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UP Madrasa: हाईकोर्ट के फैसले के बाद सपा पर भड़के मौलाना शहाबुद्दीन, बताया मदरसों की दुर्दशा का जिम्मेदार

Sat, 23 Mar 2024 04:33 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 23 Mar 2024 04:33 PM IST
सार

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि 2004 में सपा की सरकार ने एक नया एक्ट बनाया, जिसका नाम मदरसा एजुकेशन एक्ट रखा गया। सपा सरकार की तरफ से सबसे बड़ी गलती मदरसा शब्द को लाकर हुई। सपा ने अगर ये गलती नहीं की होती तो ये दिन देखने नहीं पड़ते। 

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Maulana Shahabuddin Razvi says SP government is responsible for the plight of madrassas
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट के मदरसों से संबंधित फैसले पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि ये फैसला बड़ा मायूसी भरा है। मदरसों में अल्पसंख्यक समुदाय के लाखों बच्चे शिक्षा हासिल कर रहे हैं। अब उनका भविष्य अंधकार में चला जाएगा। इस फैसले के बाद जो सूरत-ए-हाल बन रहा है उससे जाहिर होता है कि मदरसों का वजूद खतरे में पड़ गया है। बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने यूपी बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट 2004 को असांविधानिक करार दिया है। मौलाना ने मदरसों की दुर्दशा के लिए साफतौर पर सपा को जिम्मेदार ठहराया। 

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मौलाना ने कहा कि आजादी से पहले 1933 से 1944 तक के दरम्यान एक भाषाई नीति बनाई गई। इसका मकसद था कि अरबी, फारसी, और संस्कृत आदि भाषाओं को तरक्की देकर आगे बढ़ाया जाए। इन भाषाओं को पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को रोजगार से जोड़ा जाएं। 2003 तक ये व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रही। अरबी व फारसी भाषा को बढ़ावा देने के लिए अरबी, फारसी बोर्ड के नाम से व्यवस्था कायम रही। 

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मौलाना ने सपा पर साधा निशाना 
दूसरी तरफ संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए संस्कृत बोर्ड भी काम करता रहा। 2004 में समाजवादी पार्टी की सरकार ने एक नया एक्ट बनाया, जिसका नाम मदरसा एजुकेशन एक्ट रखा गया। सपा सरकार की तरफ से सबसे पड़ी गलती मदरसा शब्द को लाकर हुई। मदरसे का शब्द आते ही धार्मिक शिक्षा का नाम जुड़ जाता है चूंकि हमारा देश का ढांचा लोकतांत्रिक है। किसी भी धर्म को बढ़ावा देने का भारतीय संविधान में कोई भी प्रिंसिपल वसूल नहीं है, इसलिए जहां भी धार्मिक शिक्षा का नाम आएगा तो वहां पर हुकूमत की संस्थाएं जरूर सवाल खड़ी करेगी, बिल्कुल इसी तरह यहां पर भी मदरसों के बारे में सवाल खड़ा हुआ।

मौलाना ने कहा कि अब मदरसों पर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इनको चलाना और बाकी रखना बहुत बड़ा मुद्दा बन गया है। उन्होंने कहा कि मदरसों की दुर्दशा के लिए सपा की सरकार को जिम्मेदार मानता हूं। अगर सपा सरकार ने मदरसा एजुकेशन एक्ट नहीं बनाया होता और अरबी फारसी बोर्ड खत्म न किया होता तो आज ये दिन न देखने पड़ते। दूसरे नंबर पर मदरसों से वाबस्ता धार्मिक नेतृत्व भी जिम्मेदार है। महीनों चलने वाले कोर्ट की बहस में अपना वकील नहीं खड़ा किया। सही से पैरोकारी भी नहीं की गई। मदरसों की दुर्दशा में सिर्फ भाजपा सरकार को दोष नहीं दिया जा सकता। धार्मिक नेतृत्व को भी जिम्मेदारी लेनी होगी। 

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