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करा दिया होम आइसोलेट.. यह बताया ही नहीं ऑक्सीमीटर भी रखना है साथ
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अफसरों के साथ बैठक करते नोडल अधिकारी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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सहगल ने कलक्ट्रेट के कंट्रोल रूम से फोन पर संक्रमितों से की बात तो सामने आई खतरनाक सच्चाई
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कई और खामियां मिलने पर नोडल अफसर ने जताई नाराजगी, अफसरों को दिए दुरुस्त करने के निर्देश
बरेली। तूफानी रफ्तार पकड़ रहे कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सरकार की ओर से दिए जा रहे निर्देशों पर अफसर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे हैं। होम आइसोलेट कराए गए कोरोना संक्रमितों की किस तरह निगरानी की जा रही है, नोडल अफसर नवनीत सहगल ने शुक्रवार को कलक्ट्रेट के इंटिग्रेटेड कंट्रोल रूम पहुंचते ही सामने आ गया। सहगल ने कंट्रोल रूम से अचानक कॉल कर जब होम आइसोलेट पूजा नाम की कोरोना संक्रमित से बात की तो यह पता लगने पर दंग रह गए कि उनके पास ऑक्सीजन के स्तर जांच के लिए ऑक्सीमीटर तक नहीं है। उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि ऑक्सीजन स्तर कितना गिर जाने पर उन्हें फौरन अस्पताल जाना है। सहगल ने कुछ और मरीजों से बात की तो कई और खामियां सामने आईं। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया कि तत्काल सारी खामियां दुरुस्त कर ली जाएं।
जिले में संक्रमण की रफ्तार एकाएक तेज हो जाने के बाद शासन से भेजे गए अपर मुख्य सचिव नवनीत सहगल ने यहां कोरोना से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया। पीजीआई लखनऊ के दो डॉक्टरों के साथ शुक्रवार सुबह 11.30 बजे सरकारी वायुयान से त्रिशूल एयरबेस पर उतरने के बाद वह पहले रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज और फिर सीधे कलक्ट्रेट के इंटिग्रेटेड कंट्रोल रूम पहुंचे। यहां उन्होंने फोन पर कई मरीजों से बात की। अमर सिंह नाम के एक मरीज को कॉल की तो उनके बेटे ने बताया कि उनके पिता का एक अस्पताल में इलाज तो चल रहा है लेकिन उन्हें यह पता नहीं चल पा रहा है कि उनकी तबियत कैसी है। सहगल ने सीडीओ चंद्रमोहन गर्ग को कोरोना मरीजों के परिवार के लिए काउंसलिंग डेस्क बनाने और उस पर डॉक्टरों की टीम बैठाने को कहा। यह भी कहा कि इस टीम के नंबर सभी मरीजों के पास होने चाहिए ताकि होम आइसोलेशन के दौरान वे सीधे इन डॉक्टरों से भी परामर्श ले सकें। उन्होंने कोरोना के मरीजों को अस्पताल भेजने की व्यवस्था को उलझाऊ बताते हुए उसमें भी सुधार के निर्देश दिए। सीडीओ चंद्रमोहन गर्ग ने बताया कि तीन सौ बेड अस्पताल में मरीजों के लिए दस एंबुलेंस है। इसके अलावा कुल 43 एंबुुलेंस उपलब्ध हैं। जरूरत पड़ने पर और भी एंबुलेंस का इंतजाम किया जाता है।
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अफसरों को नहीं पता कितने घरों में सर्वे
कलक्ट्रेट में निरीक्षण के दौरान नवनीत सहगल को नगर आयुक्त ने बताया कि शहर में 1.40 लाख घर हैं। सहगल ने पूूछा कि कितने घरों में कोरोना के लिए सर्वे हो चुका तो सारे अधिकारी बगले झांकने लगे। बाद में एक कर्मचारी ने बताया कि हर दिन पांच से दस हजार घरों में सर्वे हो रहा है।
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बगैर पीपीई किट पहने ले रहे सैंपल, सहगल नाराज
कलक्ट्रेट के बाद सहगल ने सुभाषनगर के शांति विहार में कोरोना सैंपल लेने को सेंटर बनाए गए नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को देखा। वहां सैंपल लेने को मौजूद स्वास्थ्य कर्मी पीपीई किट पहने बगैर ड्यूटी कर रहे थे। इस पर भड़के सहगल ने सीएमओ से तत्काल इस पर ध्यान देने को कहा। अस्पताल के पास गंदगी और जलभराव देखकर नगर निगम के अधिकारियों पर भी नाराजगी जताई।
चौपुला पर फिर जाम में फंस गए
सुभाषनगर से सर्किट हाउस के बीच नवनीत सहगल का काफिला चौपुला पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज पर इस बार भी फंस गया। यहां सर्विस रोड काफी टूटा है। जलभराव और कीचड़ से अक्सर जाम लगा रहता है। ट्रैफिक व्यवस्था भी दुरुस्त न होने से यहां लोगों को जाम की दिक्कत से जूझना पड़ रहा है। इसी महीने पहले भी दौरे पर आए सहगल यहां की व्यवस्थाएं देखकर नाराज हो चुके हैं।
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कई और खामियां मिलने पर नोडल अफसर ने जताई नाराजगी, अफसरों को दिए दुरुस्त करने के निर्देश बरेली। तूफानी रफ्तार पकड़ रहे कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सरकार की ओर से दिए जा रहे निर्देशों पर अफसर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे हैं। होम आइसोलेट कराए गए कोरोना संक्रमितों की किस तरह निगरानी की जा रही है, नोडल अफसर नवनीत सहगल ने शुक्रवार को कलक्ट्रेट के इंटिग्रेटेड कंट्रोल रूम पहुंचते ही सामने आ गया। सहगल ने कंट्रोल रूम से अचानक कॉल कर जब होम आइसोलेट पूजा नाम की कोरोना संक्रमित से बात की तो यह पता लगने पर दंग रह गए कि उनके पास ऑक्सीजन के स्तर जांच के लिए ऑक्सीमीटर तक नहीं है। उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि ऑक्सीजन स्तर कितना गिर जाने पर उन्हें फौरन अस्पताल जाना है। सहगल ने कुछ और मरीजों से बात की तो कई और खामियां सामने आईं। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया कि तत्काल सारी खामियां दुरुस्त कर ली जाएं।
जिले में संक्रमण की रफ्तार एकाएक तेज हो जाने के बाद शासन से भेजे गए अपर मुख्य सचिव नवनीत सहगल ने यहां कोरोना से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया। पीजीआई लखनऊ के दो डॉक्टरों के साथ शुक्रवार सुबह 11.30 बजे सरकारी वायुयान से त्रिशूल एयरबेस पर उतरने के बाद वह पहले रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज और फिर सीधे कलक्ट्रेट के इंटिग्रेटेड कंट्रोल रूम पहुंचे। यहां उन्होंने फोन पर कई मरीजों से बात की। अमर सिंह नाम के एक मरीज को कॉल की तो उनके बेटे ने बताया कि उनके पिता का एक अस्पताल में इलाज तो चल रहा है लेकिन उन्हें यह पता नहीं चल पा रहा है कि उनकी तबियत कैसी है। सहगल ने सीडीओ चंद्रमोहन गर्ग को कोरोना मरीजों के परिवार के लिए काउंसलिंग डेस्क बनाने और उस पर डॉक्टरों की टीम बैठाने को कहा। यह भी कहा कि इस टीम के नंबर सभी मरीजों के पास होने चाहिए ताकि होम आइसोलेशन के दौरान वे सीधे इन डॉक्टरों से भी परामर्श ले सकें। उन्होंने कोरोना के मरीजों को अस्पताल भेजने की व्यवस्था को उलझाऊ बताते हुए उसमें भी सुधार के निर्देश दिए। सीडीओ चंद्रमोहन गर्ग ने बताया कि तीन सौ बेड अस्पताल में मरीजों के लिए दस एंबुलेंस है। इसके अलावा कुल 43 एंबुुलेंस उपलब्ध हैं। जरूरत पड़ने पर और भी एंबुलेंस का इंतजाम किया जाता है।
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अफसरों को नहीं पता कितने घरों में सर्वे
कलक्ट्रेट में निरीक्षण के दौरान नवनीत सहगल को नगर आयुक्त ने बताया कि शहर में 1.40 लाख घर हैं। सहगल ने पूूछा कि कितने घरों में कोरोना के लिए सर्वे हो चुका तो सारे अधिकारी बगले झांकने लगे। बाद में एक कर्मचारी ने बताया कि हर दिन पांच से दस हजार घरों में सर्वे हो रहा है।
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