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नेताओं की जुबान पर चढ़ा ‘लखनऊ-ताइवान’ अमरूद का स्वाद

Fri, 24 Nov 2017 01:37 AM IST
बरेली।
बरेली। Updated Fri, 24 Nov 2017 01:37 AM IST
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'Lucknow-Taiwan' taste of guava on the lips of politicians
अमरूद

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दिल्ली और लखनऊ के नेताओं की जुबान पर ‘लखनऊ-ताइवान’ प्रजाति के अमरूद का स्वाद चढ़ गया है। वे ‘होम्योपैथिक-ऑर्गेनिक फार्म’ पर पहुंचकर सवा किलो वजन के अमरूद (सेब-नाशपाती मिश्रित) का स्वाद ले रहे हैं। बरेली-पीलीभीत की सीमा पर स्थित पांच एकड़ के इस फार्म हाउस पर लखनऊ-ताईवान प्रजाति के अमरूद के अलावा फल-सब्जियों की होम्योपैथिक-ऑर्गेनिक विधि से खेती होती है। 
होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. विकास वर्मा ने दो साल पहले खमरिया गांव में पांच एकड़ ऊसर जमीन खरीदी थी। कृषि में नया प्रयोग करते हुए उन्होंने अमरूद समेत 20 फल-सब्जियों की जैविक और होम्योपैथिक तरीके से खेती कर जमीन को उपजाऊ और हरा-भरा बना दिया है। फार्म हाउस की 3.5 एकड़ जमीन पर इस अनोखी प्रजाति के अमरूद के पौधे छत्तीसगढ़ से लाकर लगाए गए थे। अब ये पेड़ बन चुके हैं। इनमें 600 ग्राम से लेकर 1.4 किलोग्राम वजन तक का अमरूद (सेब-नाशपाती मिश्रित) निकल रहा है जो सामान्य अमरूद से कई गुना मीठा और स्वादिष्ट है। इनमें रासायनिक खाद या कीटनाशक का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं किया गया है। 
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ऊसर जमीन को होम्योपैथिक दवाइयों के स्प्रे और वर्मी कंपोस्ट से उपजाऊ बनाकर गया। फार्म हाउस की चारों ओर कंटीले तार के अलावा शतावर और गुलाब के पौधों से फेंसिंग की गई। इसके बाद तीन फीट चौड़ी क्यारी में शतावर, लेमन ग्रॉस, ई-फोरबिया (मेडिसिन प्लांट), गुलाब और सागौन लगाया गया। इसके अलावा खेत की मेड़ के किनारे चुकंदर, पालक, मूली, गाजर, टमाटर, मेथी, मिर्च, सरसों, हल्दी, बांकला, चना, लहसुन समेत 20 तरह की सीजनल सब्जियां जैविक विधि से पैदा की जाती हैं। साढ़े तीन एकड़ एरिया में अमरूद की खेती होम्योपैथिक-आर्गेनिक तरीके से की जा रही है। बाग में अमरूद के 15 सौ पेड़ों पर 32 सौ से ज्यादा अमरूद लगे हैं। धूप से सुरक्षा के लिए हर अमरूद को पेड़ पर ही कागज से लपेटकर बांधा गया है। सिंचाई सोलर ड्रिप सिस्टम से की जाती है ताकि पानी बेकार न हो। 
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फार्म हाउस की खास बातें
1- अमरूद समेत हर फल-सब्जी केमिकल मुक्त है।
2- खेती के एरिया का ले-आउट बनाकर व्यवस्थित तरीके से फल-सब्जियां उगा रहे हैं
3- खेत में ही जलकुंभी, गोबर, बकैन और नीम से वर्मी कंपोस्ट खाद बनाते हैं। यही फसलों में प्रयोग की जाती है। 
4- गोमूत्र, लहसुन, हरी मिर्च, तांबा, नीम और बकैन मिलाकर जैविक कीटनाशक बनाते हैं। रासायनिक कीटनाशक प्रयोग नहीं करते हैं। 
5- फसल और सब्जी पर हर 30 दिन में होम्योपैथिक दवाइयों का स्प्रे करते हैं। होम्योपैथिक दवाइयों का स्प्रे कर सब्जी और फल उगाने वाला कोई दूसरा कृषि फार्म नहीं है। यह रिसर्च चिकित्सक ने खुद कर दवाइयां तैयार की हैं।         
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