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खतरे के निशान पर पहुंचा कालागढ़ बांध, जिले में अलर्ट

Fri, 21 Aug 2020 07:01 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 21 Aug 2020 07:01 PM IST
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Kalagarh dam reached danger mark, alert in district
बरेली। बिजनौर में गंगा नदी पर बना कालागढ़ बांध खतरे के निशान पर पहुंच चुका है। इस वजह से कालागढ़ बांध से कभी भी अधिक मात्रा में पानी छोड़ा जा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो बरेली जिला बाढ़ की चपेट में आ सकता है। चूंकि पहले से ही जिले में बह रही नदियां उफान पर हैं। अधिशासी अभियंता रामगंगा बांध खंड कालागढ़ डैम की और से जिला प्रशासन को जानकारी देने पर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व मनोज कुमार पांडेय ने जिले की सभी तहसीलों के एसडीएम और तहसीलदारों को अलर्ट जारी किया है।
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रामगंगा का जलस्तर बढ़ने से कई गांवों के कटान का खतरा
मीरगंज। इलाके में रामगंगा का जलस्तर से बढ़ रहा है। वर्तमान में गंगा उफान पर है, जिसके कारण सिरौली, कपूरपुर, तातारपुर, भैरपुरा, काशीनाथपुर, गोरा लोकनाथपुर, हेमराजपुर, सिरोधी अंगदपुर, अंबरपुर, ठिरिया बुजुर्ग, मोहम्मदगंज, श्यामपुर, हरदोई, पनबड़िया, पिथूपुरा, गौंतारा, चंदपुर जोगियान, काजियान आदि गांवों के कटान की आशंका बनी हुई है। जिससे किसान काफी सहमे हुए हैं क्योंकि इससे पहले आई बाढ़ में हजारों बीघा जमीन जलमग्न हो चुकी है। शाही क्षेत्र में बहगुल नदी के किनारे बसे गांव वफरी अब्दुलनवीपुर, सुल्तानपुर, हैदरगंज, मकरी खोह, गौस गंज, जुन्हाई नदी के ढाये पर है। नदी के पानी के तेज बहाव के कारण क्षतिग्रस्त हो चुके शाही-मिर्जापुर मार्ग के पुल के पास एप्रोच रोड के कटने का खतरा बना हुआ है। दुनका इलाके में भी बहगुल नदी जलस्तर बढ़ने पर कहर बरपा सकती है, जिससे आसपास के नदी से सटे गांव तो खतरे में हैं ही, लेकिन इससे बिहारीपुर गांव के पास बना पुल भी कटने के कगार पर है। इसी नदी से गांव धर्मपुरा, सुल्तानपुर, दुनका, बिहारीपुर, आनंदपुर गांव की जमीनें बहगुल नदी के निशाने पर हैं। हालात यह हैं जब भी बहगुल नदी में जलस्तर बढ़ता है तो इन गांवों के लोग रात भर जागकर गुजारते हैं क्योंकि उन्हें डर सताता रहता है कि कब उनके घरों को नदी के आगोश में समा जाएं। फतेहगंज पश्चिमी के गांव ठिरिया खेतल के पास से गुजर रही बहगुल नदी का सत्ताधारी नेताओं की सह पर खनन माफिया ने बालू का खनन करके यह हाल कर दिया है कि नदी की धार अब ठिरिया खेतल आदि गांव को चपेट में ले सकती है। मीरगंज एसडीएम ममता मालवीय ने बताया कि जिला प्रशासन का पत्र मिलने के बाद सभी क्षेत्रीय लेखपालों और ग्राम प्रधानों को अलर्ट कर दिया गया है और सुरक्षा के इंतजाम कर लिए गए हैं।
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आंवला में खतरे के निशान के करीब पहुंची रामगंगा
आंवला। तहसील क्षेत्र के अलीगंज, सिरौली, बिशारतगंज और भमोरा थाना क्षेत्र में रामगंगा खतरे के निशान के करीब बह रही है। जिले में 2010 और 2012 में रामगंगा ने बहुत तबाही मचाई थी। आंवला और सदर तहसील क्षेत्र में नदी किनारे बसे गांव जलमग्न हो गए थे। हजारों किसानों की फसल बर्बाद हो गई थी। अनाज पानी में भीगकर बर्बाद होने से लोगों के आगे खाने तक का संकट आ गया था। इस बार भी रामगंगा के खादर किसान फसल बर्बाद होने की आशंका से परेशान हैं। अलीगंज क्षेत्र में बंधा पर बनी सुरक्षा दीवार पर भी खतरा मंडराने लगा है। नदी का जलस्तर बढ़ा तो खादर इलाके के सूदनपुर, धनेती खरगपुर, जित्तौर, किशनपुर, चुराह नवदिया समेत दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे। भमोरा क्षेत्र में नहर बनने से रामगंगा किनारे बसे गांवों में रहने वालों को राहत मिली है। प्रशासन की ओर से अलर्ट जारी होने के बाद तहसील के अफसरों ने बाढ़ चौकी बनाकर राजस्व कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर दी है।
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देवहा नदी का जलस्तर बढ़ने से लोगों में बेचैनी
क्योलड़िया। देवहा नदी क्योलड़िया के तमाम गांव में हर साल कहर बरपाती है। इस साल भी बारिश के बाद से नदी का जलस्तर बढ़ गया है। जिससे नदी किनारे रह रहे हैं गांव के लोगों में बेचैनी होने लगी है। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। फसलें पानी में डूबने के साथ ही खेतों का कटान भी शुरू हो गया है। अमीनगर में तो लोगों के आने जाने का रास्ता भी बंद हो गया है। गांव के लोगों ने आने जाने को एक नाव की मांग की है। अमीरनगर गांव देवहा नदी से सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। यहां हर साल बाढ़ का पानी लोगों की परेशानी बढ़ा देता है। इस बार भी पहाड़ों पर लगातार बारिश होने से नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया है। गांव आने जाने का रास्ता बंद हो गया है। गांव का मुख्य रास्ता 10 साल पहले भी देवहा नदी में समा चुका है। गांववाले लगातार प्रशासन से इस समस्या से निजात दिलाने की मांग कर रहे है, लेकिन सुनवाई न होने से उनमें गुस्सा है।
फरीदपुर में रामगंगा में समाए चार गांव, तैयारी के नाम पर सिर्फ बाढ़ चौकियां
फरीदपुर। कारगिल शहीद समेत चार गांव पिछले बीस साल में रामगंगा में समां चुके हैं, इसके बावजूद गांवों को बचाने के प्रयास नहीं किए गए।
फरीदपुर तहसील में रामगंगा का सर्वाधिक प्रकोप रहता है। फरीदपुर और थाना कैंट की लगी सीमा पर गांव गोमिदपुर था, जो रामगंगा ने पूरी तरह से काट दिया और पूरा गांव रामगंगा में समा गया। ग्रामीणों ने आंदोलन किया तो प्रशासन काफी दूर पर भूमि देने को तैयार हुआ, जिसको ग्रामीणों ने लेने से साफ इनकार कर दिया। यह गांव कारगिल शहीद राजेंद्र का है। इसके अलावा मकरंदपुर, भूरे खां गौंटिया, प्रहलादपुर गांव भी रामगंगा में समा चुके है। लगभग बीस साल में चार गांव रामगगां में पूरी तरह विलीन होने के बाद भी प्रशासन ने कोई योजना तैयार नहीं की, जिससे रामगंगा के कटान को रोका जा सके। इतना प्रशासन कर देता है कि बाढ़ आने से गांव में चौकियां बना दी जाती है और नाव की व्यवस्था कर दी जाती है। तहसील में कंट्रोल रूम खुल जाता है। भूरे खां गौंटिया रामगंगा ने काट दी थी तो पूरा गांव बरेली जाकर बस गया। अन्य गांव के लोगों ने इधर उधर भूमि लेकर मकान जैसे तैसे बना लिए है। रामगंगा से लगभग एक दर्जन से अधिक गांव प्रभावित होते है। तुमड़िया और रूरिया को जाने वाले रास्ते में बाढ़ का पानी आ जाने से रास्ता भी बंद हो जाता है।

गोला बैराज से पानी छोड़ा गया तो किच्छा नदी मचाएगी तबाही
बहेड़ी। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश से गोला बैराज खतरे के निशान पर पहुंच गया है, जिस वजह से किच्छा और ढौरा नदी में पानी छोड़ा जाएगा। इससे सबसे ज्यादा किच्छा नदी तबाही मचाती है। दरअसल अगर किच्छा नदी में तीस हजार क्सूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा जाता है तो नदी विकराल रूप लेकर रजपुरा, लोधीपुर, नरायन नगला, इटौवा, भीकमपुर, मौलाना फॉर्म समेत सैकड़ों गांवों को अपनी चपेट में ले लेती है। रिछा क्षेत्र में ढूडनिया नदी में ज्यादा बारिश होने और ऊपर से पानी छोडे़ जाने पर दमखोदा, बांसबोझ, भैरपुरा, खिरना गांवों को बाढ़ का खतरा पैदा हो जाएगा। जबकि सिंघय्या नदी के पास बसे गांव बकैनिया स्वाले, गरगय्या, मगरी नवादा, चुरैला, चुरैली आदि गांवों को नदी में ज्यादा पानी आने पर बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। सिंघय्या नदी के पास बसे गांव बकैनिया स्वाले में पिचिंग न होने पर नदी कटान करती है। यहां के लोग एक अरसे से पिचिंग की मांग कर रहे हैं, मगर आज तक मांग पूरी नहीं हुई है। शेरगढ़ में किच्छा नदी में पानी का बहाव बढ़ते ही गांव नगरियाकलां, लखीमपुर, कमालपुर, धर्मपुरा, कस्बापुर, पनबड़िया, पदमी, बरीपुरा, वैरमनगर में बड़ा नुकसान होता है। प्रशासन ने अभी तक बाढ़ से निपटने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं।
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