फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   medical

जांच के नाम पर खानापूर्ति, अस्पतालों को चेतावनी देकर निपटाए मामले

Thu, 03 Oct 2019 02:34 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 03 Oct 2019 02:34 AM IST
विज्ञापन
medical
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

बरेली। गरीबों को पांच लाख तक का मुफ्त इलाज देने को शुरू हुई आयुष्मान भारत योजना निजी अस्पतालों की मनमानी के आगे दम तोड़ रही है। दीवानखाना के रहने वाले मतलूब हुसैन की मौत के मामले में भी चारों निजी अस्पतालों को सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है। इसकी रिपोर्ट भी आयुष्मान योजना की एजेंसी को भेज दी गई है। परिवार के लोग न्याय के लिए अधिकारियों के चक्कर काटते रहे, लेकिन उनका दर्द किसी ने नहीं समझा।
हृदय की बीमारी से पीड़ित दीवानखाना के रहने वाले मतलूब हुसैन (59 साल) को परिजन शहर के चार बड़े अस्पतालों में लेकर गए थे। उनके पास आयुष्मान कार्ड था, बावजूद इसके उनको इलाज नहीं मिला, नतीजतन बिना इलाज के मतलूब हुसैन की मौत हो गई। जिला प्रभारी मंत्री से शिकायत के बाद सीएमओ ने मामले की जांच शुरू कराई। समिति ने परिवार के लोगों के बयान लिए और बाद में अस्पतालों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। अस्पतालों ने खुद को निर्दोेष बताते हुए अपने जवाब दिए, जिसे जांच समिति ने परिवार के दर्द को दरकिनार करते हुए मान लिया। समिति की रिपोर्ट आयुष्मान योजना की एजेंसी को भेज दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि अस्पतालों पर दोष सिद्ध नहीं होता, इसलिए कोई कार्रवाई नहीं हो सकती। कार्रवाई के नाम पर चारों अस्पतालों को सिर्फ चेतावनी दी गई है। कहा कि आयुष्मान कार्ड धारकों को समुचित इलाज उपलब्ध कराया जाए, जबकि दूसरी तरफ परिवार के लोग चीख चीख के कह रहे हैं कि अस्पतालों को बचा लिया गया।
विज्ञापन


दोनों पक्षों के बयान लिए गए हैं। अस्पतालों पर दोष सिद्ध नहीं होता। चारों अस्पतालों को चेतावनी जारी करते हुए आयुष्मान योजना की एजेंसी की रिपोर्ट भेज दी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

- डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ

बीमारी से मौत हुई कोई मर्डर नहीं किया...
मतलूब हुसैन की मौत में जितनी लापरवाही अस्पतालों ने दिखाई उसी तरह से गैरजिम्मेदाराना बात अधिकारी कर रहे हैं। मृतक की बेटी नाजिया ने सीएमओ से कार्रवाई के बाबत पूछा तो उनका जवाब बहुत हैरान करने वाला था। उनका कहना था कि बीमारी से मौत हुई, कोई मर्डर तो नहीं किया गया। अस्पतालों पर दोष साबित नहीं होता इसलिए कोई कार्रवाई नहीं बनती। हालांकि अस्पतालों को चेतावनी देने की बात उन्होंने कही। नाजिया का कहना था कि अगर अस्पताल इलाज करते तो उसके पिता जीवित होते। उसकी मां का सहारा छिन गया। वहीं मृतक की बहन मालदा ने जब आयुष्यान योजना के कोआर्डिनेटर से बात की तो उनका भी गोलमोल जवाब था। परिवार के लोगों का कहना है कि उनको न्याय नहीं मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed