यूपी: आंवला में वीरपाल, बिथरी में कीर्ति! इस मुलाकात से बरेली-बदायूं में बदलेंगे सियासी समीकरण
भाजपा से इस्तीफा देने के बाद पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की। इस दौरान उनकी बेटी कीर्ति और सपा के स्थानीय नेता भी मौजूद रहे। इस मुलाकात से बरेली और बदायूं जिले में नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा तेज हुई है।
विस्तार
भाजपा से इस्तीफा देने के बाद पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप की सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात के बीच बरेली की तीन विधानसभा सीटों को लेकर नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आंवला से वीरपाल सिंह यादव और बिथरी चैनपुर से धर्मेंद्र कश्यप की बेटी कीर्ति कश्यप की दावेदारी पर सहमति बन सकती है। बदायूं की दातागंज सीट को लेकर भी बातचीत का दावा किया जा रहा है। हालांकि, सपा से आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
राजनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं के मुताबिक, सपा नेतृत्व के साथ धर्मेंद्र कश्यप की मुलाकात के दौरान आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर संभावित तालमेल पर बातचीत हुई है। आंवला विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाए जाने को वीरपाल सिंह यादव की संभावित उम्मीदवारी से जोड़कर देखा जा रहा है। इसी तरह बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से कीर्ति कश्यप के चुनाव लड़ने की संभावना भी चर्चा में है।
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प्रभारी की जिम्मेदारी या टिकट का संकेत
सपा में विधानसभा प्रभारी की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक चर्चाएं पहले भी होती रही हैं। पार्टी संगठन में प्रभारी की जिम्मेदारी चुनावी तैयारी और क्षेत्र में संगठन को सक्रिय करने से जुड़ी हो सकती है। लेकिन किसी नेता को प्रभारी बनाए जाने भर से टिकट तय होना साबित नहीं होता। ऐसे में आंवला को लेकर किए जा रहे दावों की पुष्टि आधिकारिक पत्र और पार्टी नेतृत्व के रुख से ही हो सकेगी।
बिथरी से दातागंज तक संभावित तालमेल की चर्चा
चर्चा है कि वीरपाल सिंह यादव और धर्मेंद्र कश्यप के बीच सीटों को लेकर तालमेल की संभावना पर चर्चा हुई। इसमें बिथरी चैनपुर और दातागंज का जिक्र किया गया है। हालांकि, दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए राजनीतिक समझौते के बजाय संभावित समीकरण के रूप में ही देखा जा रहा है।
तीन सीटों पर क्यों टिकी निगाहें
आंवला, बिथरी चैनपुर और दातागंज की चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये तीनों क्षेत्र बरेली और आसपास के राजनीतिक परिदृश्य से जुड़े हैं। धर्मेंद्र कश्यप की भाजपा से दूरी और अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद उनके परिवार की संभावित राजनीतिक भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि कीर्ति कश्यप की उम्मीदवारी पर सहमति बनती है, तो बिथरी चैनपुर में सपा की रणनीति में नए चेहरे की भूमिका हो सकती है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, चुनाव से पहले नेताओं की मुलाकातों, संगठनात्मक जिम्मेदारियों और संभावित उम्मीदवारों के नामों को जोड़कर समीकरण तलाशे जाते हैं। लेकिन किसी सीट पर दावेदारी, संगठन की जिम्मेदारी और पार्टी का आधिकारिक टिकट तीन अलग-अलग बातें हैं। फिलहाल धर्मेंद्र कश्यप की सपा नेतृत्व से मुलाकात ने इन चर्चाओं को जरूर तेज किया है। अब नजर इस बात पर है कि सपा नेतृत्व इन संभावित नामों पर क्या रुख अपनाता है और क्या आने वाले दिनों में कोई औपचारिक घोषणा होती है।