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Bareilly News: चार हजार से ज्यादा ई-रिक्शा लापता, जुर्माना भी नहीं भरा
Thu, 07 Dec 2023 01:45 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Thu, 07 Dec 2023 01:45 AM IST
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बरेली। परिवहन कार्यालय में पंजीकृत चार हजार से ज्यादा ई-रिक्शा लापता हैं। बीते तीन माह में ट्रैफिक पुलिस इनको तलाशने में नाकाम रही। इनमें 1,500 ऐसे ई-रिक्शा शामिल हैं, जिन्होंने चालान के बाद जुर्माना भी नहीं भरा है। ऐसी स्थिति में पुलिस ने कलर कोडिंग की रणनीति छोड़कर व्यस्त इलाकों में ई-रिक्शा के आवागमन को प्रतिबंधित कर दिया है।
अगस्त के पहले सप्ताह में ट्रैफिक पुलिस ने कलर कोडिंग का फार्मूला निकाला था। इसके लिए परिवहन विभाग से पंजीकृत ई-रिक्शा की सूची मांगी गई। जिले में 12 हजार से ज्यादा ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। परिवहन विभाग ने ट्रैफिक पुलिस को जो सूची दी, उसमें दर्ज चार हजार से ज्यादा ई-रिक्शा का कोई पता नहीं चल सका। पंजीकरण के बिना भी तमाम ई-रिक्शा शहर की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। कई असेंबल ई-रिक्शा पर तो चेसिस नंबर भी नहीं है।
सहूलियत के साथ समस्या भी बढ़ती जा रही
ई-रिक्शा के संचालन से शहर के लोगों को आवागमन में सहूलियत मिलती है, लेकिन इनकी वजह से यातायात व्यवस्था बेपटरी हो रही है। बीते दो साल में आठ हजार से ज्यादा ई-रिक्शा का पंजीकरण हो चुका है। शहर में 40 से ज्यादा ई-रिक्शा डीलर हैं। ज्यादातर ई-रिक्शा का सामान बाहर से मंगाकर उनको असेंबल कर बेचा जा रहा है।
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कोरोना काल के बाद बढ़ी संख्या
2015-16 में ई-रिक्शा की शुरुआत हुई। तब इनकी संख्या काफी कम थी। कोरोना काल के बाद इनकी संख्या में तेजी से इजाफा हुआ। वर्ष 2021 में 1,380, 2022 में 3,118 और 2023 में अब तक 4,076 ई-रिक्शा का पंजीकरण हुआ है।
वर्जन
ट्रैफिक पुलिस को ई-रिक्शा की पंजीकरण सूची वाहन स्वामी के नाम-पते के साथ उपलब्ध कराई गई थी। अब पुलिस इन ई-रिक्शा स्वामियों को क्यों नहीं तलाश पा रही है, इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता। - मनोज कुमार, एआरटीओ प्रशासन
परिवहन विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई सूची में चार हजार से ज्यादा ई-रिक्शा की तलाश नहीं की जा सकी। इसके चलते कलर कोडिंग की जगह व्यस्त इलाकों में उनका संचालन प्रतिबंधित किया गया है। - राम मोहन सिंह, एसपी ट्रैफिक
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अगस्त के पहले सप्ताह में ट्रैफिक पुलिस ने कलर कोडिंग का फार्मूला निकाला था। इसके लिए परिवहन विभाग से पंजीकृत ई-रिक्शा की सूची मांगी गई। जिले में 12 हजार से ज्यादा ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। परिवहन विभाग ने ट्रैफिक पुलिस को जो सूची दी, उसमें दर्ज चार हजार से ज्यादा ई-रिक्शा का कोई पता नहीं चल सका। पंजीकरण के बिना भी तमाम ई-रिक्शा शहर की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। कई असेंबल ई-रिक्शा पर तो चेसिस नंबर भी नहीं है।
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सहूलियत के साथ समस्या भी बढ़ती जा रही
ई-रिक्शा के संचालन से शहर के लोगों को आवागमन में सहूलियत मिलती है, लेकिन इनकी वजह से यातायात व्यवस्था बेपटरी हो रही है। बीते दो साल में आठ हजार से ज्यादा ई-रिक्शा का पंजीकरण हो चुका है। शहर में 40 से ज्यादा ई-रिक्शा डीलर हैं। ज्यादातर ई-रिक्शा का सामान बाहर से मंगाकर उनको असेंबल कर बेचा जा रहा है।
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कोरोना काल के बाद बढ़ी संख्या
2015-16 में ई-रिक्शा की शुरुआत हुई। तब इनकी संख्या काफी कम थी। कोरोना काल के बाद इनकी संख्या में तेजी से इजाफा हुआ। वर्ष 2021 में 1,380, 2022 में 3,118 और 2023 में अब तक 4,076 ई-रिक्शा का पंजीकरण हुआ है।
वर्जन
ट्रैफिक पुलिस को ई-रिक्शा की पंजीकरण सूची वाहन स्वामी के नाम-पते के साथ उपलब्ध कराई गई थी। अब पुलिस इन ई-रिक्शा स्वामियों को क्यों नहीं तलाश पा रही है, इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता। - मनोज कुमार, एआरटीओ प्रशासन
परिवहन विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई सूची में चार हजार से ज्यादा ई-रिक्शा की तलाश नहीं की जा सकी। इसके चलते कलर कोडिंग की जगह व्यस्त इलाकों में उनका संचालन प्रतिबंधित किया गया है। - राम मोहन सिंह, एसपी ट्रैफिक