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लिलौर झील घोटाले पर शासन ने बैठाई जांच

Fri, 05 May 2017 01:21 AM IST
बरेली।  
बरेली।   Updated Fri, 05 May 2017 01:21 AM IST
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Lilor lake scandal ruled by government
Lilor lake scandal ruled by government - फोटो : बरेली, अमर उजाला
महाभारतकालीन लिलौर झील के सुंदरीकरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आने के बाद शासन ने दो सदस्यीय जांच कमेटी बना दी है। अगले हफ्ते जांच टीम झील का मौका मुआयना करेगी। प्रमुख सचिव सिंचाई ने झील का निरीक्षण करने के बाद खुद घपले की बात स्वीकार की थी। 14 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट में झील से मिट्टी निकासी की टेंडर प्रक्रिया से लेकर काम कराने तक में बड़े घोटाले की बात सामने आ रही है। 
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प्रमुख सचिव सिंचाई सुरेश चंद्रा ने पांच दिन पहले लिलौर झील का मौके पर जाकर निरीक्षण किया था। उन्होंने सुंदरीकरण के काम को असंतोषजनक बताते हुए घोटाले की बात स्वीकार की थी। लखनऊ पहुंचते ही प्रमुख सचिव ने लेबिल वन और लेबिल टू के दो अधिकारियों की जांच कमेटी गठित कर दी। ये कमेटी अगले हफ्ते बरेली पहुंचकर लिलौर झील की पत्रावलियां खंगालेगी और मौके पर जाकर भी जांच करेगी। लिलौर झील में मिट्टी निकासी और बांध बनाने के काम एक्सईएन रामबहादुर यादव के अलावा एसडीओ पीके सक्सेना और हरिश्चंद्र वर्मा, एई आशीष रंजन, शरद कुमार गुप्ता, आदेश कुमार, कौशल किशोर वर्मा के अलावा जेई अरविंद कुमार और दीपक कुमार की देखरेख में हुए। इनमें एसडीओ पीके सक्सेना और हरिश्चंद्र वर्ता रिटायर हो चुके हैं। शरद कुमार गुप्ता, आदेश कुमार और कौशल किशोर वर्मा जून और जुलाई में रिटायर होने वाले हैं। 
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बता दें कि सपा सरकार में महाभारतकालीन लिलौर झील के सुंदरीकरण का काम स्वीकृत किया गया था। 14 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट के लिए सिंचाई खंड को 8.38 करोड़ बजट किस्तों में आवंटित किया गया था। बाकी बजट में उद्यान विभाग को सौंदर्यीकरण, वन विभाग को पेड़ लगाने, विद्युत निगम को लाइटें लगाने और पीडब्ल्यूडी को गेस्ट हाउस बनाने का काम करना था। सिंचाई खंड ने अपना पूरा बजट मिट्टी निकासी और बांध निर्माण पर खर्च कर डाला। इसमें अधिकांश बजट का दुरुपयोग हुआ। राजनीतिक दबाव में झील से मिट्टी निकासी के  टेंडर एटा, मैनपुरी और इटावा के ठेकेदारों को मिले। इसका उस समय अन्य ठेकेदारों ने जबरदस्त विरोध भी किया था। 
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कोट--
लिलौर झील में सिंचाई खंड ने अपना काम करा दिया है। पीडब्ल्यूडी, विद्युत निगम, उद्यान और वन विभाग ने कोई काम नहीं कराया। शासन ने दो सदस्यीय जांच कमेटी बना दी है। इसलिए अब इस मामले पर हमें कुछ नहीं कहना है-  रामबहादुर यादव, एक्सईएन सिंचाई खंड 
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