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मारबल, स्टोन हस्तशिल्प उद्योग शून्य टैक्स श्रेणी में रखा जाए
बरेली।
Updated Fri, 16 Jun 2017 01:31 AM IST
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Marble, Stone handicrafts industry should be kept in the zero tax category
- फोटो : Marble, Stone handicrafts industry should be kept in the zero tax category
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मारबल, स्टोन और हस्तशिल्प से जुडे़ कारोबारियों ने इस उद्योग को शून्य टैक्स श्रेणी में रखने का आग्रह किया है। आगरा से बरेली आए उद्यमियों ने वित्तमंत्री से मुलाकात कर बताया कि अभी तक यह उद्योेग टैक्स फ्री था, लेकिन जीएसटी प्रणाली में इसके लिए उच्च दर प्रस्तावित है। इससे कारोबार चौपट हो जाएगा।
गुरुवार दोपहर आगरा से आए शिष्टमंडल ने वित्तमंत्री राजेश अग्रवाल से मिलकर बताया कि जीएसटी में मारबल और स्टोन हस्तशिल्प मुगलकाल से परंपरागत होता आ रहा है। निर्यात निगम और हैंडीक्राफ्ट मंत्रालय ने इस उद्योग और कला को बढ़ावा देने के लिए सभी टैक्सों से मुक्त रखा है। वैट में भी इसे शामिल नहीं किया गया है, जबकि जीएसटी प्रणाली में 28 प्रतिशत टैक्स प्रस्तावित है। अगर इसे पारित किया गया तो 70 हजार से ज्यादा परंपरागत हस्तशिल्पी प्रभावित होंगे और प्राचीन कलाकारी पर विपरीत असर पड़ेगा।
आगरा टूरिस्ट वेलफेयर चैंबर के अध्यक्ष प्रहलाद अग्रवाल, उपाध्यक्ष अशोक सैनी ने बताया कि मारबल, स्टोन हस्तशिल्प हर वर्ष दो हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार करता है। बड़ी संख्या में विदेश और भारतीय पर्यटक आगरा पहुंचकर इस कलाकृति को खरीद कर ले जाते हैं। टैक्स लगने से कीमतें बढ़ेंगी। इसलिए एक्साइज, इंट्री टैक्स और अन्य टैक्स से इसे मुक्त रखा जाए।
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वित्तमंत्री ने शिष्टमंडल में उद्यमियों की समस्या सुनीं और बताया कि रविवार 18 जून को जीएसटी कौंसिल की बैठक हो रही है। इसमें पूरा पक्ष रखा जाएगा। मंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि सभी पक्षों से राय लेकर ही नई टैक्स प्रणाली लागू हो। इस मौके पर नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज ऑफ कामर्स के अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल और आगरा मारबल, स्टोन हस्तकला गृह उद्योग समिति पदाधिकारी मौजूद रहे और ज्ञापन सौंपा।
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गुरुवार दोपहर आगरा से आए शिष्टमंडल ने वित्तमंत्री राजेश अग्रवाल से मिलकर बताया कि जीएसटी में मारबल और स्टोन हस्तशिल्प मुगलकाल से परंपरागत होता आ रहा है। निर्यात निगम और हैंडीक्राफ्ट मंत्रालय ने इस उद्योग और कला को बढ़ावा देने के लिए सभी टैक्सों से मुक्त रखा है। वैट में भी इसे शामिल नहीं किया गया है, जबकि जीएसटी प्रणाली में 28 प्रतिशत टैक्स प्रस्तावित है। अगर इसे पारित किया गया तो 70 हजार से ज्यादा परंपरागत हस्तशिल्पी प्रभावित होंगे और प्राचीन कलाकारी पर विपरीत असर पड़ेगा।
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आगरा टूरिस्ट वेलफेयर चैंबर के अध्यक्ष प्रहलाद अग्रवाल, उपाध्यक्ष अशोक सैनी ने बताया कि मारबल, स्टोन हस्तशिल्प हर वर्ष दो हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार करता है। बड़ी संख्या में विदेश और भारतीय पर्यटक आगरा पहुंचकर इस कलाकृति को खरीद कर ले जाते हैं। टैक्स लगने से कीमतें बढ़ेंगी। इसलिए एक्साइज, इंट्री टैक्स और अन्य टैक्स से इसे मुक्त रखा जाए।
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वित्तमंत्री ने शिष्टमंडल में उद्यमियों की समस्या सुनीं और बताया कि रविवार 18 जून को जीएसटी कौंसिल की बैठक हो रही है। इसमें पूरा पक्ष रखा जाएगा। मंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि सभी पक्षों से राय लेकर ही नई टैक्स प्रणाली लागू हो। इस मौके पर नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज ऑफ कामर्स के अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल और आगरा मारबल, स्टोन हस्तकला गृह उद्योग समिति पदाधिकारी मौजूद रहे और ज्ञापन सौंपा।