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लीलौर झील के पानी में मिले हैवी मेटल्स
बरेली।
Updated Tue, 16 May 2017 01:52 AM IST
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Lake of Lake Lake Heavy metals found in
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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पानी को तरस रही आंवला रामनगर स्थित लीलौर झील में हैवी मेटल्स हैं। इसका कारण बन रहा है प्रदूषण, जो झील का पानी पीने वाले जीव जंतुओं के लिए काल भी बन सकता है। बरेली कॉलेज के जुलॉजी विभाग के डॉ. राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में रिसर्च स्कालर्स की टीम ने फरवरी में इस झील के पानी के सैंपल लिए थे। लैब में परीक्षण के बाद इन हैवी मेटल्स की स्थिति सामने आई है। सबसे खतरनाक लेड की मात्रा मिली है। झीलों पर पीएचडी कर रही रिसर्च स्कालर अमृता सिंह के अनुसार डब्ल्यूएचओ के अनुसार पानी में लेड की मात्रा 0.10 तक हो तो कोई नुकसान नहीं, जबकि लीलौर झील के पानी में 1.355 एमजी/ली. मिला। कॉपर की मात्रा का मानक 0.05 एमजी/ली. है, जबकि यहां 0.882 मिली। जिंक की मात्रा 2.480 जोकि मानकों के अनुसार ठीक है।
जलीय जीवों के लिए ऑक्सीजन नहीं
पानी में जलीय जीवों के लिए पानी में बायोलॉजीकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) की ज्यादा आवश्यकता होती है, पर लीलौर झील के पानी में इसकी मात्रा महज 1.661 एमजी/लीटर ही मिली। डिजाल्व ऑक्सीजन की मात्रा 6.7 एमजी/लीटर मिली। पीएच 7 और हार्डनेस 123 एमजी/लीटर मिली, इसकी स्थिति को ठीक कहा जा सकता है। पानी के साथ यह हैवी मेटल्स जीव जंतुओं और पशु पक्षियों में भी पहुंच सकते हैं।
पश्चिमी यूपी के पांच शहरों की झील पर शोध
इंपैक्ट एंड असेसमेंट ऑफ हैवी मेटल्स ऑफ लैक (झील) ऑफ वेस्टर्न यूपी टॉपिक पर पीएचडी कर रहीं अमृता सिंह ने बताया कि बरेली के साथ मेरठ, अलीगढ़, गाजियाबाद, पीलीभीत में एक-एक झील को चुना है। इन झीलों में हैवी मेटल्स की मात्रा क्या है और उसका जलीय जीवों पर क्या असर पड़ रहा है उसका अध्ययन करना है। बरेली की लीलौर झील के जो रिजल्ट सामने आए हैं वो चिंताजनक हैं। पानी में हैवी मेटल्स का पनपना घातक साबित हो सकता है। डॉ. राजेंद्र सिंह बताते हैं इसका असर पास पड़ोस में रहने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है क्योंकि यह मेटल्स पानी के जरिये फसल, जानवर, मछलियों में भी पहुंच सकते हैं।
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जलीय जीवों के लिए ऑक्सीजन नहीं
पानी में जलीय जीवों के लिए पानी में बायोलॉजीकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) की ज्यादा आवश्यकता होती है, पर लीलौर झील के पानी में इसकी मात्रा महज 1.661 एमजी/लीटर ही मिली। डिजाल्व ऑक्सीजन की मात्रा 6.7 एमजी/लीटर मिली। पीएच 7 और हार्डनेस 123 एमजी/लीटर मिली, इसकी स्थिति को ठीक कहा जा सकता है। पानी के साथ यह हैवी मेटल्स जीव जंतुओं और पशु पक्षियों में भी पहुंच सकते हैं।
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पश्चिमी यूपी के पांच शहरों की झील पर शोध
इंपैक्ट एंड असेसमेंट ऑफ हैवी मेटल्स ऑफ लैक (झील) ऑफ वेस्टर्न यूपी टॉपिक पर पीएचडी कर रहीं अमृता सिंह ने बताया कि बरेली के साथ मेरठ, अलीगढ़, गाजियाबाद, पीलीभीत में एक-एक झील को चुना है। इन झीलों में हैवी मेटल्स की मात्रा क्या है और उसका जलीय जीवों पर क्या असर पड़ रहा है उसका अध्ययन करना है। बरेली की लीलौर झील के जो रिजल्ट सामने आए हैं वो चिंताजनक हैं। पानी में हैवी मेटल्स का पनपना घातक साबित हो सकता है। डॉ. राजेंद्र सिंह बताते हैं इसका असर पास पड़ोस में रहने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है क्योंकि यह मेटल्स पानी के जरिये फसल, जानवर, मछलियों में भी पहुंच सकते हैं।
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