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National Startup Day: 60 लाख रुपये का ऑफर छोड़ा, अब रोजगार बांट रहीं ज्योत्सना सैनी

Tue, 16 Jan 2024 01:13 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 16 Jan 2024 01:13 PM IST
सार

बरेली में युवाओं का रुझान स्टार्टअप की ओर बढ़ रहा है। वे नौकरी छोड़कर खुद का स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस पर हम आपको कुछ ऐसे ही युवाओं से मिलवा रहे हैं। 

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Jyotsna Saini left job offer and started startup
ज्योत्सना सैनी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली में बीसलपुर रोड निवासी ज्योत्सना सैनी ने 60 लाख रुपये सालाना का ऑफर छोड़कर खुद की सॉफ्टवेयर कंपनी बनाई। अब वह यूनाइटेड किंगडम के ग्राहकों को डिजिटल मार्केटिंग, वेबसाइट व एप डेवलपमेंट आदि की सुविधा प्रदान कर रही हैं। 20 से अधिक लोगों को रोजगार भी दे रही हैं। 

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ज्योत्सना सैनी ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2019 में स्टार्टअप शुरू किया था। वर्तमान में उनकी कंपनी आईवेबरो की नेटवर्थ एक करोड़ से अधिक है। साथ ही नोएडा में भी कंपनी की शाखा संचालित है। 
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बताती हैं कि वह देश की ‘ब्रेन ड्रेन’ की समस्या को दूर करने का प्रयास भी कर रही हैं। जो स्किल्ड डेवलपर दूसरे देशों की ओर रुख कर लेते हैं, उनको शहर में ही विश्वस्तरीय कंपनी के बराबर सैलरी मुहैया करवा रही हैं। अधिक कार्य होने पर फ्रीलांसर युवाओं को भी काम दिया जाता है।

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कुशल युवा क्यों जाएं बाहर 
ज्योत्सना बताती हैं कि जब उन्होंने एमटेक पूरा किया था तो उनके पास भी ऑस्ट्रेलिया से 60 लाख रुपये सालाना तक के पैकेज के ऑफर आए थे, लेकिन वह नहीं गईं। इसके पीछे के कारण को बताते हुए वह कहती हैं कि युवाओं के पास बदलाव करने की क्षमता है। उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद वह अच्छे ऑफर मिलने पर विदेश का रुख करते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए अपनी कंपनी के माध्यम से कुशल युवकों को नौकरी दे रही हैं। 

वैश्विक मंच पर मौजूदगी दर्ज
बरेली से ही विदेशी ग्राहकों का काम करके अपने लोगों को रोजगार भी दे रही हैं। कंपनी को बड़े स्तर पर पहचान दिलाने के लिए रुहेलखंड इन्क्यूबेशन फाउंडेशन में भी पंजीकरण कराया है। उनकी कंपनी वैश्विक मंच पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुकी है। वर्ष 2023 में उन्होंने दुबई और बंगलूरू में हुई टेक समिट में प्रतिभाग किया था।

युवाओं ने खोजा ई-कचरे का विकल्प
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के खराब होने के बाद उन्हें अक्सर कचरे में फेंक दिया जाता है या कबाड़ी को बेच दिया जाता है, लेकिन शहर के चार युवाओं ने एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जिसके माध्यम से उपभोक्ता अपने उपकरणों की बिक्री कर आसानी से कर सकते हैं। 

‘द पार्ट्स प्लेनेट’ कंपनी के संस्थापक सौरभ साहू बताते हैं कि विश्व में ई-वेस्ट की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। निष्प्रयोज्य उपकरणों का भी इस्तेमाल किया जा सके, इस विचार से उन्होंने अर्जुन गुप्ता, जोहेव असलम व राघव अग्रवाल के साथ वर्ष 2021 में वेबसाइट और एप शुरू किया। सभी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बारे में पूरी जानकारी रखते हैं। 

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कंपनी के माध्यम से वे खराब मोबाइल फोन, लैपटॉप, प्रिंटर आदि उपकरणों के सही पुर्जों की जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध कराते हैं। मांग के मुताबिक डीलर पुर्जे खरीद लेते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि किसी मोबाइल फोन की स्क्रीन खराब हो जाती है और किसी दुकान पर उसी मॉडल का सही स्क्रीन वाला खराब फोन है तो दुकानदार दूसरे डीलर को स्क्रीन बेच सकता है। इससे फोन ठीक होने पर ई-वेस्ट नहीं बढ़ेगा और पुराने फोन के पुर्जे का भी इस्तेमाल हो जाएगा। 

रुहेलखंड इन्क्यूबेशन फाउंडेशन के भवन से कंपनी संचालन की जा रही है, जिसकी नेटवर्थ 30 लाख रुपये है। सौरभ जल्द ही इसे बड़े स्तर पर लॉन्च करने वाले हैं। 

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