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Bareilly News: हाईटेंशन लाइन के नीचे लगा मेहंदी मेला, लोगों पर मंडराया खतरा, अफसर बेखबर

Sun, 28 Jun 2026 12:19 PM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: Mukesh Kumar Updated Sun, 28 Jun 2026 12:19 PM IST
सार

शाही कस्बे में हर साल मुहर्रम के तीसरे दिन मेहंदी मेला लगता है। मेले में लाखों की संख्या में लोग जुटते हैं। हैरानी की बात यह है कि मेले का मुख्य स्थान हाईटेंशन लाइन के ठीक नीचे है। इससे मेले के दौरान खतरा बना रहता है। 

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Mehndi Mela held under high tension line danger looms over people in Bareilly
हाईटेंशन लाइन के नीचे सजाया गया मेला - फोटो : संवाद

विस्तार

बरेली के शाही कस्बे में मुहर्रम के तीसरे दिन ऐतिहासिक मेहंदी मेला इस बार भी 11000 वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइन के नीचे आयोजित हो रहा है। भारी भीड़ जुटने की संभावना के बावजूद प्रशासन और बिजली निगम ने सुरक्षा को लेकर कोई कदम नहीं उठाया है। इससे महिला और बच्चों सहित मेले में आने वाले लोगों की जान को गंभीर खतरा है।

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यह मेला शाही कस्बे में दशकों पुरानी परंपरा का हिस्सा है, जहां दूरदराज से लाखों लोग आते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मेले में लाए जाने वाले ताजिया, अलम या बांस के हाईटेंशन तार से छूने पर बड़ा हादसा हो सकता है। हर साल लाखों की भीड़ जुटती है, फिर भी न तो लाइन हटाई गई और न ही मेले के दिन बिजली बंद की जाती है। लोगों ने कई बार उपजिलाधिकारी, बिजली निगम और पुलिस को सूचित किया है, लेकिन हर बार उनकी बात को टाल दिया गया। 
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उपजिलाधिकारी मीरगंज निधि शुक्ला ने बताया कि मेले की अनुमति पुरानी परंपरा के अनुसार दी गई है, लेकिन झूले लगाने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि बिजली निगम, पीडब्ल्यूडी और फायर ब्रिगेड के अनापत्ति प्रमाण पत्र के बिना झूले लगाने पर आयोजकों और झूला संचालकों पर कार्रवाई की जाएगी।

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सुरक्षा इंतजामों की कमी
मेले में भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिसकर्मी तैनात किए जाते हैं। हालांकि, हाईटेंशन लाइन से जुड़े सबसे बड़े खतरे के लिए कोई योजना नहीं है। न तो बैरिकेडिंग की गई है, न कोई घोषणा और न ही लाइन के नीचे प्रवेश पर प्रतिबंध है। अस्थायी दुकानों पर अग्निशमन के भी पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।

दुकानदारों से होती है वसूली 
बताया जाता है कि मेले में सैकड़ों दुकानों से स्थानीय स्तर पर बनी एक समिति लाखों रुपये की पल्लेदारी वसूलती है। इस वसूली गई धनराशि का कोई भी हिस्सा सरकार के खाते में जमा नहीं होता है। दुकानें लगने वाली अधिकांश जगहें पीडब्ल्यूडी, नगर पंचायत और गांधी इंटर कॉलेज के स्वामित्व में हैं। इसके बावजूद, सरकारी विभागों को इस आय का कोई लाभ नहीं मिलता।

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