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बरेली में तीन हजार से ज्यादा ट्रकों की रफ्तार पर ब्रेक

Bareily Bureauबरेली ब्यूरो Updated Sun, 22 Dec 2019 06:45 PM IST
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बरेली। नागरिकता कानून पर देश भर में चल रहा हिंसक विरोध का और कोई नतीजा हो न हो लेकिन जल्द महंगाई के तौर पर इसका अंजाम सामने आ सकता है। दरअसल तमाम शहरों में माहौल खराब होने की वजह से ट्रांसपोर्ट काफी हद तक ठप हो गया है। बरेली में ही करीब तीन हजार ट्रकों और मिनी ट्रकों का सफर आम दिनों के मुकाबले आधा रह गया है। इससे खाद्यान्न, दवाओं और सब्जियों से जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। अनुमान जताया जा रहा है कि एक हफ्ते में ही बरेली में करोड़ों का कारोबार प्रभावित हो चुका है। ट्रांसपोर्ट कारोबार सबसे ज्यादा घाटे में है।
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बरेली की मंडी से कुमाऊं, दिल्ली, मेरठ समेत 50 से ज्यादा शहरों को किराना, खाद्यान्न, खाद्य तेल, सब्जी, आटा, चीनी आदि की सप्लाई की जाती है। मोटा अनुमान है कि शहर में हर रोज पौने दो सौ करोड़ रुपये का कारोबार होता है। नागरिकता कानून के खिलाफ हिंसा से ट्रकों की रफ्तार पर ब्रेक लगा तो तमाम जरूरी चीजों की आवक और सप्लाई भी थम गई है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर मेें हर रोज चार से पांच करोड़ रुपये तक का नुकसान होने का अनुमान है। माना जा रहा है कि फिलहाल यह नुकसान कारोबारी झेल रहे हैं लेकिन अंतत: पब्लिक को ही इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। चूंकि हिंसा का माहौल जल्द ठीक होने की उम्मीद नहीं है लिहाजा इसका असर जरूरी चीजों की कीमतों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।
दवा कारोबारियों के मुताबिक दवा बाजार में आम तौर पर बमुश्किल दो सप्ताह का ही स्टॉक रहता है लिहाजा अभी तो दवाओं की कोई किल्लत नहीं है लेकिन यह माहौल और लंबा चला तो संकट पैदा हो सकता है। बरेली से दिल्ली, मेरठ, नोएडा, हरियाणा, पंजाब समेत तमाम शहरों में चावल, आटा, मैदा, सूजी आदि राशन भी भेजा जाता है। बरेली मंडी में इसका रोजाना 85 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार बताया जाता है। कारोबारियों का कहना है कि अगर यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में सामान की आवक कम हो जाएगी। प्याज वैसे भी दूसरे राज्यों से ही आता है। दवाएं भी लखनऊ, मेरठ और दिल्ली से आती हैं। किल्लत होने पर ये चीजें महंगी हो सकती हैं, इससे सीधे आम आदमी प्रभावित होगा।
बरेली में कारोबारी टर्नओवर
खाद्यान्न
चावल
आटा, चीनी
खाद्य तेल 85
सब्जी 07
दवा 25
कपड़ा, हौजरी 27
ट्रांसपोर्ट 05
अन्य 30
करोड़ रुपये प्रतिदिन

ट्रांसपोर्ट सेक्टर कारोबार की रीढ़ है। सड़कों पर होने वाले बवाल से ट्रांसपोर्ट के साथ सभी कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। सिर्फ उत्तराखंड ही ऐसा राज्य है जहां के लिए ट्रांसपोर्टेशन लगातार चल रहा है। उम्मीद है कि जल्द स्थिति सामान्य हो जाएगी। - शोभित सक्सेना, अध्यक्ष ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन

मिनी ट्रक कारोबार में खास सहयोग करते हैं। आसपास जिलों में सुविधाजनक तरीके से वस्तुएं ढोई जा रही हैं, लेकिन रास्ते में गाड़ियां रुक रही हैं। इससे कामकाज प्रभावित है। - महेंद्र कुमार गुड्डू, मिनी ट्रक कारोबारी

जिले से आटा, खाद्य तेल, चीनी आदि बड़े पैमाने पर हर दिन दिल्ली आदि स्थानों पर जाती है। इन दिनों माहौल खराब किया जा रहा है। सरकार को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। - पंकज अग्रवाल, थोक कारोबारी

गुजरात समेत कुछ प्रमुख प्रांतों से जिले में गारमेंट्स, हौजरी और कपड़ा आदि पहुंचता है। हर दिन इसका बड़ा कारोबार होता है। ट्रांसपोर्ट व्यवस्था इन दिनों अस्तव्यस्त होने से कामकाज प्रभावित होने लगा है। - अनुपम कपूर, अध्यक्ष, होलसेल कपड़ा समिति

दवा का स्टॉक पर्याप्त है। केमिस्ट एसोसिएशन पूरी तरह कीमत और सप्लाई पर नजर रखे है। कुछ राजनीतिक पार्टियां अर्थव्यवस्था चौपट कर महंगाई बढ़ाना चाहती हैं, लेकिन पब्लिक समझदार है। - दुर्गेश खटवानी, अध्यक्ष, केमिस्ट एसोसिएशन
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