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Bareilly News: जीवन सीखने का सिलसिला है... जिज्ञासा दे रही उम्र को मात
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बरेली। जीवन सीखने का सिलसिला है। कुछ भी नया शुरू या अनुभव करने की कोई उम्र नहीं होती। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में इसके उदाहरण मिल रहे हैं। सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी और व्यवसायी अपनी जिज्ञासा से उम्र को मात देते हुए अन्य विद्यार्थियों के लिए मिसाल पेश कर रहे हैं।
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद कानून के क्षेत्र में किया रुख
कर्नल रविंद्र मान (59) वर्ष 2021 में सेना से सेवानिवृत्त हुए। सेना में रहते हुए उन्होंने बतौर ग्रुप टेस्टिंग ऑफिसर 32 साल तक अपनी सेवाएं दीं। 54 साल की उम्र में रिटायमेंट हुआ। खाली न बैठकर कुछ-न-कुछ सीखते रहने की ललक उनको नई चुनौतियों की ओर ले गई। उन्होंने कानून की राह चुनी। उनके मुताबिक, इसके लिए रुविवि से वर्ष 2023 से 2025 तक एलएलएम की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद 2025 में ही यूजीसी नेट की परीक्षा उत्तीर्ण की। फिलहाल विवि से ही विधि में पीएचडी कर रहे हैं।
स्वावलंबन के लिए की पढ़ाई
अग्रिम गुप्ता (39) ने अपने बिजनेस में आने वाली कानूनी उलझनों को खुद ही सुलझाने के मकसद से कानून की पढ़ाई की। साल 2008 में एमबीए, 2023 में एलएलबी और 2025 में रुविवि से एलएलएम की डिग्री हासिल की। न्यूयॉर्क से चार्टर्ड वेल्थ मैनेजर का कोर्स भी किया है। उनकी खुद की वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी है। उनके मुताबिक, उनके पास अधिकतर मामले पारिवारिक और आवासीय विवादों से जुड़े आते हैं। कानूनी समझ के आधार पर वह उनको बेहतर ढंग से सुलझा पाते हैं।
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ऐसे संजीदा और अनुभवी विद्यार्थी अकादमिक माहौल को नई ऊर्जा देते हैं। कर्नल रविंद्र मान और अग्रिम गुप्ता जैसे विद्यार्थियों का उम्र के इस पड़ाव पर भी उच्च शिक्षा से जुड़े रहना यह साबित करता है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। उनका यह समर्पण और लगन अन्य युवा विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्त्रोत है, जो सिखाता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से हर मुकाम हासिल किया जा सकता है। - प्रो. अमित सिंह, विभागाध्यक्ष विधि विभाग
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सेना से सेवानिवृत्ति के बाद कानून के क्षेत्र में किया रुख
कर्नल रविंद्र मान (59) वर्ष 2021 में सेना से सेवानिवृत्त हुए। सेना में रहते हुए उन्होंने बतौर ग्रुप टेस्टिंग ऑफिसर 32 साल तक अपनी सेवाएं दीं। 54 साल की उम्र में रिटायमेंट हुआ। खाली न बैठकर कुछ-न-कुछ सीखते रहने की ललक उनको नई चुनौतियों की ओर ले गई। उन्होंने कानून की राह चुनी। उनके मुताबिक, इसके लिए रुविवि से वर्ष 2023 से 2025 तक एलएलएम की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद 2025 में ही यूजीसी नेट की परीक्षा उत्तीर्ण की। फिलहाल विवि से ही विधि में पीएचडी कर रहे हैं।
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स्वावलंबन के लिए की पढ़ाई
अग्रिम गुप्ता (39) ने अपने बिजनेस में आने वाली कानूनी उलझनों को खुद ही सुलझाने के मकसद से कानून की पढ़ाई की। साल 2008 में एमबीए, 2023 में एलएलबी और 2025 में रुविवि से एलएलएम की डिग्री हासिल की। न्यूयॉर्क से चार्टर्ड वेल्थ मैनेजर का कोर्स भी किया है। उनकी खुद की वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी है। उनके मुताबिक, उनके पास अधिकतर मामले पारिवारिक और आवासीय विवादों से जुड़े आते हैं। कानूनी समझ के आधार पर वह उनको बेहतर ढंग से सुलझा पाते हैं।
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ऐसे संजीदा और अनुभवी विद्यार्थी अकादमिक माहौल को नई ऊर्जा देते हैं। कर्नल रविंद्र मान और अग्रिम गुप्ता जैसे विद्यार्थियों का उम्र के इस पड़ाव पर भी उच्च शिक्षा से जुड़े रहना यह साबित करता है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। उनका यह समर्पण और लगन अन्य युवा विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्त्रोत है, जो सिखाता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से हर मुकाम हासिल किया जा सकता है। - प्रो. अमित सिंह, विभागाध्यक्ष विधि विभाग