{"_id":"672a9661c482214d9e0089b4","slug":"listen-to-my-request-o-chhathi-maiya-bareilly-news-c-4-bly1015-515185-2024-11-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: सुन ली अरजिया हमार हे छठी मइया...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: सुन ली अरजिया हमार हे छठी मइया...
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। सूर्य उपासना के महापर्व छठ का मंगलवार को नहाय खाय के साथ आगाज हुआ। शहर में रह रहे बिहार और पूर्वांचल के परिवारों ने उल्लास पूर्वक उत्सव में भाग लिया। सुबह से ही महिलाओं ने घर की साफ-सफाई कर स्नान किया। इसके उपरांत चने की दाल, लौकी की सब्जी और चावल का सेवन कर महिलाओं ने सुख, समृद्धि, वैभव और यश के लिए व्रत का संकल्प लिया। सुन ली अरजिया हमार हे छठी मइया... आदि गीत दिनभर गूंजते रहे।
शहर में कई स्थानों पर सामूहिक छठ पूजा का आयोजन होता है। दोहरा रोड स्थित सनराइज कॉलोनी की निवासी रिंकी वर्मा बताती हैं कि स्थानीय लोग भी इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं। इस दौरान उनकी कॉलोनी में एक घर में ही छठ पर्व का आयोजन किया जाता है। छत पर टब रखकर सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया जाता है। इस अवसर पर शाम को सभी कॉलोनीवासी छत पर एकत्रित होकर पूजा करते हैं और भजनों का आयोजन होता है।
बुधवार को खरना होगा। इस दिन शाम को गुड़ और चावल की खीर बनाकर उसका भोग लगाया जाएगा। बृहस्पतिवार को महिलाएं निर्जला व्रत रखकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी और शुक्रवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर संतान और परिवार के लिए मंगल कामना करेंगी। इस अवसर पर रुहेलखंड विश्वविद्यालय स्थित श्री शिव शक्ति पीठ मंदिर, इज्जतनगर स्थित श्री शिव पार्वती मंदिर, धोपेश्वरनाथ मंदिर समेत अन्य स्थानों पर भव्य सजावट की गई।
विज्ञापन
सूप और डाला की बढ़ी मांग
बाजार में सूप-डाला की जमकर खरीदारी हो रही है। बाजार में सूप 250 से 300 रुपये तक और डाला 300 से 400 रुपये तक में बिक रहे है। सब्जियों में मूली, लोबिया फली, कद्दू और फलों में सेब, केले की भी विशेष मांग है।
पर्व का है विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य कृष्ण के शर्मा के अनुसार छठ पूजा का सनातन धर्म में बड़ा ही धार्मिक महत्व है। इस पर्व पर व्रती भगवान सूर्य और छठ माता से प्रार्थना करते हैं और उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं। साथ ही लोग सूर्य के प्रति अपना सम्मान और आभार भी व्यक्त करते हैं, क्योंकि वो सभी जीवित प्राणियों को प्रकाश, सकारात्मकता और जीवन प्रदान करते हैं। माना जाता है कि यह त्योहार कृषि समाज में सूर्य के महत्व का प्रतीक है, जो जीवन और जीविका के चक्र का प्रतिनिधित्व करता है। कई मायनों में यह त्योहार सूर्य की जीवनदायी ऊर्जा के प्रति कृतज्ञता पर जोर देता है, जो फसल की वृद्धि और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। वेदों में सूर्य के कई संदर्भ हैं, जो प्राचीन संस्कृतियों में सूर्य के प्रति स्वास्थ्य और धन के देवता के रूप में श्रद्धा को दर्शाते हैं। त्योहार का समय फसल के मौसम के अनुरूप होता है, जो भरपूर पैदावार के लिए आभार व्यक्त करने का समय होता है। संवाद
विज्ञापन
शहर में कई स्थानों पर सामूहिक छठ पूजा का आयोजन होता है। दोहरा रोड स्थित सनराइज कॉलोनी की निवासी रिंकी वर्मा बताती हैं कि स्थानीय लोग भी इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं। इस दौरान उनकी कॉलोनी में एक घर में ही छठ पर्व का आयोजन किया जाता है। छत पर टब रखकर सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया जाता है। इस अवसर पर शाम को सभी कॉलोनीवासी छत पर एकत्रित होकर पूजा करते हैं और भजनों का आयोजन होता है।
विज्ञापन
बुधवार को खरना होगा। इस दिन शाम को गुड़ और चावल की खीर बनाकर उसका भोग लगाया जाएगा। बृहस्पतिवार को महिलाएं निर्जला व्रत रखकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी और शुक्रवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर संतान और परिवार के लिए मंगल कामना करेंगी। इस अवसर पर रुहेलखंड विश्वविद्यालय स्थित श्री शिव शक्ति पीठ मंदिर, इज्जतनगर स्थित श्री शिव पार्वती मंदिर, धोपेश्वरनाथ मंदिर समेत अन्य स्थानों पर भव्य सजावट की गई।
विज्ञापन
सूप और डाला की बढ़ी मांग
बाजार में सूप-डाला की जमकर खरीदारी हो रही है। बाजार में सूप 250 से 300 रुपये तक और डाला 300 से 400 रुपये तक में बिक रहे है। सब्जियों में मूली, लोबिया फली, कद्दू और फलों में सेब, केले की भी विशेष मांग है।
पर्व का है विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य कृष्ण के शर्मा के अनुसार छठ पूजा का सनातन धर्म में बड़ा ही धार्मिक महत्व है। इस पर्व पर व्रती भगवान सूर्य और छठ माता से प्रार्थना करते हैं और उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं। साथ ही लोग सूर्य के प्रति अपना सम्मान और आभार भी व्यक्त करते हैं, क्योंकि वो सभी जीवित प्राणियों को प्रकाश, सकारात्मकता और जीवन प्रदान करते हैं। माना जाता है कि यह त्योहार कृषि समाज में सूर्य के महत्व का प्रतीक है, जो जीवन और जीविका के चक्र का प्रतिनिधित्व करता है। कई मायनों में यह त्योहार सूर्य की जीवनदायी ऊर्जा के प्रति कृतज्ञता पर जोर देता है, जो फसल की वृद्धि और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। वेदों में सूर्य के कई संदर्भ हैं, जो प्राचीन संस्कृतियों में सूर्य के प्रति स्वास्थ्य और धन के देवता के रूप में श्रद्धा को दर्शाते हैं। त्योहार का समय फसल के मौसम के अनुरूप होता है, जो भरपूर पैदावार के लिए आभार व्यक्त करने का समय होता है। संवाद