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रखो दिल इतना बड़ा.. पूर्व अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी ने कोरोना फंड में दी एक दिन की मजदूरी
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अपने मेडलों के साथ मेहताब हुसैन।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
ताइपे में हुए एशिया पैसिफिक गेम्स फॉर द डीफ में भारत के लिए मेडल जीत चुके हैं मेहताब
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अपना परिवार चलाने के लिए एक फैक्टरी में करते हैं मजदूरी
पीएम की अपील से हुए द्रवित, दूसरों से भी की योगदान की अपील
बरेली। एक वक्त ताइपे में हुए एशिया पैसिफिक गेम्स फॉर द डीफ समेत स्पेशल खिलाड़ियों की कई अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए मेडल जीत चुके मेहताब हुसैन यूं तो खुद बेहद तंगी के दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन फिर भी उन्होंने कोरोना पीड़ितों के लिए सरकार की लड़ाई में योगदान कर बड़ा दिल दिखाया है। मेहताब ने कोरोना मरीजों के इलाज के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष में अपनी एक दिन की मजदूरी के तीन सौ रुपये भेजे हैं। उन्होंने अपील भी की है कि देश को आपदा के दौर से निकालने में इस लड़ाई में हर व्यक्ति को अपनी हैसियत के मुताबिक योगदान करना चाहिए।
मेहताब हुसैन अब खेलों से दूर हैं और पुराना शहर के चक महमूद इलाके में अपने परिवार के साथ रहते हैं। एक वक्त में वह स्पेशल खिलाड़ियों के लिए होने वाली प्रतियोगिताओं में नामी एथलीट हुआ करते थे। कई अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने मेडल जीतकर देश की शान बढ़ाई लेकिन पारिवारिक जिंदगी में उनका संघर्ष बरकरार रहा। मेहताब बताते हैं कि उन्होंने काफी समय बेरोजगारी की यातना झेली और अब एक मीट फैक्टरी में मजदूरी करते हैं। रोज की मजदूरी के उन्हें तीन सौ रुपये ही मिलते हैं। इसी में से उन्होंने एक दिन की मजदूरी चेक के जरिये प्रधानमंत्री राहत कोष में भेजी है।
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बरेली स्पोर्ट्स काउंसिल ऑफ द डीफ बरेली के अध्यक्ष चंगेज खान ने बताया कि मेहताब उनकी संस्था के सदस्य हैं और सामाजिक कार्यों में हमेशा बढ़चढ़कर हिस्सा लेते हैं। आजकल वह देश में कोरोना के बढ़ते प्रकोप से चिंतित हैं। रोज उन्हें वीडियो कॉलिंग कर इशारों में देश के हालात पूछते हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री की देश के नाम की गई अपील से वह बहुत द्रवित हो गए। उन्होंने अपनी मजदूरी की कमाई के तीन सौ रुपये का चेक बनवाया और इसे प्रधानमंत्री राहत कोष में भेज दिया।
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कृपया लॉकडाउन का पालन करें
मेहताब ने लोगों से देश को कोरोना के संकट से बचाने के लिए लॉकडाउन का भी पूरी सख्ती से पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन का पालन न किया गया तो न जाने कितने परिवारों को कोरोना का शिकार होना पड़ेगा और उसका गुनाह यह बीमारी फैलाने वालों के ही सिर होगा।
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अपना परिवार चलाने के लिए एक फैक्टरी में करते हैं मजदूरी
पीएम की अपील से हुए द्रवित, दूसरों से भी की योगदान की अपील बरेली। एक वक्त ताइपे में हुए एशिया पैसिफिक गेम्स फॉर द डीफ समेत स्पेशल खिलाड़ियों की कई अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए मेडल जीत चुके मेहताब हुसैन यूं तो खुद बेहद तंगी के दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन फिर भी उन्होंने कोरोना पीड़ितों के लिए सरकार की लड़ाई में योगदान कर बड़ा दिल दिखाया है। मेहताब ने कोरोना मरीजों के इलाज के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष में अपनी एक दिन की मजदूरी के तीन सौ रुपये भेजे हैं। उन्होंने अपील भी की है कि देश को आपदा के दौर से निकालने में इस लड़ाई में हर व्यक्ति को अपनी हैसियत के मुताबिक योगदान करना चाहिए।
मेहताब हुसैन अब खेलों से दूर हैं और पुराना शहर के चक महमूद इलाके में अपने परिवार के साथ रहते हैं। एक वक्त में वह स्पेशल खिलाड़ियों के लिए होने वाली प्रतियोगिताओं में नामी एथलीट हुआ करते थे। कई अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने मेडल जीतकर देश की शान बढ़ाई लेकिन पारिवारिक जिंदगी में उनका संघर्ष बरकरार रहा। मेहताब बताते हैं कि उन्होंने काफी समय बेरोजगारी की यातना झेली और अब एक मीट फैक्टरी में मजदूरी करते हैं। रोज की मजदूरी के उन्हें तीन सौ रुपये ही मिलते हैं। इसी में से उन्होंने एक दिन की मजदूरी चेक के जरिये प्रधानमंत्री राहत कोष में भेजी है।
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बरेली स्पोर्ट्स काउंसिल ऑफ द डीफ बरेली के अध्यक्ष चंगेज खान ने बताया कि मेहताब उनकी संस्था के सदस्य हैं और सामाजिक कार्यों में हमेशा बढ़चढ़कर हिस्सा लेते हैं। आजकल वह देश में कोरोना के बढ़ते प्रकोप से चिंतित हैं। रोज उन्हें वीडियो कॉलिंग कर इशारों में देश के हालात पूछते हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री की देश के नाम की गई अपील से वह बहुत द्रवित हो गए। उन्होंने अपनी मजदूरी की कमाई के तीन सौ रुपये का चेक बनवाया और इसे प्रधानमंत्री राहत कोष में भेज दिया।
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