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स्पाइन सलामत रखना है तो रोज दें 15 मिनट
बरेली।
Updated Mon, 27 Mar 2017 01:05 AM IST
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Keep spin salute Then give 15 minutes
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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स्पाइन की दिक्कत लोगाें में लगातार बढ़ रही है, खासकर युवा इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। पेन मैनेजमेंट की वर्कशॉप में आए विशेषज्ञों ने बताया कि सर्जरी और दवाएं ये दोनों केवल एक हद तक ही आपको दर्द से निजात दिला सकती हैं, लेकिन हमेशा के लिए राहत चाहिए तो हर दिन 15 मिनट आपको अपने लिए देने होंगे। एसआरएमएस मेडिकल इंस्टीट्यूट में पेन मैनेजमेंट पर हुई वर्कशॉप में दर्द से निजात दिलाने के विशेषज्ञ शामिल हुए। इन्होंने शरीर के हर तरह के पुराने दर्द पर बात की।
एनेस्थेटिक बनने के बाद पेन (दर्द) मेडिसिन में विशेषज्ञता हासिल करने वाले विशेषज्ञों ने जानकारी दी। डॉ. आशु जैन ने बताया कि हर दूसरे व्यक्ति को कमर में दर्द है। प्रोफेशनल्स, कंप्यूटर पर काम करने वालों की संख्या इसमें ज्यादा है। जो लोग मोबाइल पर घंटों काम करते हैं उनके गर्दन से अन्य हिस्साें तक 60 किलोग्राम के बराबर का भार स्पाइन पर पड़ता है। सर्जरी जरूरी बताई जाती है, लेकिन इसके बाद भी 40 फीसदी लोगाें में दर्द बना रहता है, लेकिन बिना सर्जरी सिर्फ 15 मिनट के वर्कआउट से स्पाइन की समस्या से बच सकते हैं। चाहें योग करें या कोई दूसरी एक्सरसाइज। फिजीयोथेरेपी के अलावा मानसिक रूप से भी स्वस्थ होना जरूरी है। सेमीनार में एसआरएमएस ट्रस्ट के चेयरमैन देवमूर्ति, सचिव आदित्य मूर्ति, डॉ. जूही, डॉ. महेश, डॉ. चेतन कुमार व अन्य का सहयोग रहा।
पेट का वजन भी डिस्क पर पड़ता है
डॉ. मनीष राज ने बताया कि पेट का वजन बढ़ने से डिस्क पर भी प्रभाव पड़ता है। लोग इसको हल्के में लेते हैं, जबकि पेट निकलते ही तुरंत इसको अंदर करने के लिए एक्सरसाइज शुरू कर देनी चाहिए। डॉ. मनीष राज ने बताया कि अगर डिस्क और स्पाइन की समस्या से बचना है तो मोबाइल की लिमिट तय कर दें। ज्यादा झुककर, लेटकर और बैठकर आप अपनी रीढ़ खराब कर रहे हैं।
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कैंसर के दर्द को कम करने के लिए कारण समझना जरूरी
डॉ. रजत गुप्ता ने बताया कि कैंसर पीड़िताें में दर्द उनके जीवन को और छोटा कर देता है, अगर दर्द न हो तो उनको पता भी न चले कि उन्हें कैंसर है। इससे 80 फीसदी लोग परेशान हैं। इसके लिए सर्जरी और दवाएं ही एक विकल्प नहीं है। जो भी इनका इलाज कर रहा है वह दर्द का कारण भी जाने और काउंसिलिंग करे।
प्रसव पीड़ा से निजात पा रही हैं महिलाएं
डॉ. ऋचा ने बताया कि प्रसव पीड़ा से अब महिलाएं निजात पाना चाहती हैं, इसके लिए वे कई विकल्प अपना रही हैं। डॉ. ऋचा का कहना है कि दर्द हमेशा से ही किसी को अच्छा नहीं लगता, इसलिए जो इससे मुक्ति पाना चाहते हैं वे महंगी तकनीक अपना रहे हैं। डॉ. राजकुमार ने बताया कि एक पतला सा तार कमर के हिस्से में प्रसव पीड़ा के शुरू होने के समय डालते हैं, इसे लगाकर चल फिर सकते हैं। इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है। प्रसव के बाद इसे हटा दिया जाता है।
सिर दर्द का इलाज है नई तकनीक में
अभिनेता सलमान खान ट्राइजेमिनल न्यूरलजिया बीमारी से जूझ रहे थे। इस बीमारी में सिर में दर्द बना रहता है। इसका इलाज भारत में मौजूद है। एक तार मुंह के रास्ते सीधे सिर की नस में फिट किया जाता है। यह चार से पांच साल तक बना रहता है। डॉ. आशु जैन ने बताया कि इसका साइड इफेक्ट 95 फीसदी मामलों में नहीं दिखता। यह तकनीक भारत में सस्ती है। इस तार से ब्रेन की उस नस को सुन्न कर देते हैं, जिसकी वजह से दर्द होता है।
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एनेस्थेटिक बनने के बाद पेन (दर्द) मेडिसिन में विशेषज्ञता हासिल करने वाले विशेषज्ञों ने जानकारी दी। डॉ. आशु जैन ने बताया कि हर दूसरे व्यक्ति को कमर में दर्द है। प्रोफेशनल्स, कंप्यूटर पर काम करने वालों की संख्या इसमें ज्यादा है। जो लोग मोबाइल पर घंटों काम करते हैं उनके गर्दन से अन्य हिस्साें तक 60 किलोग्राम के बराबर का भार स्पाइन पर पड़ता है। सर्जरी जरूरी बताई जाती है, लेकिन इसके बाद भी 40 फीसदी लोगाें में दर्द बना रहता है, लेकिन बिना सर्जरी सिर्फ 15 मिनट के वर्कआउट से स्पाइन की समस्या से बच सकते हैं। चाहें योग करें या कोई दूसरी एक्सरसाइज। फिजीयोथेरेपी के अलावा मानसिक रूप से भी स्वस्थ होना जरूरी है। सेमीनार में एसआरएमएस ट्रस्ट के चेयरमैन देवमूर्ति, सचिव आदित्य मूर्ति, डॉ. जूही, डॉ. महेश, डॉ. चेतन कुमार व अन्य का सहयोग रहा।
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पेट का वजन भी डिस्क पर पड़ता है
डॉ. मनीष राज ने बताया कि पेट का वजन बढ़ने से डिस्क पर भी प्रभाव पड़ता है। लोग इसको हल्के में लेते हैं, जबकि पेट निकलते ही तुरंत इसको अंदर करने के लिए एक्सरसाइज शुरू कर देनी चाहिए। डॉ. मनीष राज ने बताया कि अगर डिस्क और स्पाइन की समस्या से बचना है तो मोबाइल की लिमिट तय कर दें। ज्यादा झुककर, लेटकर और बैठकर आप अपनी रीढ़ खराब कर रहे हैं।
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कैंसर के दर्द को कम करने के लिए कारण समझना जरूरी
डॉ. रजत गुप्ता ने बताया कि कैंसर पीड़िताें में दर्द उनके जीवन को और छोटा कर देता है, अगर दर्द न हो तो उनको पता भी न चले कि उन्हें कैंसर है। इससे 80 फीसदी लोग परेशान हैं। इसके लिए सर्जरी और दवाएं ही एक विकल्प नहीं है। जो भी इनका इलाज कर रहा है वह दर्द का कारण भी जाने और काउंसिलिंग करे।
प्रसव पीड़ा से निजात पा रही हैं महिलाएं
डॉ. ऋचा ने बताया कि प्रसव पीड़ा से अब महिलाएं निजात पाना चाहती हैं, इसके लिए वे कई विकल्प अपना रही हैं। डॉ. ऋचा का कहना है कि दर्द हमेशा से ही किसी को अच्छा नहीं लगता, इसलिए जो इससे मुक्ति पाना चाहते हैं वे महंगी तकनीक अपना रहे हैं। डॉ. राजकुमार ने बताया कि एक पतला सा तार कमर के हिस्से में प्रसव पीड़ा के शुरू होने के समय डालते हैं, इसे लगाकर चल फिर सकते हैं। इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है। प्रसव के बाद इसे हटा दिया जाता है।
सिर दर्द का इलाज है नई तकनीक में
अभिनेता सलमान खान ट्राइजेमिनल न्यूरलजिया बीमारी से जूझ रहे थे। इस बीमारी में सिर में दर्द बना रहता है। इसका इलाज भारत में मौजूद है। एक तार मुंह के रास्ते सीधे सिर की नस में फिट किया जाता है। यह चार से पांच साल तक बना रहता है। डॉ. आशु जैन ने बताया कि इसका साइड इफेक्ट 95 फीसदी मामलों में नहीं दिखता। यह तकनीक भारत में सस्ती है। इस तार से ब्रेन की उस नस को सुन्न कर देते हैं, जिसकी वजह से दर्द होता है।