{"_id":"5d27927d8ebc3e6d16351f24","slug":"light-bareilly-news-bly3682534136","type":"story","status":"publish","title_hn":"यह बरेली शहर खतरों का शहर है..","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यह बरेली शहर खतरों का शहर है..
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बरेली। अफसरों की अनदेखी और सिस्टम की उदासीनता से शहर में जगह-जगह आम जनता की जिंदगी दांव पर लगी है। शहर के तमाम इलाकों में जलभराव से संक्रामक बीमारियां फैलने की स्थिति बन गई है और यहां के निवासियों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। वहीं, आधे-अधूरे निर्माण राहगीरों के लिए खतरा बन गए हैं। मगर अफसर आपसी लड़ाई और कागजी आंकड़े बनाने में उलझे हैं। ऐसे में बरेली शहर खतरों का शहर बन गया है।
तमाम इलाके डूबे... अफसर आंकड़ों की बाजीगरी में व्यस्त
सिकलापुर में दो दिन और हजियापुर में सप्ताह भर से नहीं निकला पानी
बरेली। नाला सफाई व्यवस्था दुरुस्त न होने से शहर के तमाम इलाकों में कई दिन से जलभराव है। हजियापुर में करीब सप्ताह भर से पानी नहीं निकला है। यहां के लोग इसी पानी में रहने को मजबूर हैं, जिसके चलते संक्रामक बीमारियों का खतरा पैदा हो गया है। वहीं, सिकलापुर में मुख्य मार्ग पर दो दिन से जलभराव है, लेकिन नगर निगम सिर्फ आंकड़े की बाजीगरी में व्यस्त है।
जलभराव के चलते संजयनगर का संपवेल पूरी तरह से पानी में डूब गया है और ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है। बताया जाता है कि बृहस्पतिवार को यह बिल्कुल नहीं चला। इसके चलते हजियापुर का पानी निकलना ही बंद हो गया। मुख्य मार्ग और उसके आसपास का पूरा इलाका जलमग्न हो गया है। कुछ इलाके में पांच-छह फुट तक पानी भरा है। इसके चलते लोग छतों पर टीन और पन्नी डालकर गुजारा कर रहे हैं। यहां आश्रयगृह में भी पानी भरा है, जिससे लोग वहां भी सहारा नहीं पा सकते। पार्षद रईस मियां अब्बासी का कहना है कि पिछले साल से भी ज्यादा खराब हाल है। लोग गंदे पानी से गुजर रहे हैं, घरों में भी गंदा पानी भरा है, जिससे संक्रामक बीमारियाें का खतरा हो गया है।
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गंदे पानी से निकलने को मजबूर लोग
सिकलापुर में साहू गोपीनाथ इंटर कॉलेज के पास दो दिन से पानी भरा हुआ है। यहां पर नाला नहीं है और पानी सीवर लाइन से होकर निकलता है, इसके चलते ही यहां दो दिन से पानी भरा हुआ है। इससे आगे लाल मस्जिद वाली गली में भी कई दिन से पानी भरा हुआ है।
शांतिविहार में भी कई दिन से जलभराव
संत गाडके नगर शांति विहार में कई दिन से जलभराव है। यहां के निचले इलाकों में भी कई फुट तक पानी भरा हुआ है और लोग इसी गंदे पानी से निकलने को मजबूर हैं। कुछ लोगों ने मिट्टी डालकर रास्ता बना लिया है तो वे दूसरों को वहां से नहीं निकलने दे रहे हैं।
शाम को हुई बारिश से फिर कई इलाके जलमग्न
बृहस्पतिवार देर शाम हुई बारिश से शहर के फिर कई इलाके जलमग्न हो गए। सुभाषनगर पुलिया में पानी भर गया, राजेंद्रनगर में ए ब्लॉक की कुछ गलियों में भी जलभराव हुआ। संजयनगर के मुख्य मार्ग और पुराना शहर के तमाम इलाकों में भी जलभराव हुआ।
‘मैं तो तीन महीने से लगातार कह रहा हूं कि नाला सफाई में भ्रष्टाचार हो रहा है। अगर ऐसा नहीं होता तो जलभराव भी नहीं होता। पिछले साल इससे ज्यादा बारिश हुई थी, तब भी इतना पानी नहीं भरा। इस बार तो अभी बारिश शुरू ही हुई है, आगे और खराब हाल होगा। मामले से शासन को अवगत कराया जाएगा।’
- उमेश गौतम, मेयर
सेटेलाइट फ्लाईओवर- सेतु निगम-वन विभाग की खींचतान में जिंदगी दांव
बरेली। सेतु निगम और वन विभाग की खींचतान से सेटेलाइट पर राहगीरों की जिंदगी दांव पर लग गई है। वन विभाग ने सर्विस लेन बनाने के लिए अनुमति नहीं दी है और सेतु निगम ने मिट्टी-बजरी डालकर उसे सड़क के बराबर कर दिया है। इसके चलते बारिश में यहां बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं और जलभराव से नाला व सड़क एक होने से खतरे की स्थिति बन गई है।
सेटेलाइट चौराहे पर शाहजहांपुर की तरफ से आने-जाने वाली बसों के अलावा शहर के ट्रैफिक का भी काफी दबाव रहता है। बावजूद इसके सेतु निगम ने यहां सर्विस लेन बनाए बगैर फ्लाईओवर का काम शुरू कर दिया है। ईसाईयों की पुलिया से चौराहे तक रोड चौड़ी होने से दिक्कत तो नहीं हुई, लेकिन चौराहे से कैंट की ओर निर्माण शुरू होने से ट्रैफिक के निकलने की समस्या पैदा हो गई है। यहां रोड कम चौड़ा होने के कारण सेतु निगम ने सड़क के दोनों ओर सर्विस लेन बनाने की कोशिश की। इसके लिए मिट्टी और बजरी का पटान भी कराया गया। कोलतार की लेयर बिछाई जाती उससे पहले ही वन विभाग की टीम ने आपत्ति लगा दी कि एनओसी के बाद ही कोई काम किया जाए। कुछ दिन पहले वन विभाग का स्टाफ सेतु निगम की मशीनें तक उठा ले गया था। बाद में प्रशासन के एक उच्चाधिकारी के दबाव के बाद इन मशीनों को छोड़ा गया था। उधर, बारिश से सर्विस लेन की हालत दिनोंदिन खराब होती जा रही है। जगह-जगह पर मिट्टी धंस जाने से उसमें गहरे गड्ढे हो गए हैं। इस महत्वपूर्ण हाईवे पर कीचड़ होने से वाहनों के फिसलने का खतरा भी बना हुआ है। जलभराव होने से भी राहगीरों को खतरा पैदा हो गया है।
सड़क पर अंधेरा और बजरी का ढेर
हाईवे पर यहां सड़क पर ही दो बड़े-बड़े बजरी के ढेर लगा दिए गए हैं। इसके अलावा रात में लाइट का भी यहां कोई इंतजाम हीं है, जिसकेके चलते रात में हादसे की आशंका और ज्यादा बढ़ गई है।
बारिश ने रोका आईवीआरआई अंडरपास का काम
आईवीआरआई क्रॉसिंग पर रेलवे को अंडरपास बनाना था। कमिश्नर के आदेश थे कि 15 जून से पहले रेलवे के अधिकारी इस काम को पूरा कर लें, ताकि मानसून सीजन के दौरान लोगों को यहां से आवागमन में कोई परेशानी न हो। इसके लिए रेलवे ने करीब 11 करोड़ का कांट्रेक्ट एक कंपनी को दिया भी था, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। दो दिन में तेज बारिश से अंडरपास में पानी भर जाने से निर्माण का काम ठप पड़ा है। बृहस्पतिवार को भी अंडरपास का काम नहीं हुआ। मशीनें वहीं खड़ी रहीं।
सेटेलाइट फ्लाईओवर के पास सर्विस लेन की मरम्मत जल्द ही कराई जाएगी। इसको पक्का करने के लिए वन विभाग से एनओसी मिलने का इंतजार है। यह सही है कि बारिश होने से दूसरे ओवरब्रिज के काम भी प्रभावित हो रहे हैं।
-वीके सेन, डीपीएम, सेतु निगम
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तमाम इलाके डूबे... अफसर आंकड़ों की बाजीगरी में व्यस्त
सिकलापुर में दो दिन और हजियापुर में सप्ताह भर से नहीं निकला पानी
बरेली। नाला सफाई व्यवस्था दुरुस्त न होने से शहर के तमाम इलाकों में कई दिन से जलभराव है। हजियापुर में करीब सप्ताह भर से पानी नहीं निकला है। यहां के लोग इसी पानी में रहने को मजबूर हैं, जिसके चलते संक्रामक बीमारियों का खतरा पैदा हो गया है। वहीं, सिकलापुर में मुख्य मार्ग पर दो दिन से जलभराव है, लेकिन नगर निगम सिर्फ आंकड़े की बाजीगरी में व्यस्त है।
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जलभराव के चलते संजयनगर का संपवेल पूरी तरह से पानी में डूब गया है और ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है। बताया जाता है कि बृहस्पतिवार को यह बिल्कुल नहीं चला। इसके चलते हजियापुर का पानी निकलना ही बंद हो गया। मुख्य मार्ग और उसके आसपास का पूरा इलाका जलमग्न हो गया है। कुछ इलाके में पांच-छह फुट तक पानी भरा है। इसके चलते लोग छतों पर टीन और पन्नी डालकर गुजारा कर रहे हैं। यहां आश्रयगृह में भी पानी भरा है, जिससे लोग वहां भी सहारा नहीं पा सकते। पार्षद रईस मियां अब्बासी का कहना है कि पिछले साल से भी ज्यादा खराब हाल है। लोग गंदे पानी से गुजर रहे हैं, घरों में भी गंदा पानी भरा है, जिससे संक्रामक बीमारियाें का खतरा हो गया है।
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गंदे पानी से निकलने को मजबूर लोग
सिकलापुर में साहू गोपीनाथ इंटर कॉलेज के पास दो दिन से पानी भरा हुआ है। यहां पर नाला नहीं है और पानी सीवर लाइन से होकर निकलता है, इसके चलते ही यहां दो दिन से पानी भरा हुआ है। इससे आगे लाल मस्जिद वाली गली में भी कई दिन से पानी भरा हुआ है।
शांतिविहार में भी कई दिन से जलभराव
संत गाडके नगर शांति विहार में कई दिन से जलभराव है। यहां के निचले इलाकों में भी कई फुट तक पानी भरा हुआ है और लोग इसी गंदे पानी से निकलने को मजबूर हैं। कुछ लोगों ने मिट्टी डालकर रास्ता बना लिया है तो वे दूसरों को वहां से नहीं निकलने दे रहे हैं।
शाम को हुई बारिश से फिर कई इलाके जलमग्न
बृहस्पतिवार देर शाम हुई बारिश से शहर के फिर कई इलाके जलमग्न हो गए। सुभाषनगर पुलिया में पानी भर गया, राजेंद्रनगर में ए ब्लॉक की कुछ गलियों में भी जलभराव हुआ। संजयनगर के मुख्य मार्ग और पुराना शहर के तमाम इलाकों में भी जलभराव हुआ।
‘मैं तो तीन महीने से लगातार कह रहा हूं कि नाला सफाई में भ्रष्टाचार हो रहा है। अगर ऐसा नहीं होता तो जलभराव भी नहीं होता। पिछले साल इससे ज्यादा बारिश हुई थी, तब भी इतना पानी नहीं भरा। इस बार तो अभी बारिश शुरू ही हुई है, आगे और खराब हाल होगा। मामले से शासन को अवगत कराया जाएगा।’
- उमेश गौतम, मेयर
सेटेलाइट फ्लाईओवर- सेतु निगम-वन विभाग की खींचतान में जिंदगी दांव
बरेली। सेतु निगम और वन विभाग की खींचतान से सेटेलाइट पर राहगीरों की जिंदगी दांव पर लग गई है। वन विभाग ने सर्विस लेन बनाने के लिए अनुमति नहीं दी है और सेतु निगम ने मिट्टी-बजरी डालकर उसे सड़क के बराबर कर दिया है। इसके चलते बारिश में यहां बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं और जलभराव से नाला व सड़क एक होने से खतरे की स्थिति बन गई है।
सेटेलाइट चौराहे पर शाहजहांपुर की तरफ से आने-जाने वाली बसों के अलावा शहर के ट्रैफिक का भी काफी दबाव रहता है। बावजूद इसके सेतु निगम ने यहां सर्विस लेन बनाए बगैर फ्लाईओवर का काम शुरू कर दिया है। ईसाईयों की पुलिया से चौराहे तक रोड चौड़ी होने से दिक्कत तो नहीं हुई, लेकिन चौराहे से कैंट की ओर निर्माण शुरू होने से ट्रैफिक के निकलने की समस्या पैदा हो गई है। यहां रोड कम चौड़ा होने के कारण सेतु निगम ने सड़क के दोनों ओर सर्विस लेन बनाने की कोशिश की। इसके लिए मिट्टी और बजरी का पटान भी कराया गया। कोलतार की लेयर बिछाई जाती उससे पहले ही वन विभाग की टीम ने आपत्ति लगा दी कि एनओसी के बाद ही कोई काम किया जाए। कुछ दिन पहले वन विभाग का स्टाफ सेतु निगम की मशीनें तक उठा ले गया था। बाद में प्रशासन के एक उच्चाधिकारी के दबाव के बाद इन मशीनों को छोड़ा गया था। उधर, बारिश से सर्विस लेन की हालत दिनोंदिन खराब होती जा रही है। जगह-जगह पर मिट्टी धंस जाने से उसमें गहरे गड्ढे हो गए हैं। इस महत्वपूर्ण हाईवे पर कीचड़ होने से वाहनों के फिसलने का खतरा भी बना हुआ है। जलभराव होने से भी राहगीरों को खतरा पैदा हो गया है।
सड़क पर अंधेरा और बजरी का ढेर
हाईवे पर यहां सड़क पर ही दो बड़े-बड़े बजरी के ढेर लगा दिए गए हैं। इसके अलावा रात में लाइट का भी यहां कोई इंतजाम हीं है, जिसकेके चलते रात में हादसे की आशंका और ज्यादा बढ़ गई है।
बारिश ने रोका आईवीआरआई अंडरपास का काम
आईवीआरआई क्रॉसिंग पर रेलवे को अंडरपास बनाना था। कमिश्नर के आदेश थे कि 15 जून से पहले रेलवे के अधिकारी इस काम को पूरा कर लें, ताकि मानसून सीजन के दौरान लोगों को यहां से आवागमन में कोई परेशानी न हो। इसके लिए रेलवे ने करीब 11 करोड़ का कांट्रेक्ट एक कंपनी को दिया भी था, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। दो दिन में तेज बारिश से अंडरपास में पानी भर जाने से निर्माण का काम ठप पड़ा है। बृहस्पतिवार को भी अंडरपास का काम नहीं हुआ। मशीनें वहीं खड़ी रहीं।
सेटेलाइट फ्लाईओवर के पास सर्विस लेन की मरम्मत जल्द ही कराई जाएगी। इसको पक्का करने के लिए वन विभाग से एनओसी मिलने का इंतजार है। यह सही है कि बारिश होने से दूसरे ओवरब्रिज के काम भी प्रभावित हो रहे हैं।
-वीके सेन, डीपीएम, सेतु निगम