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Bareilly News: आईवीआरआई कृषि विज्ञान केंद्र और अटारी करेंगे संयुक्त शोध
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बरेली। किसानों और पशुपालकों को नए अनुसंधान के जरिए सुविधा मुहैया कराने के लिए आईवीआरआई कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी) जल्द संयुक्त शोध कार्य करेंगे। साथ ही, एक दूसरे की तकनीक, प्रौद्योगिकी भी साझा करेंगे।
बृहस्पतिवार को आईवीआरआई इज्जतनगर की ओर से हाइब्रिड मोड में आयोजित इंटरफेस बैठक के दौरान यह जानकारी उप-महानिदेशक (कृषि शिक्षा) डाॅ. उधम सिंह गौतम ने दी। बैठक में कृषि विज्ञान केंद्रों के जोन पटना, कोलकाता, गुवाहटी, बारापानी के निदेशक मौजूद रहे। साथ ही, 12 राज्य, एक केंद्र शासित प्रदेश समेत अटारी, कृषि विज्ञान केंद्र के 217 प्रतिभागी शामिल रहे। डॉ. सिंह ने कहा कि अटारी के निदेशक पशुधन सेवा विस्तार के लिए आईवीआरआई के साथ शोध मुद्दे पर चर्चा कर सकते हैं। क्योंकि केंद्र की 30 फीसदी गतिविधियां अब पशु विज्ञान पर होंगी।
निदेशकों ने आईवीआरआई से कई क्षेत्रों में मांगा सहयोग
संयुक्त निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. रूपसी तिवारी ने बताया कि केवीके ने कम लागत वाले आवास, स्वच्छ दूध उत्पादन, चारा उत्पादन, रोग प्रबंधन, सुअर, मुर्गी पालन और बकरी के स्थानीय आनुवंशिक संसाधनों में सुधार की जरूरत बताई। साथ ही जलवायु अनुकूल आवास, दूध और मांस प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक डेयरी, सूकर, मुर्गी पालन की प्रथा को साझा करने का विचार रखा।
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ये रहे मौजूद
आईवीआरआई निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त, आईटीएमयू प्रभारी डाॅ. अनुज चौहान, पशु पुनर्रुत्पादन विभाग के डाॅ. मीराज खान, पशुपोषण विभाग के डाॅ. एलसी चौधरी, फार्म प्रभारी डाॅ. अश्वनी पांडे, वैज्ञानिक डाॅ. रोहित कुमार, डाॅ. बबलू कुमार, संयुक्त निदेशक कैडरेड डॉ. केपी सिंह, संयुक्त निदेशक शैक्षणिक डॉ. एसके मेंदीरत्ता, संयुक्त निदेशक शोध डॉ. एसके सिंह अन्य मौजूद रहे।
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बृहस्पतिवार को आईवीआरआई इज्जतनगर की ओर से हाइब्रिड मोड में आयोजित इंटरफेस बैठक के दौरान यह जानकारी उप-महानिदेशक (कृषि शिक्षा) डाॅ. उधम सिंह गौतम ने दी। बैठक में कृषि विज्ञान केंद्रों के जोन पटना, कोलकाता, गुवाहटी, बारापानी के निदेशक मौजूद रहे। साथ ही, 12 राज्य, एक केंद्र शासित प्रदेश समेत अटारी, कृषि विज्ञान केंद्र के 217 प्रतिभागी शामिल रहे। डॉ. सिंह ने कहा कि अटारी के निदेशक पशुधन सेवा विस्तार के लिए आईवीआरआई के साथ शोध मुद्दे पर चर्चा कर सकते हैं। क्योंकि केंद्र की 30 फीसदी गतिविधियां अब पशु विज्ञान पर होंगी।
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निदेशकों ने आईवीआरआई से कई क्षेत्रों में मांगा सहयोग
संयुक्त निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. रूपसी तिवारी ने बताया कि केवीके ने कम लागत वाले आवास, स्वच्छ दूध उत्पादन, चारा उत्पादन, रोग प्रबंधन, सुअर, मुर्गी पालन और बकरी के स्थानीय आनुवंशिक संसाधनों में सुधार की जरूरत बताई। साथ ही जलवायु अनुकूल आवास, दूध और मांस प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक डेयरी, सूकर, मुर्गी पालन की प्रथा को साझा करने का विचार रखा।
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ये रहे मौजूद
आईवीआरआई निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त, आईटीएमयू प्रभारी डाॅ. अनुज चौहान, पशु पुनर्रुत्पादन विभाग के डाॅ. मीराज खान, पशुपोषण विभाग के डाॅ. एलसी चौधरी, फार्म प्रभारी डाॅ. अश्वनी पांडे, वैज्ञानिक डाॅ. रोहित कुमार, डाॅ. बबलू कुमार, संयुक्त निदेशक कैडरेड डॉ. केपी सिंह, संयुक्त निदेशक शैक्षणिक डॉ. एसके मेंदीरत्ता, संयुक्त निदेशक शोध डॉ. एसके सिंह अन्य मौजूद रहे।