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मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बोले: जुलूस-ए मोहम्मदी में तिरंगा झंडा भी लगाएं मुसलमान, डीजे और ढोल नगाड़े न बजाएं

Tue, 26 Sep 2023 04:56 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 26 Sep 2023 04:56 PM IST
सार

मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि शरीयत ने नाच-गाना, ढोल-तमाशा व डीजे आदि चीजों के इस्तेमाल को स्पष्ट तौर पर नाजायज करार दिया है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि जुलूस-ए-मोहम्मदी ने डीजे का इस्तेमान बिल्कुल न करें। 

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Maulana Shahabuddin Razvi appealed to the Muslims not to play DJ in procession
मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली में दरगाह आला हजरत स्थित ग्रांड मुफ्ती हाउस में मंगलवार को ऑल इंडिया मुस्लिम जमात की बैठक हुई। इसमें उलमाओं ने जुलूसों में डीजे और ढोल नगाड़े के इस्तेमाल पर चिंता जाहिर की। मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि शरीयल ने नाच-गाना, ढोल-तमाशा व डीजे आदि चीजों के इस्तेमाल को स्पष्ट तौर पर नाजायज करार दिया है। मगर बीते कुछ वर्षों से देखा जा रहा है कि इमाम हुसैन की निसबत से मोहर्रम के महीने में खूब डीजे का इस्तेमाल हो रहा है। 

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उन्होंने कहा कि उर्स के कार्यक्रमों में चादरों के जुलूस के नाम पर डीजे बजाया जा रहा है। हद यहां तक हो गई कि पैगंबर-ए-इस्लाम के नाम से मनसूब जुलूस-ए मोहम्मदी में भी धड़ल्ले से डीजे का इस्तेमाल होता है। उन्होंने कहा कि दीन के उत्थान और कौम के कल्याण के लिए जिन लोगों की जेब से पांच रुपये तक नहीं निकलते हैं, वही लोग धार्मिक कार्यक्रमों में 80 हजार से लेकर 1.5 लाख तक के रुपये से डीजे बुक कराते हैं। ऐसे लोग गैरों के सामने इस्लामी शरीयत का मजाक न बनवाएं।
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मौलाना ने कहा कि जुलूस-ए मोहम्मदी बहुत पाक और साफ जुलूस है। इसी दिन यानी 12 रबी अव्वल शरीफ को पैगंबर-ए-इस्लाम पैदा हुए थे। इसलिए इस दिन पूरी दुनिया के मुसलमान खुशी मनाते हैं। मगर इस दिन पाकीज़गी ( महत्वपूर्णता) का ख्याल नहीं रखते। 



तमाम मुसलमानों से अपील है कि जो झंडे अपने घरों में लगाते हैं, उसके साथ ही तिरंगा झंडा भी लगाएं। जुलूसों के दरम्यान लगने वाले नारों पर भी ध्यान रखें। बुजुर्गे द्वारा प्रचारित किए गए नारे ही लगाएं। उन्होंने पैगंबर-ए-इस्लाम ने पूरी दुनिया को मोहब्बत, अमन व शांति का पैगाम दिया है। जुलूस में शिरकत करने वाले लोग नमाज का एहतमाम करें। जुलूस में औरतें और छोटे बच्चे न आएं।

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