की है। बीडीए को इसके सबूत भी दे दिए गए हैं और अब नक्शा पास होने का रास्ता साफ हो गया है।
लंबे समय से कुतुबखाना स्थित मोती पार्क पर मल्टीस्टोरी पार्किंग बनाने को लेकर कवायद चल रही है। मगर यह परियोजना अब तक आगे नहीं बढ़ सकी है। इसके बाद नगर निगम में सत्ता परिवर्तन हुआ तो मेयर उमेश गौतम ने इसे पीपीपी मोड पर बनवाने की योजना बनाई। अगस्त में गाजियाबाद की एक फर्म को इसे बनाने की जिम्मेदारी दी गई। साढ़े चार करोड़ की लागत से बनने वाली इस चार मंजिला पार्किंग में 125 वाहन खड़े करने की व्यवस्था होगी और कुछ कमर्शियल स्पेस होगा। नगर निगम के आर्किटेक्ट ने पार्किंग का नक्शा तैयार किया और इसे मंजूरी के लिए बीडीए को भेजा। मगर बीडीए ने यहां से आम रास्ता गुजरने और 266 वर्ग मीटर जमीन किसी अन्य की होने संबंधी छह बिंदुओं पर आपत्ति लगाकर नगर निगम का प्रस्ताव निरस्त कर दिया था। काफी समय तक यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में रहा, फिर मेयर उमेश गौतम ने राजस्व विभाग को इसके रिकार्ड की पड़ताल करने की जिम्मेदारी सौंपी। जांच में सामने आया कि कुतुबखाना पर मोती पार्क और उससे आसपास सारी नगर निगम की जमीन है। यहां से जो रास्ता गुजर रहा है, वह वैकल्पिक है और नगर निगम ने ही बनाया है। ऐसे में इसे आम रास्ता बताकर बीडीए की आपत्ति जायज नहीं है। लिहाजा नगर निगम ने दस्तावेजों के साथ अब बीडीए में नक्शा पास करने के लिए दोबारा आवेदन की तैयारी कर ली है।
इन बिंदुओं पर थी आपत्ति
- 266 वर्ग मीटर जमीन पर नगर निगम अपना स्वामित्व साबित करे
- पुलिस चौकी और दुकानों पर नगर निगम अपना स्वामित्व साबित करे
- बेसमेंट, ग्राउंड, फर्स्ट फ्लोर पर पार्किंग अनिवार्य रूप से करनी होगी
- प्रस्तावित दुकानों के निर्माण से पहले पार्किंग के लिए जमीन कहां छोड़ी जाएगी
- पुलिस चौकी, पराग पार्लर, ट्रांसफार्मर, पंप हाउस और इज्जतघर का प्रस्तावित मानचित्र में मिलान क्यों नहीं है
- घंटाघर एतिहासिक इमारत है। उसको न तो गिराया जाए, न ही सार्वजनिक सड़क पार्किंग में शामिल की जाए
वर्जन
बीडीए की आपत्ति निराधार है। कुतुबखाना पर सारी जमीन नगर निगम की है और उसमें से ही रास्ता दिया गया है। ऐसे में बीडीए नक्शे पर आपत्ति नहीं कर सकता है। नक्शा पास कराने के लिए दोबारा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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- उमेश गौतम, मेयर
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कुतुबखाना पर मल्टीस्टोरी
पार्किंग का साफ रास्ता
- आम रास्ता बताकर बीडीए ने लगाई थी आपत्ति, निगम ने अपनी जमीन होने के दिए सबूत
- पुराने प्रोजेक्ट के अनुसार ही होगा काम, मेयर ने शीघ्र कार्रवाई पूरी करने के दिए निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। कुतुबखाना पर नगर निगम ने मल्टीस्टोरी पार्किंग बनाने का प्रस्ताव तैयार किया था, लेकिन बीडीए ने यहां आम रास्ता होने की बात कहकर नक्शा पास करने में अड़ंगा लगा दिया। नगर निगम में राजस्व विभाग ने रिकार्ड की जांच पड़ताल की तो सामने आया कि रास्ता निगम की जमीन से होकर गुजरता है और वहां सारी जमीन नगर निगम की है। बीडीए को इसके सबूत भी दे दिए गए हैं और अब नक्शा पास होने का रास्ता साफ हो गया है।
लंबे समय से कुतुबखाना स्थित मोती पार्क पर मल्टीस्टोरी पार्किंग बनाने को लेकर कवायद चल रही है। मगर यह परियोजना अब तक आगे नहीं बढ़ सकी है। इसके बाद नगर निगम में सत्ता परिवर्तन हुआ तो मेयर उमेश गौतम ने इसे पीपीपी मोड पर बनवाने की योजना बनाई। अगस्त में गाजियाबाद की एक फर्म को इसे बनाने की जिम्मेदारी दी गई। साढ़े चार करोड़ की लागत से बनने वाली इस चार मंजिला पार्किंग में 125 वाहन खड़े करने की व्यवस्था होगी और कुछ कमर्शियल स्पेस होगा। नगर निगम के आर्किटेक्ट ने पार्किंग का नक्शा तैयार किया और इसे मंजूरी के लिए बीडीए को भेजा। मगर बीडीए ने यहां से आम रास्ता गुजरने और 266 वर्ग मीटर जमीन किसी अन्य की होने संबंधी छह बिंदुओं पर आपत्ति लगाकर नगर निगम का प्रस्ताव निरस्त कर दिया था। काफी समय तक यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में रहा, फिर मेयर उमेश गौतम ने राजस्व विभाग को इसके रिकार्ड की पड़ताल करने की जिम्मेदारी सौंपी। जांच में सामने आया कि कुतुबखाना पर मोती पार्क और उससे आसपास सारी नगर निगम की जमीन है। यहां से जो रास्ता गुजर रहा है, वह वैकल्पिक है और नगर निगम ने ही बनाया है। ऐसे में इसे आम रास्ता बताकर बीडीए की आपत्ति जायज नहीं है। लिहाजा नगर निगम ने दस्तावेजों के साथ अब बीडीए में नक्शा पास करने के लिए दोबारा आवेदन की तैयारी कर ली है।
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इन बिंदुओं पर थी आपत्ति
- 266 वर्ग मीटर जमीन पर नगर निगम अपना स्वामित्व साबित करे
- पुलिस चौकी और दुकानों पर नगर निगम अपना स्वामित्व साबित करे
- बेसमेंट, ग्राउंड, फर्स्ट फ्लोर पर पार्किंग अनिवार्य रूप से करनी होगी
- प्रस्तावित दुकानों के निर्माण से पहले पार्किंग के लिए जमीन कहां छोड़ी जाएगी
- पुलिस चौकी, पराग पार्लर, ट्रांसफार्मर, पंप हाउस और इज्जतघर का प्रस्तावित मानचित्र में मिलान क्यों नहीं है
- घंटाघर एतिहासिक इमारत है। उसको न तो गिराया जाए, न ही सार्वजनिक सड़क पार्किंग में शामिल की जाए
वर्जन
बीडीए की आपत्ति निराधार है। कुतुबखाना पर सारी जमीन नगर निगम की है और उसमें से ही रास्ता दिया गया है। ऐसे में बीडीए नक्शे पर आपत्ति नहीं कर सकता है। नक्शा पास कराने के लिए दोबारा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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- उमेश गौतम, मेयर