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सौ साल तक 15 जनवरी को ही पड़ेगी मकर संक्रांति
बरेली
Updated Tue, 13 Jan 2015 10:28 PM IST
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14 जनवरी को मकर संक्रांति अब अगले सौ साल तक नहीं होगी। पूरे सौ साल यह पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। सूर्य की गति में प्रति सौर वर्ष कुछ मिनट की वृद्धि से सदी का यह परिवर्तन इस साल से होने जा रहा है। इस लिहाज से यह मकर संक्रांति दुर्लभ है।
बता दें कि सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश पर हर साल मकर संक्रांति होती है। इस 14 जनवरी को सूर्य शाम 7 बजकर 20 मिनट पर मकर में प्रवेश कर रहे हैं, चूंकि तब तक सूर्य अस्त हो जाएंगे, ऐसे में सारे ज्योतिष इस साल यह पर्व 14 के बजाय 15 जनवरी को मनाने पर सहमत हुए हैं। ज्योतिषाचार्य और खगोलविद डॉ. बीके शर्मा कहते हैं कि ऐसा इसलिए क्योंकि मकर संक्रांति सूर्य से जुड़ा पर्व है और संक्रांतिकाल में उस शाम को जब सूर्य अस्त होंगे तो उस दिन इस पर्व का औचित्य ही नहीं रहेगा इसलिए इसे अगले दिन सूर्य उदयकाल से माने जाने का विधान शास्त्रों में भी है। इसलिए इस साल बृहस्पतिवार को सुबह स्नान, दान का महत्व रहेगा। बुधवार को नहीं।
ऐसे हुआ परिवर्तन
डॉ. शर्मा बताते हैं कि सौर ग्रह में सूर्य, चंद्र और पृथ्वी की गति होती है। सूर्य भी कुछ अंश गतिशील होता रहता है। यह गति इतनी कम है कि उसे 24 घंटे आगे जाने में पूरी एक सदी लग जाएगी। पिछले साल तक सूर्य का धनु से मकर में प्रवेश 14 जनवरी को अस्त होने के काफी पहले हो जाया करता था लेकिन इस साल यह अस्त होने के बाद हो रहा है।
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इंसेट...
बन रहा पांच बार 15 का संयोग
21 वीं सदी के 15 वें वर्ष की 15 तारीख को 15 वें नक्षत्र स्वाति और 15 मुहूर्त तिथि होगी। ज्योतिषी पंडित रामनरेश मिश्र के अनुसार, 15 का मूलांक 6 है और 6 अंक का स्वामी शुक्र है जो सुंदरता, प्राकृतिक सौंदर्य और चकाचौंध का परिचायक है इसलिए यह वर्ष उन्नति का रहेगा।
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खरमास खत्म, शुरू होंगे शुभ कार्य
सूर्य के धनु में बैठे होने के कारण 16 दिसंबर से खरमास चल रहा है। 15 जनवरी को सूर्य के उत्तरायण होते ही खरमास खत्म हो जाएगा। आचार्य मुकेश मिश्रा ने बताया कि इसी के साथ महीने भर से निषिद्ध शादी समारोह और अन्य शुभ कार्य शुरू हो जाएंगे।
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बता दें कि सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश पर हर साल मकर संक्रांति होती है। इस 14 जनवरी को सूर्य शाम 7 बजकर 20 मिनट पर मकर में प्रवेश कर रहे हैं, चूंकि तब तक सूर्य अस्त हो जाएंगे, ऐसे में सारे ज्योतिष इस साल यह पर्व 14 के बजाय 15 जनवरी को मनाने पर सहमत हुए हैं। ज्योतिषाचार्य और खगोलविद डॉ. बीके शर्मा कहते हैं कि ऐसा इसलिए क्योंकि मकर संक्रांति सूर्य से जुड़ा पर्व है और संक्रांतिकाल में उस शाम को जब सूर्य अस्त होंगे तो उस दिन इस पर्व का औचित्य ही नहीं रहेगा इसलिए इसे अगले दिन सूर्य उदयकाल से माने जाने का विधान शास्त्रों में भी है। इसलिए इस साल बृहस्पतिवार को सुबह स्नान, दान का महत्व रहेगा। बुधवार को नहीं।
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ऐसे हुआ परिवर्तन
डॉ. शर्मा बताते हैं कि सौर ग्रह में सूर्य, चंद्र और पृथ्वी की गति होती है। सूर्य भी कुछ अंश गतिशील होता रहता है। यह गति इतनी कम है कि उसे 24 घंटे आगे जाने में पूरी एक सदी लग जाएगी। पिछले साल तक सूर्य का धनु से मकर में प्रवेश 14 जनवरी को अस्त होने के काफी पहले हो जाया करता था लेकिन इस साल यह अस्त होने के बाद हो रहा है।
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बन रहा पांच बार 15 का संयोग
21 वीं सदी के 15 वें वर्ष की 15 तारीख को 15 वें नक्षत्र स्वाति और 15 मुहूर्त तिथि होगी। ज्योतिषी पंडित रामनरेश मिश्र के अनुसार, 15 का मूलांक 6 है और 6 अंक का स्वामी शुक्र है जो सुंदरता, प्राकृतिक सौंदर्य और चकाचौंध का परिचायक है इसलिए यह वर्ष उन्नति का रहेगा।
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सूर्य के धनु में बैठे होने के कारण 16 दिसंबर से खरमास चल रहा है। 15 जनवरी को सूर्य के उत्तरायण होते ही खरमास खत्म हो जाएगा। आचार्य मुकेश मिश्रा ने बताया कि इसी के साथ महीने भर से निषिद्ध शादी समारोह और अन्य शुभ कार्य शुरू हो जाएंगे।