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डीएम ही सुनाएंगे कुतुबखाना मस्जिद का फैसला
बरेली
Updated Fri, 28 Aug 2015 01:35 AM IST
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बरेली। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, लखनऊ में कुतुबखाना मस्जिद को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान चेयरमैन जफरयाब जिलानी के सामने ही बरेलवी और देवबंदी आपस में भिड़े गए। इससे गुस्साए चेयरमैन ने यह कहकर दोनों मसलकों के लोगों को वापस लौटा दिया कि फैसला अभी सुरक्षित है। बोर्ड दोनों पक्षों से मिले साक्ष्यों के आधार पर डीएम को अपनी राय भेजेगा। डीएम ही मस्जिद के मामले में फैसला करके उस पर अमल कराएंगे।
26 मई से कुतुबखाना मस्जिद में कब्जे को लेकर विवाद होने के बाद से ताला पड़ा हुआ है। इस मसले का यहां हल न होने पर डीएम ने इसे सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पास भेज दिया। बृहस्पतिवार को वक्फ बोर्ड की चौथी तारीख पर सुनवाई हुई। बरेलवी पक्ष के आईएमसी नेता डॉ. नफीस अहमद और अंजुमन इस्लामियां के सचिव हुमायूं रियासत थे। जबकि देवबंदी पक्ष से अब्दुल सलाम, मुजाहिद हुसैन समेत आठ लोग थे। अब्दुल सलाम ने अंजुमन इस्लामिया के इमाम को बर्खास्त करने के फैसले को गैरकानूनी बताया। उनका कहना था बर्खास्त करने से पहले इमाम को नोटिस दिया जाना चाहिए था। इस पर डॉ. नफीस ने कहा कि मौलाना पर कुक र्म के आरोप में जेल चले गए थे। ऐसे में उन्हें नोटिस कहां दिया जाता। इसी बात को लेकर दोनों में कहासुनी होने लगी। दोनों ने आस्तीन खींच लीं। इस चेयरमैन ने फैसला सुरक्षित कर लिया और दोनों पक्षों के लोगों से कहा कि हम अपनी राय डीएम को भेज देंगे। डीएम ही मस्जिद का फैसला सुनाएंगे। एक सप्ताह में सबको पता लग जाएगा किसके हक में फैसला हुआ है। इस पर दोनों पक्षों के लोग देर शाम को बरेली लौट आए। डीएम गौरव दयाल का कहना है कि अभी तक उनके संज्ञान में कि सी तरह के फैसले की जानकारी नहीं मिली है। बोर्ड से जो फैसला आएगा, उस पर अमल कराया जाएगा।
28 जून से चल रही थी सुनवाई
-कुतुबखाना मस्जिद पर डीएम ने फैसला पलटने के बाद इस प्रकरण को सुुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, उत्तर प्रदेश को सौंप दिया था। 28 जून को पहली बार बोर्ड ने इस मामले में सुनवाई की। इसके बाद चार जुलाई को इस मामले में बोर्ड ने दोनों पक्षों को बुलाया था। तीसरी बार 18 जुलाई को मस्जिद प्रकरण में दोनों पक्ष लखनऊ स्थित बोर्ड के ऑफिस पहुंचे। बृहस्पतिवार को इस मामले में फाइनल सुनवाई हो गई।
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-मस्जिद हमारी है, अंजुमन इस्लामियां की मस्जिद की असली मालिक है। बोर्ड को भी इस बात का एहसास हो चुका है। इसलिए हमारे ही हक में फैसला भी होना है। मस्जिद में नमाज कब पढ़ाई जाएगी, अब यह देखना है-डॉ नफीस अहमद, बरेलवी पक्ष से
बोर्ड में तो लेनदेन का बड़ा खेल चल रहा है। फैसला बोर्ड को ही करना चाहिए था, डीएम के पास भेजना कहां का तुक है। हम नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद का फैसला अपने हक में चाहते हैं। नजराना कहां से दें, वक्फ बोर्ड की संपत्तियां कहीं महफूज नहीं है- अब्दुल सलाम, देवबंदी पक्ष से
-मस्जिद का फैसला हमारे हक में होना है। सुनवाई के दौरान मस्जिद को दो हिस्सों में बांटने की कोशिश की जा रही थी। कहा यह जा रहा था कि एक मसलक के लोग नीचे और दूसरे ऊपर का हिस्सा ले लें, लेकिन हमने यह बंटवारा मानने से इनकार कर दिया। हमारी मस्जिद है तो बंटवारा कैसा। इस संबंध में हमारी अधिकारियों से भी बात हुई है। जल्द ही हमारे हक में फैसला आएगा- मौलाना तसलीम मियां, नबीर-ए-आला हजरत
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26 मई से कुतुबखाना मस्जिद में कब्जे को लेकर विवाद होने के बाद से ताला पड़ा हुआ है। इस मसले का यहां हल न होने पर डीएम ने इसे सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पास भेज दिया। बृहस्पतिवार को वक्फ बोर्ड की चौथी तारीख पर सुनवाई हुई। बरेलवी पक्ष के आईएमसी नेता डॉ. नफीस अहमद और अंजुमन इस्लामियां के सचिव हुमायूं रियासत थे। जबकि देवबंदी पक्ष से अब्दुल सलाम, मुजाहिद हुसैन समेत आठ लोग थे। अब्दुल सलाम ने अंजुमन इस्लामिया के इमाम को बर्खास्त करने के फैसले को गैरकानूनी बताया। उनका कहना था बर्खास्त करने से पहले इमाम को नोटिस दिया जाना चाहिए था। इस पर डॉ. नफीस ने कहा कि मौलाना पर कुक र्म के आरोप में जेल चले गए थे। ऐसे में उन्हें नोटिस कहां दिया जाता। इसी बात को लेकर दोनों में कहासुनी होने लगी। दोनों ने आस्तीन खींच लीं। इस चेयरमैन ने फैसला सुरक्षित कर लिया और दोनों पक्षों के लोगों से कहा कि हम अपनी राय डीएम को भेज देंगे। डीएम ही मस्जिद का फैसला सुनाएंगे। एक सप्ताह में सबको पता लग जाएगा किसके हक में फैसला हुआ है। इस पर दोनों पक्षों के लोग देर शाम को बरेली लौट आए। डीएम गौरव दयाल का कहना है कि अभी तक उनके संज्ञान में कि सी तरह के फैसले की जानकारी नहीं मिली है। बोर्ड से जो फैसला आएगा, उस पर अमल कराया जाएगा।
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28 जून से चल रही थी सुनवाई
-कुतुबखाना मस्जिद पर डीएम ने फैसला पलटने के बाद इस प्रकरण को सुुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, उत्तर प्रदेश को सौंप दिया था। 28 जून को पहली बार बोर्ड ने इस मामले में सुनवाई की। इसके बाद चार जुलाई को इस मामले में बोर्ड ने दोनों पक्षों को बुलाया था। तीसरी बार 18 जुलाई को मस्जिद प्रकरण में दोनों पक्ष लखनऊ स्थित बोर्ड के ऑफिस पहुंचे। बृहस्पतिवार को इस मामले में फाइनल सुनवाई हो गई।
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-मस्जिद हमारी है, अंजुमन इस्लामियां की मस्जिद की असली मालिक है। बोर्ड को भी इस बात का एहसास हो चुका है। इसलिए हमारे ही हक में फैसला भी होना है। मस्जिद में नमाज कब पढ़ाई जाएगी, अब यह देखना है-डॉ नफीस अहमद, बरेलवी पक्ष से
बोर्ड में तो लेनदेन का बड़ा खेल चल रहा है। फैसला बोर्ड को ही करना चाहिए था, डीएम के पास भेजना कहां का तुक है। हम नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद का फैसला अपने हक में चाहते हैं। नजराना कहां से दें, वक्फ बोर्ड की संपत्तियां कहीं महफूज नहीं है- अब्दुल सलाम, देवबंदी पक्ष से
-मस्जिद का फैसला हमारे हक में होना है। सुनवाई के दौरान मस्जिद को दो हिस्सों में बांटने की कोशिश की जा रही थी। कहा यह जा रहा था कि एक मसलक के लोग नीचे और दूसरे ऊपर का हिस्सा ले लें, लेकिन हमने यह बंटवारा मानने से इनकार कर दिया। हमारी मस्जिद है तो बंटवारा कैसा। इस संबंध में हमारी अधिकारियों से भी बात हुई है। जल्द ही हमारे हक में फैसला आएगा- मौलाना तसलीम मियां, नबीर-ए-आला हजरत