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महाशिवरात्रि: धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष के लिए करें चार प्रहर की पूजा
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भगवान शिव
- फोटो : demo photo
पुराणों में है शिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का विधान
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शिव पुराण और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ विशेष फलदायी
बरेली। शिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का विधान है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ये चार प्रहर धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष प्रदान करने में सक्षम हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ शंखधार के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन शिवपुराण का पाठ और महामृत्युंजय मंत्र या शिव के पंचाक्षर मंत्र ऊँ नम: शिवाय का जाप करना चाहिए। इसके साथ महाशिवरात्रि पर रात्रि जागरण का भी विधान है। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि के पहले पहर की पूजा शाम के समय प्रदोष काल में सूर्यास्त के बाद की जाती है। यह समय शाम 6:46 बजे से रात नौ बजे के बीच का होता है। महाशिवरात्रि पर इस पहर की पूजा से ही सभी प्रकार के दोषों का नाश हो जाता है और इसका विशेष लाभ प्राप्त होता है।
दूसरे पहर की पूजा रात में की जाती है। यह पूजा रात 9:47 से रात्रि 12:48 बजे के बीच की जाती है। इस पहर की पूजा करने से धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है। तीसरे पहर की पूजा मध्य रात्रि में की जाती है जिसका समय रात्रि 12:48 से सुबह 3:49 बजे तक का होता है। इससे हर प्रकार की मनोकामना की पूर्ति का प्रयोजन सिद्ध होता है। चौथे पहर की पूजा ब्रह्ममुहूर्त में सुबह तीन बजे से 12 मार्च को सूर्योदय तक की जाएगी। इस पूजा से सभी प्रकार के दोष नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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बुध का राशि परिवर्तन जीवन में लाएगा बदलाव
बरेली। भगवान शिव की अपार शक्ति और भक्ति का महापर्व महाशिवरात्रि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसी दिन से सृष्टि का आरंभ भी माना जाता है।
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महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और मां पार्वती की विधि विधान से पूजा की जाती है। शिव भक्त रुद्राभिषेक के साथ ही महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी करते हैं। इस बार महाशिवरात्रि और भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि इसी दिन हरिद्वार कुंभ में प्रथम शाही स्नान होगा। शिवरात्रि पर शिव योग लगा रहेगा और धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा। चंद्रमा मकर राशि में रहेगा।
पूजा का मुहूर्त
महाशिवरात्रि त्रयोदशी तिथि: 11 मार्च 2021 गुरुवार
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: दोपहर 2:39 मिनट पर
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 12 मार्च दोपहर 12:23 मिनट
कई राशियों में होगा परिवर्तन
शिवरात्रि पर मिथुन और कन्या राशि के स्वामी बुध शनि की राशि कुंभ में प्रवेश करेंगे। इससे पहले बुध मकर राशि में चार फरवरी को वक्री हुए थे। ज्योतिषाचार्य पंडित राजीव शर्मा के मुताबिक, बुध ग्रह को बुद्धि, संचार, भाषण, शिक्षा और स्वभाव का कारक माना जाता है। बुध ग्रह जिस ग्रह के साथ आता है। उस ग्रह के अनुसार ही व्यवहार करने लगता है। बुध सूर्य का सबसे करीबी ग्रह है।
बुध के परिवर्तन का राशियों पर प्रभाव
- मेष: इस राशि के जातकों को खासा फायदा होगा।
- वृष: सभी बिगड़े काम बनने की संभावना है।
- मिथुन: बौद्धिक कार्यों में सफलता मिलेगी।
- कर्क: सेहत को लेकर सावधान रहें। मौसम से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं।
- सिंह: संतान संबंधी चिंता से मुक्ति। परिवार में मांगलिक कार्य होने की संभावना।
- कन्या: रोगों से मुक्ति मिलेगी।
- तुला: व्यापार में लाभ और नौकरी में तरक्की का योग।
- वृश्चिक: चल-अचल संपत्ति में वृद्धि और मित्रों-संबंधियों का सहयोग मिलने की संभावना।
- धनु: पराक्रम में वृद्धि, भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा।
- मकर: सुख-समृद्धि का योग।
- कुंभ: संतान की चिंता से मुक्ति, नौकरी में पदोन्नति का योग।
- मीन: व्यय में वृद्धि, सावधानी से लें आर्थिक फैसले।
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शिव पुराण और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ विशेष फलदायी बरेली। शिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का विधान है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ये चार प्रहर धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष प्रदान करने में सक्षम हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ शंखधार के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन शिवपुराण का पाठ और महामृत्युंजय मंत्र या शिव के पंचाक्षर मंत्र ऊँ नम: शिवाय का जाप करना चाहिए। इसके साथ महाशिवरात्रि पर रात्रि जागरण का भी विधान है। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि के पहले पहर की पूजा शाम के समय प्रदोष काल में सूर्यास्त के बाद की जाती है। यह समय शाम 6:46 बजे से रात नौ बजे के बीच का होता है। महाशिवरात्रि पर इस पहर की पूजा से ही सभी प्रकार के दोषों का नाश हो जाता है और इसका विशेष लाभ प्राप्त होता है।
दूसरे पहर की पूजा रात में की जाती है। यह पूजा रात 9:47 से रात्रि 12:48 बजे के बीच की जाती है। इस पहर की पूजा करने से धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है। तीसरे पहर की पूजा मध्य रात्रि में की जाती है जिसका समय रात्रि 12:48 से सुबह 3:49 बजे तक का होता है। इससे हर प्रकार की मनोकामना की पूर्ति का प्रयोजन सिद्ध होता है। चौथे पहर की पूजा ब्रह्ममुहूर्त में सुबह तीन बजे से 12 मार्च को सूर्योदय तक की जाएगी। इस पूजा से सभी प्रकार के दोष नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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बुध का राशि परिवर्तन जीवन में लाएगा बदलाव
बरेली। भगवान शिव की अपार शक्ति और भक्ति का महापर्व महाशिवरात्रि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसी दिन से सृष्टि का आरंभ भी माना जाता है।
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महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और मां पार्वती की विधि विधान से पूजा की जाती है। शिव भक्त रुद्राभिषेक के साथ ही महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी करते हैं। इस बार महाशिवरात्रि और भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि इसी दिन हरिद्वार कुंभ में प्रथम शाही स्नान होगा। शिवरात्रि पर शिव योग लगा रहेगा और धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा। चंद्रमा मकर राशि में रहेगा।
पूजा का मुहूर्त
महाशिवरात्रि त्रयोदशी तिथि: 11 मार्च 2021 गुरुवारचतुर्दशी तिथि प्रारंभ: दोपहर 2:39 मिनट पर
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 12 मार्च दोपहर 12:23 मिनट
कई राशियों में होगा परिवर्तन
शिवरात्रि पर मिथुन और कन्या राशि के स्वामी बुध शनि की राशि कुंभ में प्रवेश करेंगे। इससे पहले बुध मकर राशि में चार फरवरी को वक्री हुए थे। ज्योतिषाचार्य पंडित राजीव शर्मा के मुताबिक, बुध ग्रह को बुद्धि, संचार, भाषण, शिक्षा और स्वभाव का कारक माना जाता है। बुध ग्रह जिस ग्रह के साथ आता है। उस ग्रह के अनुसार ही व्यवहार करने लगता है। बुध सूर्य का सबसे करीबी ग्रह है।बुध के परिवर्तन का राशियों पर प्रभाव
- मेष: इस राशि के जातकों को खासा फायदा होगा।
- वृष: सभी बिगड़े काम बनने की संभावना है।
- मिथुन: बौद्धिक कार्यों में सफलता मिलेगी।
- कर्क: सेहत को लेकर सावधान रहें। मौसम से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं।
- सिंह: संतान संबंधी चिंता से मुक्ति। परिवार में मांगलिक कार्य होने की संभावना।
- कन्या: रोगों से मुक्ति मिलेगी।
- तुला: व्यापार में लाभ और नौकरी में तरक्की का योग।
- वृश्चिक: चल-अचल संपत्ति में वृद्धि और मित्रों-संबंधियों का सहयोग मिलने की संभावना।
- धनु: पराक्रम में वृद्धि, भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा।
- मकर: सुख-समृद्धि का योग।
- कुंभ: संतान की चिंता से मुक्ति, नौकरी में पदोन्नति का योग।
- मीन: व्यय में वृद्धि, सावधानी से लें आर्थिक फैसले।