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साहब ! पैर सूज गए हैं, अब नहीं चला जाता... घर भिजवा दो
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बरेली। लॉकडाउन में मालिक ने जब खाना देने से भी मना कर दिया तो बिहार के लिए पैदल निकले मजदूरों की हिम्मत बरेली आते-आते जवाब दे गई। कई लोगों के पैर सूज गए तो कुछ की तबीयत भी खराब हो गई थी। एक महिला दुधमुंह बच्चे को लेकर गोद में लेकर आ रही थी। कलक्ट्रेट पहुंचे प्रवासी मजदूर डीएम से बोले.. साहब कैसे भी हमें घर भिजवा दो। फिलहाल मजदूरों को शेल्टर होम भिजवा दिया गया है।
कलकट्रेट पहुंचे बिहार के मजदूरों को कहना था कि वह अलीगढ़ में एक फैक्ट्री में काम करते थे। मालिक का कहना था कि वह उनकी मदद नहीं कर सकता। इसके बाद मजदूर पैदल ही मीलों दूर बिहार के लिए पैदल की चल पड़े। उनका कहना था कि वह कासगंज में अधिकारियों से मिले थे मगर उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। बरेली आते-आते हिम्मत टूट चुकी है। इसके आगे अब एक भी कदम नहीं चला जाता। कलक्ट्रेट पहुंचे इन मजदूरों डीएम नितीश कुमार से बोले कि उन्हें किसी तरह से उन्हें बिहार भिजवा दिया जाए। डीएम ने मजदूरों को आश्वस्त किया कि उनकी पूरी मदद होगी। कलक्ट्रेट के कुछ कर्मचारियों ने इंसानियत दिखाते हुए भूखे-थके प्रवासी मजदूरों को फल लाकर भी खिलाए।
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कलकट्रेट पहुंचे बिहार के मजदूरों को कहना था कि वह अलीगढ़ में एक फैक्ट्री में काम करते थे। मालिक का कहना था कि वह उनकी मदद नहीं कर सकता। इसके बाद मजदूर पैदल ही मीलों दूर बिहार के लिए पैदल की चल पड़े। उनका कहना था कि वह कासगंज में अधिकारियों से मिले थे मगर उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। बरेली आते-आते हिम्मत टूट चुकी है। इसके आगे अब एक भी कदम नहीं चला जाता। कलक्ट्रेट पहुंचे इन मजदूरों डीएम नितीश कुमार से बोले कि उन्हें किसी तरह से उन्हें बिहार भिजवा दिया जाए। डीएम ने मजदूरों को आश्वस्त किया कि उनकी पूरी मदद होगी। कलक्ट्रेट के कुछ कर्मचारियों ने इंसानियत दिखाते हुए भूखे-थके प्रवासी मजदूरों को फल लाकर भी खिलाए।
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