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एलएलबी की कॉपियों के स्टीकर फटे मिले
बरेली।
Updated Thu, 03 Mar 2016 01:21 AM IST
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय में इस समय पर एलएलबी की कॉपियों का मूल्यांकन चल रहा है। कॉपियों पर लिखे जाने वाले रोल नंबर और सेंटर का नाम छिपाने के लिए कोडिंग के दौरान उस पर स्टीकर चिपका दिया जाता है, ताकि किसी भी कॉपी की पहचान न हो सके। इसके बाद भी पहचान के निशान छोड़े जाते हैं।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय में एलएलबी में होने वाले कोडिंग पर हर साल सवाल खड़े होते हैं। इस बार शिकायत आई है कि कॉपियों का मूल्यांकन करने वाले शिक्षक रोल नंबर और परीक्षा केंद्र छिपाने वाले स्टीकर को ही हटाने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि वह कॉपी पहचान सकें और उसे हिसाब से नंबर दे सके। इसके लिए डॉ. जेएन मौर्या के पास शिकायत आई है कि कुछ कॉपियों के स्टीकर फट गए हैं। शिक्षकों ने ये स्टीकर फाड़कर रोल नंबर देखने का प्रयास किया है। निजी कॉलेजों की कॉपियों में ज्यादा नंबर देने के लिए हर साल ऐसे ही कोडिंग के साथ खिलवाड़ होता है। ज्यादा नंबर देने के लिए बाकायदा सिफारिशें भी जाती हैं और कई बार शिक्षकों को रुपये भी दिए जाते हैं। नंबर के लिए कॉपियों के ठेके उठते हैं।
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय में एलएलबी में होने वाले कोडिंग पर हर साल सवाल खड़े होते हैं। इस बार शिकायत आई है कि कॉपियों का मूल्यांकन करने वाले शिक्षक रोल नंबर और परीक्षा केंद्र छिपाने वाले स्टीकर को ही हटाने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि वह कॉपी पहचान सकें और उसे हिसाब से नंबर दे सके। इसके लिए डॉ. जेएन मौर्या के पास शिकायत आई है कि कुछ कॉपियों के स्टीकर फट गए हैं। शिक्षकों ने ये स्टीकर फाड़कर रोल नंबर देखने का प्रयास किया है। निजी कॉलेजों की कॉपियों में ज्यादा नंबर देने के लिए हर साल ऐसे ही कोडिंग के साथ खिलवाड़ होता है। ज्यादा नंबर देने के लिए बाकायदा सिफारिशें भी जाती हैं और कई बार शिक्षकों को रुपये भी दिए जाते हैं। नंबर के लिए कॉपियों के ठेके उठते हैं।
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