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दूल्हा बन घोड़ी पर चढ़कर नामांकन कराने पहुंचे किशन, धरती पकड़ के नाम से जानते हैं शाहजहांपुर के लोग
Tue, 09 Apr 2019 12:03 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शाहजहांपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शाहजहांपुर
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 09 Apr 2019 12:03 AM IST
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निर्दलीय नेता किशन लाल
- फोटो : अमर उजाला
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चुनाव में नामांकन के लिए अलग-अलग गेटअप अपनाकर जनता का ध्यानाकर्षण करने वाले निर्दलीय किशन लाल ने इस बार शादी की सालगिरह पर दूल्हे का वेश धारण किया और मोहल्ला हुंडालखेल स्थित आवास से घोड़ी पर चढ़कर बाकायदा बैंड-बाजा और बरात लेकर नामांकन कराने को चले। चुनावी रंग में रंगी यह बरात जिधर से गुजरी, लोगों के कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बन गई।
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खास यह है कि किशन लाल को चुनाव लड़ने का चस्का करीब तीन दशक पहले लगा था, जब वह शहर के एक सिनेमाहाल से बतौर एनाउंसर जुड़कर प्रदर्शित होने वाली फिल्मों का रिक्शे से प्रचार किया करते थे। उन्होंने पहला चुनाव शहर की नगरपालिका से अपने मोहल्ले की वार्ड मेंबरी के लिए लड़ा था। चुनाव हारकर भी जनता से उन्होंने मेलजोल कम नहीं किया और आगे भी चुनाव लड़ने का सिलसिला जारी रखा। शहर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय के तौर पर नामांकन कराया। तब से तीन बार लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं।
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हर बार नामांकन कराने और बाद में वोट मांगने का उनका अंदाज भी पहले से जुदा रहा। इससे पहले के चुनावों में वह एक बार भ्रष्टाचार का खात्मा करने का शंखनाद कर यमराज के रूप में भैंसा पर सवारी गांठकर कलक्ट्रेट गेट पर पहुंचे तो दोबारा भ्रष्टाचार से मरणासन्न जनता का प्रतीक बनकर अर्थी पर अपनी ही शवयात्रा लेकर नामांकन कराने पहुंच गए थे। क्षेत्र के लोग इन्हें शाहजहांपुर का धरती पकड़ भी कहते हैं।
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इस बार दूल्हा और बारात की थीम चुनने की वजह पूछने पर प्रत्याशी किशन लाल ने बताया कि वर्ष 1986 में आज ही के दिन उनका विवाह हुआ था और शादी के उन पलों की यादें ताजा करने को दूल्हे के रूप में नामांकन कराने गए। जो भी हो, उनके घर से बरात धूमधाम से उठी। फर्क सिर्फ इतना रहा कि बराती बैंड-बाजों पर थिरकने के साथ नारे लगाते हुए उनके साथ चले। घंटाघर और बहादुरगंज होकर सदर थाना के सामने पहुंची बरात का बैंड बाजा पुलिस ने रोक लिया, लेकिन दूल्हे राजा को घोड़ी से उतारे बगैर उन्हें आगे बढ़ने की इजाजत दे दी। कलक्ट्रेट के बैरियर पर उन्हें घोड़ी छोड़नी पड़ गई और वहां से बराती बने प्रस्तावकों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे।