जिले के पांच लाख किसानों को
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जिले में एक विसवां जमीन वाले किसान भी इस योजना का लाभ पाएंगे। इस श्रेणी के करीब पांच लाख किसान जिले में हैं। इनकी खतौनी खसरा का डाटा प्रशासन के पास मौजूद है। इन सभी के बीमा प्रीमियम की राशि करीब 1.26 करोड़ बनती है, जो बीमा कंपनी को दे दी गई है। साल भर किसानों के आकस्मिक निधन के बाद विधिक प्रक्रिया पूरी करने पर आश्रितों को बीमा धन दिया जाएगा।
सड़क दुर्घटना, खेत में काम करते वक्त किसी हादसे, बिजली के करंट से, गोली लगने से, सांप काटने से हुई मौत आदि मामलों में किसानों के आश्रितों को लाभ मिलता है। सामान्य मौत, आत्महत्या और आपराधिक गतिविधि में लिप्त होने से हुई मौत में लाभ नहीं मिलता। लाभ लेने के लिए मृत्यु के मामले की पुलिस रिपोर्ट और शव का पोस्टमार्टम जरूरी है। मृत्यु के एक महीने के अंदर तहसीलदार के यहां आवेदन करना होता है।
बरेली के 56 किसानों को ही मिला लाभ
जागरूकता के अभाव में किसान परिवारों को शासन की इस योजना का लाभ नहीं मिल पाता। जिले में पिछले साल केवल 56 किसानों के आश्रितों ने ही यह लाभ लिया था। जबकि बड़ी संख्या में हर साल किसान हादसों का शिकार होते हैं। घरवाले बिना कानूनी कार्रवाई के इनके शव की अंत्येष्टि कर देते हैं और लाभ का रास्ता बंद हो जाता है।
जागरूकता का होगा प्रयास
शासन के निर्देश हैं कि किसान गोष्ठियों व अन्य माध्यमों से किसानों तक दुर्घटना बीमा योजना के बारे में जागरूक किया जाए। प्रशासन से लेकर कृषि विभाग के अफसरों तक को इसमें जुटना होगा ताकि कृषकों की मौत के बाद उनके परिवार के आंसू पोंछे जा सकें।