{"_id":"5aaa89854f1c1b094a8b571b","slug":"married-couple-again-married-in-community-marriage-report","type":"story","status":"publish","title_hn":"सामूहिक विवाह में शादीशुदा जोड़ों के भी पड़ गए फेरे ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सामूहिक विवाह में शादीशुदा जोड़ों के भी पड़ गए फेरे
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Thu, 15 Mar 2018 08:26 PM IST
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Marriage
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मुख्यमंत्री सामूहिक बीमा योजना को अधिकारियों ने मजाक बना डाला। आंवला के रामनगर में शादीशुदा जोड़ों का इस कार्यक्रम में दोबारा विवाह करा दिया गया। यह मामला उजागर होने के बाद अधिकारियों में खलबली मच गई। इस मामले की जांच में योजना के सेक्टर प्रभारी बनाए गए एडीओ पंचायत करन सिंह को गलत रिपोर्ट लगाने के लिए जिम्मेदार पाया गया है। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए सीडीओ सत्येेंद्र कुमार ने एडीओ पंचायत को सस्पेंड करने की संस्तुति कर दी है। शासन ने निर्धन गरीब कन्याओं की शादी के लिए सामूहिक विवाह योजना शुरू की। इस आयोजन के लिए नोडल समाज कल्याण विभाग स्थानीय निकायों और ब्लॉकों को 1.66 करोड़ की रकम भी जारी कर चुका है। 24 फरवरी को कई जगहों के साथ आंवला के रामनगर में भी सामूहिक विवाह के कई जोड़ों की शादी कराई गई। इसमें आंवला विधायक और सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह भी बतौर चीफ गेस्ट भी शामिल हुए थे। बाद में यह खुलासा हुआ कि इस आयोजन में पांच जोड़ों केभी फेर पड़ गए, जो पहले से ही विवाहित थे। इससे इस आयोजन में जुटे अधिकारियों की तो किरकिरी हुई। साथ ही मंत्री जी भी खासे नाराज हुए थे। समाज कल्याण अधिकारी अशोक दीक्षित ने इस मामले की जांच कर रिपोर्ट सीडीओ को दी। इसमें सामूहिक विवाह में पांच शादीशुदा लोगों के दोबारा विवाह कराने की पुष्टि हुई है।
समाज कल्याण विभाग और निकाय अफसर एक दूसरे पर थोप रहे जिम्मेदारी
सामूहिक विवाह कार्यक्रम को लेकर नोडल समाज कल्याण विभाग भी कम जिम्मेदार नहीं है। विभाग ने आंख मूंदकर निकाय और ब्लॉकों को आयोजन की रकम जारी कर दी, लेकिन अब तक 476 की जगह केवल 56 गरीब कन्याओं के विवाह हो सके हैं। प्रत्येक विवाह के लिए 35 हजार रुपये खर्च किए जाने हैं। शादियां न होने पाने से योजना का भारी बजट भी खर्च होने को बाकी है। इसके लिए समाज कल्याण अधिकारी और निकाय के अफसर एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
दुल्हन के खाते में पहुंचनी थी 20 हजार की रकम
सामूहिक विवाह में फेरे लेने वाली दुल्हन के खाते में 20 हजार रुपये की रकम ट्रांसफर होनी थी, लेकिन जब गड़बड़ी का मामला खुला तो सीडीओ ने बैंकों को पहले से शादीशुदा मिली दुल्हन के खाते में धनराशि स्थानांतरित करने पर रोक लगा दी थी।
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यह बेहद गंभीर मामला है। जांच में रामनगर में पांच जोड़े पहले से शादीशुदा मिले हैं। इस मामले में एडीओ पंचायत पर निलंबन की कार्रवाई के लिए डीपीआरओ को संस्तुति कर दी गई है। -सत्येंद्र कुमार, सीडीओ
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समाज कल्याण विभाग और निकाय अफसर एक दूसरे पर थोप रहे जिम्मेदारी
सामूहिक विवाह कार्यक्रम को लेकर नोडल समाज कल्याण विभाग भी कम जिम्मेदार नहीं है। विभाग ने आंख मूंदकर निकाय और ब्लॉकों को आयोजन की रकम जारी कर दी, लेकिन अब तक 476 की जगह केवल 56 गरीब कन्याओं के विवाह हो सके हैं। प्रत्येक विवाह के लिए 35 हजार रुपये खर्च किए जाने हैं। शादियां न होने पाने से योजना का भारी बजट भी खर्च होने को बाकी है। इसके लिए समाज कल्याण अधिकारी और निकाय के अफसर एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
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दुल्हन के खाते में पहुंचनी थी 20 हजार की रकम
सामूहिक विवाह में फेरे लेने वाली दुल्हन के खाते में 20 हजार रुपये की रकम ट्रांसफर होनी थी, लेकिन जब गड़बड़ी का मामला खुला तो सीडीओ ने बैंकों को पहले से शादीशुदा मिली दुल्हन के खाते में धनराशि स्थानांतरित करने पर रोक लगा दी थी।
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यह बेहद गंभीर मामला है। जांच में रामनगर में पांच जोड़े पहले से शादीशुदा मिले हैं। इस मामले में एडीओ पंचायत पर निलंबन की कार्रवाई के लिए डीपीआरओ को संस्तुति कर दी गई है। -सत्येंद्र कुमार, सीडीओ