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रुहेलखंड में सात और किसानों की मौत
बरेली
Updated Tue, 07 Apr 2015 01:14 AM IST
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कुदरती कहर से बर्बाद हुई फसल के सदमे से किसानों की मौत का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। रुहेलखंड में सोमवार को सात और किसानों की जान चली गई। इनमें बरेली के दो और बदायूं का एक किसान शामिल है। तीनों फसलों की बर्बादी से बेहद आहत थे और इसी सदमे में चल बसे। फसलों की तबाही के बाद सदमे से मरने और खुदकुशी करने वाले किसानों की संख्या अब बरेली मंडल में 31 और मुरादाबाद मंडल में 19 हो गई है। उधर, प्रदेश के अन्य हिस्सों में चार और किसानों की जान चली गई। इसमें कर्ज से परेशान तीनकिसानों ने आत्महत्या कर ली।
बरेली जिले के अलीगंज क्षेत्र के सूदनपुर मील गांव के 40 वर्षीय के टीकाराम लोधी तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। टीकाराम ने अपनी तीन बीघा जमीन पर गेहूं की फसल बोई थी। बेमौसम बारिश और जंगली सुअर और गायों ने फसल बर्बाद कर दी। सोमवार सुबह आठ बजे के करीब टीकाराम खेत पर गए। वापस लौटते समय रास्ते में उनके सीने में अचानक तेज दर्द उठा। परिवार वाले उन्हें तुरंत अस्पताल को लेकर चले लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। लेखपाल काशीनाथ शर्मा ने मौके पर पहुंचकर जानकारी ली और रिपोर्ट सदर तहसील प्रशासन को भेज दी। क्यारा ब्लाक प्रमुख चौ. जितेंद्र सिंह ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
उधर, कैंट थाने के गांव इचौलिया निवासी किसान गंगाराम सोमवार शाम अपना खेत देखने गए थे। उन्होंने अपनी कुल चार बीघा जमीन में गेहूं की फसल बोई थी। खेत से लौटने के बाद वे घर के बाहर पाकड़ के नीचे बैठ गए। घरवालों के मुताबिक वहीं हार्टअटैक से उनकी मौत हो गई। बड़े और गरीब परिवार के मुखिया गंगाराम की मौत की वजह फसल की बरबादी बताई जा रही है। गंगाराम के परिवार में उनकी पत्नी, चार बेटे और एक बेटी है। बड़े बेटे महावीर और बेटी दुर्गेश की वह शादी कर चुके हैं। तीन बेटे काफी छोटे हैं। महावीर ने बताया कि पिता को विरासत में चार बीघा ही जमीन मिली थी। वह मजदूरी करता है। पिता पर कोई लोन तो नहीं था पर उसे लगता है कि गेहूं की फसल का हाल देखकर पिता की मौत हुई है।
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बदायूं के बिसौली तहसील क्षेत्र के गांव पैगा भीकमपुर निवासी 55 वर्षीय ऋषिपाल ने सात बीघा में आलू तथा पांच बीघा में गेहूं की फसल की थी। बारिश ने दोनों ही फसलें चौपट कर दीं। यह सदमा बर्दाश्त न कर पाने के कारण ऋषिपाल की मौत हो गई। सूचना पर एसडीएम गुलाब चंद्र और तहसीलदार महेंद्र कुमार ने गांव पहुंच कर उसके परिवार वालों से बात की। उन्होंने कहा कि फसल नष्ट होने का मुआवजा मिलेगा। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह पुरानी बीमारी बताई गई है।
उधर, मुरादाबाद मंडल के संभल जिले के कुढ़ फतेहगढ़ थाना क्षेत्र में मिठनपुर मौजा निवासी किसान किशनलाल (35) अपने पिता महेंद्र सिंह के साथ सोमवार को सुबह खेत पर गया था। उसने जो खेत बटाई पर लिया था, उसमें काफी क्षति हुई है। पिता ने बताया कि फसल की हालत देखने के बाद बेेटे की हालत बिगड़ी। वह खेत में ही गिर गया। इलाज के लिए स्योंडारा ले जाते समय उसकी मौत हो गई।
दूसरी घटना रजपुरा थाना क्षेत्र के सेमरी की है। 50 वर्षीय महिला किसान कृष्णा गुप्ता की तीन बीघा फसल चौपट हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि रविवार की शाम खेत गईं। लौटते समय ही उनकी हालत बिगड़ गई। रात्रि 11:00 बजे उनकी मौत हो गई। तीसरी घटना संभल के हयातनगर थाना क्षेत्र भमौरी पट्टी गांव की है। गांव निवासी नत्थू सिंह यादव का पुत्र पूरन सिंह यादव (42) ने अपनी चार बीघा जमीन पर गेहूं बोया था। सोमवार को पूरन अपनी पत्नी राधा, पुत्री कलावती व पिंकी के साथ खेत पर कटाई करने गया। बालियों का दाना खराब देखा तो उसकी तबियत बिगड़ने लगी। वह वहीं गिर गया। एंबुलेंस मंगाकर जिला अस्पताल लाया गया, जहां से डाक्टरों ने उसे रेफर किया लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई।
रामपुर जिले के मिलक क्षेत्र के अकौंदा गांव निवासी साबिर (47) के पास दो बीघा जमीन है। उसने करीब 12 एकड़ जमीन को गेहूं की खेती के लिए ठेके पर लिया था। रविवार की रात वह काम से लौटने पर फसल में हुए नुकसान की चर्चा करते हुए अचानक बेहोश हो गया। इसके बाद उसे निकट के डाक्टर के पास ले गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
इसी दौरान फैजाबाद के इनायतनगर थाने के घुरेहटा गांव के मजरे जहानपुर निवासी शिवकुमार गेहूं की फसल तबाह होने से सदमे में आ गया। किसान ने सोमवार दोपहर खेत में ही जामुन के पेड़ से लटककर फांसी लगा ली। बांदा जिले बबेरू तहसील के सपहाई (गुरौली) गांव में रविवार की शाम किसान रामखेलावन यादव की खराब फसल देखकर सदमे से मौत हो गई। उधर, नरैनी तहसील के बिल्हरका गांव में भवंत सिंह की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। हमीरपुर के मौदहा कोतवाली क्षेत्र के छिरका गांव में किसान चंदन सिंह फसल की बर्बादी को लेकर काफी परेशान था। सोमवार को सुबह उसने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। फिरोजाबाद के नगला खंगर थाना क्षेत्र के गांव बनीपुर के किसान माधो सिंह यादव ने अपनी आलू की फसल की बर्बादी का सदमा सहन नहीं कर पाया और उसने खेत में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
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बरेली जिले के अलीगंज क्षेत्र के सूदनपुर मील गांव के 40 वर्षीय के टीकाराम लोधी तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। टीकाराम ने अपनी तीन बीघा जमीन पर गेहूं की फसल बोई थी। बेमौसम बारिश और जंगली सुअर और गायों ने फसल बर्बाद कर दी। सोमवार सुबह आठ बजे के करीब टीकाराम खेत पर गए। वापस लौटते समय रास्ते में उनके सीने में अचानक तेज दर्द उठा। परिवार वाले उन्हें तुरंत अस्पताल को लेकर चले लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। लेखपाल काशीनाथ शर्मा ने मौके पर पहुंचकर जानकारी ली और रिपोर्ट सदर तहसील प्रशासन को भेज दी। क्यारा ब्लाक प्रमुख चौ. जितेंद्र सिंह ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
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उधर, कैंट थाने के गांव इचौलिया निवासी किसान गंगाराम सोमवार शाम अपना खेत देखने गए थे। उन्होंने अपनी कुल चार बीघा जमीन में गेहूं की फसल बोई थी। खेत से लौटने के बाद वे घर के बाहर पाकड़ के नीचे बैठ गए। घरवालों के मुताबिक वहीं हार्टअटैक से उनकी मौत हो गई। बड़े और गरीब परिवार के मुखिया गंगाराम की मौत की वजह फसल की बरबादी बताई जा रही है। गंगाराम के परिवार में उनकी पत्नी, चार बेटे और एक बेटी है। बड़े बेटे महावीर और बेटी दुर्गेश की वह शादी कर चुके हैं। तीन बेटे काफी छोटे हैं। महावीर ने बताया कि पिता को विरासत में चार बीघा ही जमीन मिली थी। वह मजदूरी करता है। पिता पर कोई लोन तो नहीं था पर उसे लगता है कि गेहूं की फसल का हाल देखकर पिता की मौत हुई है।
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बदायूं के बिसौली तहसील क्षेत्र के गांव पैगा भीकमपुर निवासी 55 वर्षीय ऋषिपाल ने सात बीघा में आलू तथा पांच बीघा में गेहूं की फसल की थी। बारिश ने दोनों ही फसलें चौपट कर दीं। यह सदमा बर्दाश्त न कर पाने के कारण ऋषिपाल की मौत हो गई। सूचना पर एसडीएम गुलाब चंद्र और तहसीलदार महेंद्र कुमार ने गांव पहुंच कर उसके परिवार वालों से बात की। उन्होंने कहा कि फसल नष्ट होने का मुआवजा मिलेगा। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह पुरानी बीमारी बताई गई है।
उधर, मुरादाबाद मंडल के संभल जिले के कुढ़ फतेहगढ़ थाना क्षेत्र में मिठनपुर मौजा निवासी किसान किशनलाल (35) अपने पिता महेंद्र सिंह के साथ सोमवार को सुबह खेत पर गया था। उसने जो खेत बटाई पर लिया था, उसमें काफी क्षति हुई है। पिता ने बताया कि फसल की हालत देखने के बाद बेेटे की हालत बिगड़ी। वह खेत में ही गिर गया। इलाज के लिए स्योंडारा ले जाते समय उसकी मौत हो गई।
दूसरी घटना रजपुरा थाना क्षेत्र के सेमरी की है। 50 वर्षीय महिला किसान कृष्णा गुप्ता की तीन बीघा फसल चौपट हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि रविवार की शाम खेत गईं। लौटते समय ही उनकी हालत बिगड़ गई। रात्रि 11:00 बजे उनकी मौत हो गई। तीसरी घटना संभल के हयातनगर थाना क्षेत्र भमौरी पट्टी गांव की है। गांव निवासी नत्थू सिंह यादव का पुत्र पूरन सिंह यादव (42) ने अपनी चार बीघा जमीन पर गेहूं बोया था। सोमवार को पूरन अपनी पत्नी राधा, पुत्री कलावती व पिंकी के साथ खेत पर कटाई करने गया। बालियों का दाना खराब देखा तो उसकी तबियत बिगड़ने लगी। वह वहीं गिर गया। एंबुलेंस मंगाकर जिला अस्पताल लाया गया, जहां से डाक्टरों ने उसे रेफर किया लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई।
रामपुर जिले के मिलक क्षेत्र के अकौंदा गांव निवासी साबिर (47) के पास दो बीघा जमीन है। उसने करीब 12 एकड़ जमीन को गेहूं की खेती के लिए ठेके पर लिया था। रविवार की रात वह काम से लौटने पर फसल में हुए नुकसान की चर्चा करते हुए अचानक बेहोश हो गया। इसके बाद उसे निकट के डाक्टर के पास ले गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
इसी दौरान फैजाबाद के इनायतनगर थाने के घुरेहटा गांव के मजरे जहानपुर निवासी शिवकुमार गेहूं की फसल तबाह होने से सदमे में आ गया। किसान ने सोमवार दोपहर खेत में ही जामुन के पेड़ से लटककर फांसी लगा ली। बांदा जिले बबेरू तहसील के सपहाई (गुरौली) गांव में रविवार की शाम किसान रामखेलावन यादव की खराब फसल देखकर सदमे से मौत हो गई। उधर, नरैनी तहसील के बिल्हरका गांव में भवंत सिंह की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। हमीरपुर के मौदहा कोतवाली क्षेत्र के छिरका गांव में किसान चंदन सिंह फसल की बर्बादी को लेकर काफी परेशान था। सोमवार को सुबह उसने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। फिरोजाबाद के नगला खंगर थाना क्षेत्र के गांव बनीपुर के किसान माधो सिंह यादव ने अपनी आलू की फसल की बर्बादी का सदमा सहन नहीं कर पाया और उसने खेत में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।