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नगर निगम में उत्तराखंड के दर्जा राज्य मंत्री का बहिष्कार
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Thu, 28 Jul 2016 01:31 AM IST
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नगर निगम में अफसरों और कर्मचारियों के साथ सफाई कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर मीटिंग लेने आए उत्तराखंड सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष (दर्जा राज्य मंत्री) संतोष गौरव का अघोषित बहिष्कार कर दिया गया। नगर निगम के अफसरों ने इस तरह की बैठक को अनाधिकृत और नियम विरुद्ध बताया और भाग नहीं लिया। उपाध्यक्ष बिना मीटिंग के ही सफाई कर्मचारी नेताओं से मिलकर वापस चले गए। संतोष गौरव ने इसे अपने प्रोटोकाल का उल्लंघन बताया और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से शिकायत करने की बात कही। उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी पत्र लिखेंगे।
संतोष गौरव के बहेड़ी, नवाबगंज और बरेली में नगरपालिका और नगर निगम के अफसरों की मीटिंग लेने संबंधी वीआईवी आदेश सिटी मजिस्ट्रेट उमेश कुमार मंगला ने जारी किया था। अपराह्न तीन बजे वह नगर निगम पहुंचे। बैठक नगर निगम सभागार में होनी थी। कर्मचारी नेता तो पहुंच गए मगर अपर नगर आयुक्त ईश शक्ति कुमार सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार, चीफ इंजीनियर सतीश कुमार, पर्यावरण अभियंता उत्तम कुमार और प्रभारी एक्सईएन गयूर अहमद मीटिंग में नहीं पहुंचे। इस कारण मीटिंग नहीं हो सकी। इसके बाद उपाध्यक्ष सफाई कर्मचारी यूनियन के नेता राजकुमार समदर्शी समेत कुछ अन्य सफाई कर्मियों से मिलकर लौट गए। इसस पहले सफाई कर्मचारी नेता सतीश ऋषिवाल ने शहर की वाल्मीकि बस्ती का भ्रमण भी कराया।
बैठक न होने से नाराज उपाध्यक्ष संतोष गौरव ने कहा कि अफसरों को मीटिंग में आना चाहिए था। उनके रवैये की जितनी भी निंदा की जाए, वह कम है। प्रोटोकाल का उल्लंघन किया गया है। उन्होंने बताया कि वह सफाई कर्मचारियों की स्थिति को लेकर विभिन्न राज्यों के नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में जा रहे हैं। यूपी सरकार को संविदा के बजाय सफाई कर्मचारियों की नियमित भर्ती करनी चाहिए। जो संविदा पर काम कर रहे हैं, उनका भी नियमितीकरण होना चाहिए। इसके लिए वह 30 अगस्त को दिल्ली के जंतर मंतर पर सफाई कर्मचारियों की महापंचायत बुला रहे हैं।
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कोट
उत्तराखंड सरकार के दर्जा मंत्री का यूपी के नगर निगम में मीटिंग लेने का औचित्य मेरी समझ में नहीं आया। वह प्रदेश के राज्य अतिथि हो सकते हैं लेकिन मीटिंग कैसे ले सकते हैं। सिटी मजिस्ट्रेट को भी ऐसा सर्कुलर जारी करने से पहले सोचना चाहिए था।
-ईश शक्ति कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त
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संतोष गौरव के बहेड़ी, नवाबगंज और बरेली में नगरपालिका और नगर निगम के अफसरों की मीटिंग लेने संबंधी वीआईवी आदेश सिटी मजिस्ट्रेट उमेश कुमार मंगला ने जारी किया था। अपराह्न तीन बजे वह नगर निगम पहुंचे। बैठक नगर निगम सभागार में होनी थी। कर्मचारी नेता तो पहुंच गए मगर अपर नगर आयुक्त ईश शक्ति कुमार सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार, चीफ इंजीनियर सतीश कुमार, पर्यावरण अभियंता उत्तम कुमार और प्रभारी एक्सईएन गयूर अहमद मीटिंग में नहीं पहुंचे। इस कारण मीटिंग नहीं हो सकी। इसके बाद उपाध्यक्ष सफाई कर्मचारी यूनियन के नेता राजकुमार समदर्शी समेत कुछ अन्य सफाई कर्मियों से मिलकर लौट गए। इसस पहले सफाई कर्मचारी नेता सतीश ऋषिवाल ने शहर की वाल्मीकि बस्ती का भ्रमण भी कराया।
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बैठक न होने से नाराज उपाध्यक्ष संतोष गौरव ने कहा कि अफसरों को मीटिंग में आना चाहिए था। उनके रवैये की जितनी भी निंदा की जाए, वह कम है। प्रोटोकाल का उल्लंघन किया गया है। उन्होंने बताया कि वह सफाई कर्मचारियों की स्थिति को लेकर विभिन्न राज्यों के नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में जा रहे हैं। यूपी सरकार को संविदा के बजाय सफाई कर्मचारियों की नियमित भर्ती करनी चाहिए। जो संविदा पर काम कर रहे हैं, उनका भी नियमितीकरण होना चाहिए। इसके लिए वह 30 अगस्त को दिल्ली के जंतर मंतर पर सफाई कर्मचारियों की महापंचायत बुला रहे हैं।
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उत्तराखंड सरकार के दर्जा मंत्री का यूपी के नगर निगम में मीटिंग लेने का औचित्य मेरी समझ में नहीं आया। वह प्रदेश के राज्य अतिथि हो सकते हैं लेकिन मीटिंग कैसे ले सकते हैं। सिटी मजिस्ट्रेट को भी ऐसा सर्कुलर जारी करने से पहले सोचना चाहिए था।
-ईश शक्ति कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त