बदायूं गंगा हादसा: MBBS छात्र नवीन का शव देख बिलखे पिता, कहा- अब कौन रखेगा मेरा ख्याल, किसे कहूंगा डॉक्टर
उझानी के कछला घाट पर शनिवार को गंगा में डूबे एमबीबीएस के तीनों छात्रों के शव रविवार को बरामद कर लिए गए। हाथरस निवासी छात्र नवीन सेंगर के पिता बेटे का शव देखकर बिलख पड़े। बोले- अब मैं किसे डॉक्टर कहूंगा।
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बदायूं के उझानी इलाके में गंगा में साथियों समेत डूबे हाथरस निवासी एमबीबीएस के छात्र नवीन सेंगर का शव लेकर एसडीआरएफ के जवान घाट पर आए तो पिता गंधर्व सिंह बदहवास हो गए। आंखों से बहते आंसू और रुंधे गले से उनके मुंह से निकले शब्द सुनकर रिश्तेदारों की आंखें भी छलक उठीं। यह कहते हुए वह बेसुध हो गए कि बेटा नवीन, अब मेरा ख्याल कौन रखेगा। कुछ तो बता, अब मैं किसे डॉक्टर कहकर पुकारूंगा।
हाथरस की टीचर्स कॉलोनी में रहने वाले सिंचाई विभाग से सेवानिवृत गंधर्व सिंह की चार संतानों में मनु और तनु दो बेटियां तो देवेंद्र के बाद नवीन छोटा था। नवीन के अलावा तीनों की शादियां हो चुकी हैं। सभी भाई-बहनों में परिवार को सबसे ज्यादा उम्मीद नवीन से थी। जब उन्हें नवीन के गंगा में बहने की जानकारी मिली तो मानो उनके ऊपर पहाड़ सा टूट पड़ा। बदहवास परिवार शनिवार देर शाम ही घाट पर पहुंचा गया था। उम्मीद भरी निगाहों से घाट की तरफ टकटकी लगाए देख रहा था।
एसडीआरएफ ने रविवार को जय मौर्य और पवन के शव तो पहले ही खोज निकाले थे लेकिन बाद में जैसे ही घाट पर नवीन का शव लाया गया तो भाई देवेंद्र के साथ पिता गंधर्व सिंह बिलखने लगे। नवीन अपने पिता का सबसे ज्यादा ख्याल रखता था। रोते-बिलखते पिता ने इसे बयां भी कर दिया। मां सुधा ने तो यहां तक कह दिया, अब मैं किस उम्मीद के सहारे गंगा स्नान करने आऊंगी। नवीन की बहनें और भांजियां भी शव बरामद होने तक घाट पर ही रहीं।
घाट पर सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
बलिया जिले के पकरी थाना क्षेत्र के गांव दोगरा में रहने वाले पवन यादव का शव निकाले जाने पर परिजनों ने गंगाघाट पर सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। हालांकि पिता जयप्रकाश यादव और भाई तनय प्रकाश तो शव देखते ही बदहवास हो गए। उनके साथ आए रिश्तेदार प्रिंस यादव ने अफसरों से कहा कि चूक तो मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से लेकर गंगाघाट पर व्यवस्था को लेकर भी सामने आ रही है।
पहले तो कॉलेज प्रशासन ही छात्रों को बाहर जाने की इजाजत नहीं देता। वह, स्नान करने के लिए गंगाघाट पर पहुंच भी गए तो गहराई वाले स्थानों पर उन्हें रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं दिखा है। कोई, अगर टोक भी देता किस जहां वे नहाने जा रहे हैं वहां गहराई ज्यादा है तो वे उस तरफ नहीं जाते। साथ ही घाट पर ही सुरक्षा और बचाव के इंतजाम होते तो तीनों की जान भी नहीं जाती।
यहां सब ठीक है.. झूठ बोलकर बीमार पिता दी सांत्वना
जौनपुर के सराय ख्वाजा थाना क्षेत्र के गांव परसनी में रहने वाले जय मौर्य के गंगा में डूबने की खबर मिलने पर जय के चाचा दीपचंद्र मौर्य कछला पहुंचे थे। एसडीआरएफ की टीम जय का शव गंगा से निकाल कर ला रही थी तभी उनके मोबाइल की घंटी बज उठी। कॉल रिसीव की तो दूसरे तरफ जय के पिता महेंद्र कुमार मौर्य बोल रहे थे। जब उन्होंने जय के बारे में पूछा तो दीपचंद्र ने दिलासा देते हुए कहा कि यहां सब ठीक है, आप घर पर ही रहें। जय का इलाज चल रहा है और वह जल्द ठीक हो जाएगा।
दरअसल जय के पिता हृदय रोग से पीड़ित है। दीपचंद्र के साथ जय का बड़ा भाई नवीन भी आया था। भाई का शव देखते ही नवीन बिखलने लगे। उन्होंने कह कि उनके भाई की मौत के लिए कॉलेज प्रशासन भी कम जिम्मेदार नहीं है। कॉलेज वाले उसे बाहर नहीं जाने देते तो आज उनके परिवार को यह मनहूस दिन देखना नहीं पड़ता। नवीन की पिछले दिनों ही जय से फोन पर बात हुई थी। नवीन से जय ने कहा था कि होली पर घर आएगा मगर कुदरत को कुछ और ही मंजूर था।