फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Mayor slams former mayor over rajau paraspur land

रजऊ परसपुर में प्लांट नहीं प्लॉट बेचने की थी डॉक्टर तोमर की तैयारी.. अब हमारी बारी

Thu, 17 May 2018 07:03 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Thu, 17 May 2018 07:03 PM IST
विज्ञापन
Mayor slams former mayor over rajau paraspur land
Umesh Gautam
मेयर उमेश गौतम ने पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर पर एक बार हमला बोला है। वर्ष 2002 में डॉ. तोमर के मेयर रहते बोर्ड बैठक में रजऊ परसपुर स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की जमीन को छोटे-छोटे प्लॉट काटकर बेचने का प्रस्ताव पास हुआ था। मेयर उमेश गौतम ने इस प्रस्ताव की कॉपी सार्वजनिक कर दी है। साथ ही नगर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव को प्लॉट काटकर जमीन बेचने के इस प्रस्ताव पर तत्काल क्रियान्वयन करने के आदेश जारी किए हैं।
विज्ञापन

रजऊ परसपुर स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को लेकर इन्वर्टिस विश्वविद्यालय और नगर निगम में लंबे समय से लड़ाई चल रही है। पिछले दिनों बोर्ड की बैठक में बंद पड़े प्लांट के पोस्ट क्लोजर का प्रस्ताव पास हुआ तो यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आया। मेयर उमेश गौतम ने कहा कि प्लांट की जगह पर बहुमंजिला इमारत आदि बनाई जाएगी। साथ ही यह भी कहा कि यह प्रस्ताव पूर्व में नगर निगम बोर्ड की बैठक में पास हो चुका है। बुधवार को गौतम ने यह प्रस्ताव सार्वजनिक कर पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर पर एक बार फिर हमला बोला। कहा, डॉ. तोमर की मंशा ठीक नहीं थी, डॉ. तोमर ने वर्ष 2002 में रजऊ की जमीन पर प्लाटिंग का प्रस्ताव पास होने के बावजूद वहां सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगवा दिया। वह चाहते थे कि वहां बीमारियां फैलें, लोग परेशान हों। इसके पीछे पता नहीं वह किस तरह का लाभ चाहते थे? जनता को लगातार सॉलिड वेस्ट प्लांट के नाम पर गुमराह कर मुझ पर उसे न चलने देने के आरोप लगाते रहे। अब वह बताएं कि जनता को धोखे में क्यों रखा गया? इसकी वजह से ही नगर निगम और सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। इसके चलते ही ऑडिट में भी आपत्ति उठाई गई है।
विज्ञापन


2002 में काटने थे प्लॉट तो 2005 में प्लांट क्यों लगाया
26 जून 2002 को हुई बैठक में तत्कालीन पार्षद जितेंद्र सक्सेना के रजऊ परसपुर भूमि का विक्रय करने के संबंध में जानकारी मांगने पर नगर आयुक्त ने जानकारी दी थी। पार्षद ने पूछा कि जमीन कहां खरीदनी है तो कहा गया कि भुता और रामपुर रोड पर जमीन चयनित कर ली है। इस पर जितेंद्र ने रजऊ की जमीन बेचने को लेकर हानि-लाभ देखने की बात कही। बताया, कूड़ा डालने के लिए भुता रोड पर 300 बीघा और रामपुर रोड पर 600 बीघा जमीन देखी गई है। पार्षद चंद्रमौलि ने इस पर आपत्ति की कि जमीन शहर से बाहर है, बिना सॉलिड वेस्ट प्लांट के कूड़े की समस्या नहीं निपटेगी। रजऊ की जमीन नेशनल हाईवे पर है, अगर सही तरीके से प्लाटिंग करके बेचें तो निगम को अच्छा धन मिल सकता है। सतीश कातिब ने भी उनकी बात का समर्थन किया। विकास शर्मा ने कहा कि ट्रंचिंग ग्राउंड बेचकर अच्छे-अच्छे विकास कार्य कराए जाएं। इसके बाद सर्व सम्मति से प्रस्ताव पास हो गया। मेयर का कहना है जब यह प्रस्ताव पास हो गया था तो 2005 में वहां प्लांट क्यों लगाया गया?
विज्ञापन
विज्ञापन


जनता को गुमराह करते रहे डॉ. तोमर
डॉ. तोमर ने वर्ष 2002 में रजऊ की जमीन पर प्लाटिंग का प्रस्ताव पास होने के बावजूद उन्होंने वहां पर सॉलिड वेस्ट प्लांट लगवा दिया। वह चाहते थे कि वहां बीमारियां फैलें, लोग परेशान हों। इसके पीछे पता नहीं वह किस तरह का लाभ चाहते थे? जनता को लगातार सॉलिड वेस्ट प्लांट के नाम पर गुमराह कर मुझ पर उसे न चलने देने के आरोप लगाते रहे। अब वह बताएं कि जनता को धोखे में क्यों रखा गया? - उमेश गौतम, मेयर


बेवकूफी की बात न करें.. निगम-पट्टे की जमीन पर बना है ‘इन्वर्टिस’

मेयर द्वारा बोर्ड बैठक का प्रस्ताव सार्वजनिक करने के बाद डॉ. तोमर ने भी पलटवार किया है। उन्होंने इन्वर्टिस में निगम की जमीन दबी होने और पट्टे की जमीन खरीदने के आरोप लगाए हैं। बोले- पिछले दस साल से चीखते आ रहे हैं कि डॉ. तोमर ने प्लांट लगवाया, मेरा इसमें क्या फायदा? यह तो सरासर बेवकूफी की बात है।

सॉलिड वेस्ट की जमीन पर प्लाटिंग का प्रस्ताव स्वीकृत होने की बात स्वीकारते हुए डॉ. आईएस तोमर ने कहा कि यह बात सही है कि 2002 के बोर्ड में यह प्रस्ताव पास हुआ लेकिन उसमें अधिकारियों की गलती थी। अधिकारियों को बताना चाहिए था कि जमीन किस उद्देश्य के लिए अधिग्रहीत की गई है। यह जमीन 1977 में राज्यपाल के आदेश पर डंपिंग ग्राउंड के लिए अधिग्रहीत हुई थी इसलिए यहां प्लाटिंग या कोई अन्य गतिविधि हो ही नहीं सकती। अगर ऐसा हुआ तो जमीन जिनसे अधिग्रहीत की गई है, उन्हें वापस चली जाएगी। उमेश गौतम पिछले दस साल से चीखते आ रहे हैं कि प्लांट डॉ. तोमर ने लगवाया, यह सरासर बेवकूफी की बात है। 2004 में प्लांट स्वीकृत हुआ और 2005 में मेरा कार्यकाल खत्म होने के बाद जल निगम को इसे बनाने की जिम्मेदारी मिली। देश में दस एयरफील्ड स्वीकृत हुए थे, उनमें से एक यह भी था। हुडको के निरीक्षण के बाद बजट आया और काम शुरू हुआ। मेरा इस प्लांट से जीरो परसेंट भी फायदा नहीं था। मगर इन्वर्टिस शुरू से ही प्लांट के विरोध में था, क्योंकि उन्होंने प्लांट की 5900 वर्ग मीटर जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है। 2005 में जल निगम ने जमीन दबाने की शिकायत की तो उमेश गौतम हाईकोर्ट से स्टे ले आए कि इसे ध्वस्त न किया जाए। बाद में यह स्टे भी खत्म हो गया। नगर निगम जब चाहे इसे ध्वस्त कर सकता है। इसके अलावा इन्वर्टिस में पांच बीघा जमीन पट्टे की भी शामिल है। इसके निर्माण में भी खेल हुआ है। डीएम से चारदीवारी बनाने की अनुमति ली और भवन बनाकर खड़ा कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed