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चांद दिखा पहला रोजा आज
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दरगाह ए आला हजरत पर चांद के दीदार करते लोग
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बरेली। माहे मुबारक रमजान शरीफ का चांद मंगलवार को आसमान में नजर आया। तमाम लोगों ने चांद के दीदार कर एक दूसरे को मुबारकबाद पेश की। बुधवार को पहला रोजा होगा।
मंगलवार शाम को रमजान का चांद दिखते ही मुसलमानों ने मुल्क की खुशहाली और हर मुसीबत से उसके महूफज रहने की दुआ की। इसी के साथ मुबारकबाद का सिलसिला शुरू हो गया, जो देर रात तक जारी रहा। इधर, शहर के तमाम इलाकों में चांद के दीदार के लिए लोग खुली जगहों और छतों पर शाम से इकट्ठा होने लगे थे। खासतौर से दरगाह आला हजरत और खानकाह नियाजिया की छतों पर मजमा रहा। जहां खानवादों ने अपने मुरीदों, मदरसे के छात्रों के साथ चांद का दीदार किया और एक दूसरे को दिली मुबारकबाद पेश की।
चांद रात की शाम को बाजार में छाई रौनक
खजला, फेनी और खजूर की खरीदारी के लिए उमड़े लोग
बरेली। माहे रमजान उल मुबारक का महीना शुरू हो गया है। मंगलवार शाम को रमजान शरीफ का चांद देखने से पहले ही लोग बाजारों में निकल पड़े। देखते ही देखते बाजार में रौनक छा गई।
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रात में नौ बजे से कोरोना को लेकर कर्फ्यू लगने की वजह से लोगों ने जल्दी-जल्दी खान-पान और सहरी आदि का सामान खरीदा। खासतौर से खजला, फेनी और खजूर की खरीदारी की गई। फल बहुत ज्यादा महंगे होने की वजह से लोगों ने कम ही खरीदे। सैलानी, कुतुबखाना, बड़ा बाजार, किला और कोहाड़ापीर के बाजारों में काफी भीड़ दिखी। संवाद
रात की रौनक इस बार भी नहीं
बरेली। रमजान के महीने में शहर में रात को जो रौनक देखने को मिलती थी, वह इस बार नहीं दिखाई देगी। रात नौ बजे ही कर्फ्यू की वजह से सड़कें सुनसान हो जाती हैं। लिहाजा लोग सारे काम निपटाकर रात साढ़े आठ बजे ही घरों में कैद हो जाते हैं, जबकि पहले सैलानी और किला इलाके में रमजान के दिनों में रात भर रौनक रहा करती थी, जो इस बार कहीं देखने को नहीं मिलेगी। लोगों में इस बात को लेकर तसल्ली है कि पिछले साल की तरह की स्थिति नहीं है। कम से कम दिन में तो लोग घरों से नहीं निकल पा रहे हैं।
मस्जिदों में तरावीह शुरू
बरेली। इस बार लोग काफी राहत महसूस कर खुदा की बारगाह में बार-बार शुक्र अदा कर रहे हैं कि उन्हें मस्जिद में तरावीह पढ़ने का मौका मिल पाया है। माहे रमजान की चांद रात से ही तरावियों का दौर शुरू हो गया है। तमाम मस्जिदों में कुरान की आयतें गूंजती रहीं और लोग सफों में खड़े होकर सुनते रहे। रमजान के दिनों में पढ़ी जाने वाली यह खास नमाज है जो पूरे रमजान रात में पड़ी जाती है। पिछली बार लोग इससे महरूम रह गए थे। लोग इस बार बेशक तरावीह की नमाज अदा कर रहे हैं, मगर पूरी एहतियात बरतते हुए मास्क लगाने के साथ ही।
सुब्हानी मियां ने दी रमजान की मुबारकबाद
बरेली। मुकद्दस माह रमजान की आला हजरत दरगाह के प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खान (सुब्हानी मियां) और सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी ने मुल्क भर के मुसलमानों को मुबारकबाद दी है। कहा, रमजान के रोजे अल्लाह ने हर मुसलमान आकिल और बालिग पर फर्ज किए हैं। ये पूरा महीना इबादत का है। अल्लाह की रजा की खातिर अपने आप को भूख प्यास और सोहबत से रोके रखना रोजा कहलाता है। उन्होंने साहिबे निसाब मुसलमानों से इस महीने गरीबों की ज्यादा से ज्यादा मदद करने को कहा। सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां ने मुल्क में बढ़ते कोरोना संक्रमण पर फिक्त्रस् जाहिर करते हुए सभी को एहतियात बरतने की सलाह दी है।
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मंगलवार शाम को रमजान का चांद दिखते ही मुसलमानों ने मुल्क की खुशहाली और हर मुसीबत से उसके महूफज रहने की दुआ की। इसी के साथ मुबारकबाद का सिलसिला शुरू हो गया, जो देर रात तक जारी रहा। इधर, शहर के तमाम इलाकों में चांद के दीदार के लिए लोग खुली जगहों और छतों पर शाम से इकट्ठा होने लगे थे। खासतौर से दरगाह आला हजरत और खानकाह नियाजिया की छतों पर मजमा रहा। जहां खानवादों ने अपने मुरीदों, मदरसे के छात्रों के साथ चांद का दीदार किया और एक दूसरे को दिली मुबारकबाद पेश की।
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चांद रात की शाम को बाजार में छाई रौनक
खजला, फेनी और खजूर की खरीदारी के लिए उमड़े लोग
बरेली। माहे रमजान उल मुबारक का महीना शुरू हो गया है। मंगलवार शाम को रमजान शरीफ का चांद देखने से पहले ही लोग बाजारों में निकल पड़े। देखते ही देखते बाजार में रौनक छा गई।
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रात में नौ बजे से कोरोना को लेकर कर्फ्यू लगने की वजह से लोगों ने जल्दी-जल्दी खान-पान और सहरी आदि का सामान खरीदा। खासतौर से खजला, फेनी और खजूर की खरीदारी की गई। फल बहुत ज्यादा महंगे होने की वजह से लोगों ने कम ही खरीदे। सैलानी, कुतुबखाना, बड़ा बाजार, किला और कोहाड़ापीर के बाजारों में काफी भीड़ दिखी। संवाद
रात की रौनक इस बार भी नहीं
बरेली। रमजान के महीने में शहर में रात को जो रौनक देखने को मिलती थी, वह इस बार नहीं दिखाई देगी। रात नौ बजे ही कर्फ्यू की वजह से सड़कें सुनसान हो जाती हैं। लिहाजा लोग सारे काम निपटाकर रात साढ़े आठ बजे ही घरों में कैद हो जाते हैं, जबकि पहले सैलानी और किला इलाके में रमजान के दिनों में रात भर रौनक रहा करती थी, जो इस बार कहीं देखने को नहीं मिलेगी। लोगों में इस बात को लेकर तसल्ली है कि पिछले साल की तरह की स्थिति नहीं है। कम से कम दिन में तो लोग घरों से नहीं निकल पा रहे हैं।
मस्जिदों में तरावीह शुरू
बरेली। इस बार लोग काफी राहत महसूस कर खुदा की बारगाह में बार-बार शुक्र अदा कर रहे हैं कि उन्हें मस्जिद में तरावीह पढ़ने का मौका मिल पाया है। माहे रमजान की चांद रात से ही तरावियों का दौर शुरू हो गया है। तमाम मस्जिदों में कुरान की आयतें गूंजती रहीं और लोग सफों में खड़े होकर सुनते रहे। रमजान के दिनों में पढ़ी जाने वाली यह खास नमाज है जो पूरे रमजान रात में पड़ी जाती है। पिछली बार लोग इससे महरूम रह गए थे। लोग इस बार बेशक तरावीह की नमाज अदा कर रहे हैं, मगर पूरी एहतियात बरतते हुए मास्क लगाने के साथ ही।
सुब्हानी मियां ने दी रमजान की मुबारकबाद
बरेली। मुकद्दस माह रमजान की आला हजरत दरगाह के प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खान (सुब्हानी मियां) और सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी ने मुल्क भर के मुसलमानों को मुबारकबाद दी है। कहा, रमजान के रोजे अल्लाह ने हर मुसलमान आकिल और बालिग पर फर्ज किए हैं। ये पूरा महीना इबादत का है। अल्लाह की रजा की खातिर अपने आप को भूख प्यास और सोहबत से रोके रखना रोजा कहलाता है। उन्होंने साहिबे निसाब मुसलमानों से इस महीने गरीबों की ज्यादा से ज्यादा मदद करने को कहा। सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां ने मुल्क में बढ़ते कोरोना संक्रमण पर फिक्त्रस् जाहिर करते हुए सभी को एहतियात बरतने की सलाह दी है।