फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Minor dies due to negligence in hospital

वित्त मंत्री के दौरे के अगले ही दिन अस्पताल वालों की लापरवाही से बच्ची की मौत

Mon, 03 Sep 2018 04:50 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Mon, 03 Sep 2018 04:50 PM IST
विज्ञापन
वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल के शनिवार को अपने ही शहर में जिला अस्पताल का दौरा करने और पुरुष और महिला अस्पतालों में मरीजों की बेइंतिहा दुर्दशा देखने के बाद दोनों सीएमएस को हड़काने का स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर अगर जरा भी असर हुआ होता तो शायद यहां बच्चा वार्ड में भर्ती खुशी की रविवार को बेवजह मौत न होती। लापरवाही की हद यह रही कि 12 वर्षीय खुशी की मौत किसी एक वजह से नहीं हुई। पहले तो लैब से उसकी गलत ब्लड रिपोर्ट जारी की गई, अगले दिन दोबारा जांच के बाद सही रिपोर्ट मिली और यह पता लगा कि बच्ची को खून चढ़ाया जाना है तो शनिवार को पिता ने ब्लड डोनेट किया, लेकिन ब्लड बैंक से रविवार को खून मिला। इसके बाद खुशी को खून चढ़ाना शुरू किया गया लेकिन तब तक इतनी देर हो चुकी थी कि उसने दम तोड़ दिया।
विज्ञापन

खुशी को जिला अस्पताल लाने की उसके मां-बाप की ‘गलती’ ने ही उसकी जान ले ली। करगैना में रहने वाले जगन्नाथ अपनी बेटी खुशी को पेट दर्द की शिकायत पर 30 अगस्त को जिला अस्पताल लाए थे। उन्होंने उसे इमरजेंसी में दिखाया तो डॉक्टर ने उसे डायरिया बताकर बच्चा वार्ड में भर्ती करा दिया। दो दिन इलाज के बाद भी खुशी को कोई राहत नहीं मिली तो उसके खून का जांच कराने को कहा गया। जगन्नाथ के मुताबिक जिला अस्पताल की लैब ने खुशी के ब्लड की जो रिपोर्ट दी, उसके मुताबिक उसका हीमोग्लोबिन लेवल सात था, लेकिन दोबारा जांच कराई गई तो हीमोग्लोबिन लेवल सिर्फ चार निकला। अस्पताल की लैब से गलत रिपोर्ट मिलने के कारण एक दिन बर्बाद हो गया। डॉक्टर ने इसके बाद शनिवार को खुशी को फौरन खून चढ़ाने को कहा तो जगन्नाथ ने तुरंत ब्लड बैंक जाकर अपना ब्लड डोनेट किया, लेकिन ब्लड बैंक से उन्हें खुशी के ग्रुप का ब्लड नहीं दिया गया। ब्लड बैंक से रविवार को खून मिला लेकिन जब तक खून खुशी को चढ़ाया जाता, उसने दम तोड़ दिया। 
विज्ञापन


बच्ची के परिवार वालों के आरोप पूरी तरह गलत हैं। अस्पताल में कोई लापरवाही नहीं हुई है। बच्ची की मौत मल्टी ऑर्गन फेल्योर की वजह से बच्ची की मौत हुई है। - डॉ. केएस गुप्ता, सीएमएस जिला अस्पताल 
विज्ञापन
विज्ञापन


खुशी को डायरिया हुआ था। उसे भर्ती करने के बाद उसका ब्लड टेस्ट कराया गया। पहली रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन लेवल सात बताया गया था। शंका हुई तो दोबारा जांच कराई तो पता चला कि उसका हीमोग्लोबिन लेवल सिर्फ चार है। तब उसे ऑक्सीजन लगवाकर खून चढ़वाने को कहा गया था। - डॉ. आरके सागर


बच्चा वार्ड में दो घंटे तक हुआ हंगामा

खुशी की मौत के बाद उसके परिवार वाले आपा खो बैठे। उन्होंने बच्चा वार्ड में करीब दो घंटे तक जमकर हंगामा किया। डॉक्टरों और अस्पताल के स्टाफ पर खुशी के इलाज में लापरवाही के आरोप लगा रहीं उसकी मां इतनी ज्यादा गुस्से में आ गईं कि रोते-बिलखते हुए ही बोतल लेकर एक नर्स को मारने दौड़ पड़ीं। जैसे-तैसे दूसरे लोगों ने उन्हें रोका। खुशी के घरवालों का गुस्सा इसलिए और ज्यादा भड़का क्योंकि उसके निश्चेत होने के बाद वार्ड में आने में ही डॉक्टर ने करीब पौन घंटा लगा दिया, तब कहीं उसे मृत घोषित किया जा सका। वार्ड में हंगामे के दौरान अस्पताल का कोई अधिकारी भी वहां नहीं पहुंचा। खुशी के पिता ने आरोप लगाया कि अगर उनकी बेटी को खून चढ़ाने में देरी न हुई होती तो उसकी मौत न होती।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed