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Bareilly News: कोरोना महामारी के दौरान छोड़े लॉकर, अब ढूंढ़े नहीं मिल रहे
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जिले की सभी बैंक शाखाओं में मौजूद हैं करीब 35 हजार लॉकर
बरेली। कोरोना महामारी के दौरान लोगों ने अपने बैंक लॉकर को खाली कर दिया। बेवजह किराया न देना पड़े, इसके लिए ज्यादातर ग्राहकों ने बैंक में आवेदन कर लॉकर को बंद करा दिया। अब लोगों को बैंक लॉकर ढूंढ़े नहीं मिल रहे हैं। लॉकर के लिए ग्राहकों को महीनाें इंतजार करना पड़ रहा है।
जेवर समेत अन्य कीमती सामान व दस्तावेज रखने के लिए बैंक लॉकर को सबसे सुरक्षित माना जाता है। बैंक एसोसिएशन के मुताबिक, कोरोना काल में शहरवासियों ने बैंकों के लॉकर लेना कम कर दिया था। अधिकतर बैंकों के लॉकर खाली हो गए थे। बैंक की ओर से अच्छे ग्राहकों को लॉकर लेने के लिए फोन कॉल की जा रही थी, लेकिन कोरोना के भय से लोग हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। तब जिले के करीब 40 फीसदी लॉकर खाली हो गए थे।
महामारी के बाद हालात सुधरे। 10 जून 2023 को देश को कोरोना मुक्त घोषित कर दिया गया। इसके बाद बैंकों के लाॅकर पर फिर लोगों का भरोसा बढ़ा। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक्स यूनियन के अध्यक्ष पीके माहेश्वरी ने बताया कि जिले में करीब 35 हजार लॉकर मौजूद हैं, लेकिन इनमें से 90 फीसदी से अधिक लॉकर भरे हुए चल रहे हैं। बैंक की मुख्य शाखाओं में लॉकर के लिए आवेदन लंबित पड़े हैं। उपलब्धता न होने से ग्राहकों को लॉकर नहीं मिल पा रहे हैं।
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एसबीआई स्टाफ एसोसिएशन के उप महामंत्री नवींद्र कुमार ने बताया कि स्टेट बैंक की जिलेभर की शाखाओं में कुल सात हजार लाॅकर हैं। इनमें से करीब 800 लाॅकर अभी खाली हैं। हालांकि शहर की कई शाखाओं में लॉकर खाली नहीं हैं। राजेंद्रनगर के व्यापारी मनोज ने बताया कि उन्होंने एक बैंक में तीन माह पहले लॉकर के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है।
नियमों में बदलाव के बाद कम आ रहे आवेदन
लॉकर को लेकर आरबीआई ने कुछ दिन पहले नियमों में बदलाव किया है। इसमें केवाईसी की प्रमुखता, ग्राहक का बैंक में तीन वर्ष से बचत या चालू खाते की अनिवार्यता, खाते में पिछले एक साल में औसत शेष राशि इतनी हो कि वह दो साल के किराये को कवर कर सके समेत अन्य कई शर्तें जोड़ी गई हैं। इसके बाद ग्राहक बैंक लॉकर को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं। आवेदन भी कम आ रहे हैं। संवाद
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बरेली। कोरोना महामारी के दौरान लोगों ने अपने बैंक लॉकर को खाली कर दिया। बेवजह किराया न देना पड़े, इसके लिए ज्यादातर ग्राहकों ने बैंक में आवेदन कर लॉकर को बंद करा दिया। अब लोगों को बैंक लॉकर ढूंढ़े नहीं मिल रहे हैं। लॉकर के लिए ग्राहकों को महीनाें इंतजार करना पड़ रहा है।
जेवर समेत अन्य कीमती सामान व दस्तावेज रखने के लिए बैंक लॉकर को सबसे सुरक्षित माना जाता है। बैंक एसोसिएशन के मुताबिक, कोरोना काल में शहरवासियों ने बैंकों के लॉकर लेना कम कर दिया था। अधिकतर बैंकों के लॉकर खाली हो गए थे। बैंक की ओर से अच्छे ग्राहकों को लॉकर लेने के लिए फोन कॉल की जा रही थी, लेकिन कोरोना के भय से लोग हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। तब जिले के करीब 40 फीसदी लॉकर खाली हो गए थे।
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महामारी के बाद हालात सुधरे। 10 जून 2023 को देश को कोरोना मुक्त घोषित कर दिया गया। इसके बाद बैंकों के लाॅकर पर फिर लोगों का भरोसा बढ़ा। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक्स यूनियन के अध्यक्ष पीके माहेश्वरी ने बताया कि जिले में करीब 35 हजार लॉकर मौजूद हैं, लेकिन इनमें से 90 फीसदी से अधिक लॉकर भरे हुए चल रहे हैं। बैंक की मुख्य शाखाओं में लॉकर के लिए आवेदन लंबित पड़े हैं। उपलब्धता न होने से ग्राहकों को लॉकर नहीं मिल पा रहे हैं।
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एसबीआई स्टाफ एसोसिएशन के उप महामंत्री नवींद्र कुमार ने बताया कि स्टेट बैंक की जिलेभर की शाखाओं में कुल सात हजार लाॅकर हैं। इनमें से करीब 800 लाॅकर अभी खाली हैं। हालांकि शहर की कई शाखाओं में लॉकर खाली नहीं हैं। राजेंद्रनगर के व्यापारी मनोज ने बताया कि उन्होंने एक बैंक में तीन माह पहले लॉकर के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है।
नियमों में बदलाव के बाद कम आ रहे आवेदन
लॉकर को लेकर आरबीआई ने कुछ दिन पहले नियमों में बदलाव किया है। इसमें केवाईसी की प्रमुखता, ग्राहक का बैंक में तीन वर्ष से बचत या चालू खाते की अनिवार्यता, खाते में पिछले एक साल में औसत शेष राशि इतनी हो कि वह दो साल के किराये को कवर कर सके समेत अन्य कई शर्तें जोड़ी गई हैं। इसके बाद ग्राहक बैंक लॉकर को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं। आवेदन भी कम आ रहे हैं। संवाद