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Phone Addiction: मोबाइल फोन की लत बच्चों को बना रही मानसिक बीमार, इसे नजरअंदाज न करें

Fri, 04 Oct 2024 01:58 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 04 Oct 2024 01:58 PM IST
सार

अगर आपका बच्चा भी मोबाइल फोन देखने या ऑनलाइन गेम खेलने का आदी है तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें। मोबाइल फोन की लत बच्चों को बीमार बना रही है। शाहजहांपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज में रोजाना इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। 

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Mobile phone addiction is making children mentally ill
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

सोशल मीडिया पर हरसमय ऑनलाइन रहने के साथ मोबाइल पर गेम और कार्टून देखने की जिद ने बच्चों और किशोरों को इंटरनेट के नशे की गिरफ्त में ला दिया है। शाहजहांपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज की मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना ही चार से पांच बच्चे किशोर आते हैं। व्यवहार चिकित्सा के जरिये उपचार कर मोबाइल की लत से छुटकारा दिलाया जाता है।

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कोरोना काल खत्म होने के बाद से ऑनलाइन पढ़ाई का झंझट खत्म हो चुका है। इसके बाद भी बच्चों से लेकर किशोर-किशोरियां तक मोबाइल छोड़ने को तैयार नहीं हैं। अधिकतर समय गेम खेलते हैं अथवा कार्टून देखते हैं। परिवार से बात करने के बजाये उनका समय मोबाइल पर बीतता है। कुछ क्षण की मोबाइल से दूरी होने पर घबराहट व तनाव होने लगता है। 
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ऐसे रोगों से परेशान चार से पांच बच्चे रोजाना ही ओपीडी में आते हैं। क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक डॉ.रोहताश ईसा बताते हैं कि इंटरनेट लत के आदी बच्चों का उपचार व्यवहार चिकित्सा के जरिये करते हैं। इसमें दवा की आवश्यकता नहीं होती है। मनोचिकित्सा, काउंसलिंग के जरिये उनके मोबाइल की लत को दूर किया जाता है।

केस- एक
तारीन जलालनगर के रहने वाले एक व्यक्ति का 12 साल का बेटा मोबाइल पर कार्टून देखने का लती हो गया। मोबाइल नहीं देने पर आक्रामक हो जाता है। घर का सामान फेंकने लगता है। उसके पिता ने मानसिक रोग विभाग में दिखाया तो उपचार शुरू किया। अब थोड़ी राहत मिली है।

केस- दो
तिलहर के एक गांव की महिला अपनी 15 वर्षीय बेटी को लेकर अस्पताल में पहुंची। उन्होंने बताया कि कोरोना के समय ऑनलाइन पढ़ाई की। तब से बेटी हर समय मोबाइल पर गेम खेलती रहती है। इंटरनेट बंद करने पर बेटी का दिल घबराने लगता है। उसकी आठ थैरेपी होने के बाद राहत मिली है।

अभिभावक भी जिम्मेदार
- माता-पिता ही अधिक समय तक मोबाइल का उपयोग करते हैं तो बच्चे भी साथ बैठकर देखते हैं।
- बच्चे भी मोबाइल लेकर कार्टून या गेम खेलने लगते हैं, वह भी इंटरनेट की जद में आ जाते हैं।
- काम निपटाने के लिए बच्चों की मां मोबाइल देकर उन्हें लती बना देती हैं।

राजकीय मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष गौरव वर्मा ने बताया कि ऑनलाइन न होने पर घबराइट या तनाव होने लगता है। यह इंटरनेट का नशा है। आधुनिक युग में मानसिक रोग में यह बीमारी भी जोड़ी गई है। मरीजों की चिकित्सा के जरिये उपचार किया जाता है।

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