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आईवीआरआई में मत्स्य पालकों को उत्पादन संघ बनाकर आमदनी का दिया मंत्र
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आईवीआरआई
- फोटो : सोशल नेटवर्क
कृषि विज्ञान केंद्र में विश्व मत्स्य दिवस पर विशेषज्ञों ने सुझाए आधुनिक विकल्प
बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के कृषि विज्ञान केंद्र और मत्स्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में विश्व मत्स्य दिवस का आयोजन किया गया। इसमें मत्स्य पालकों को कृषक उत्पादन संघ बनाकर आमदनी के नए मंत्र के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में सीडीओ चंद्र मोहन गर्ग ने मत्स्य पालकों को और बेहतर तरह से काम करने के लिए प्रेरित किया। संयुक्त निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. महेश चंदर ने मत्स्य पालन की एकीकृत प्रणालियों को अपनाकर आय बढ़ाने के साथ उत्पाद के बेहतर विक्रय के लिए अच्छी पैकिंग करने की सलाह दी। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. राजकरन सिंह ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से कार्य करने के साथ कृषक उत्पादक संघ बनाकर मत्स्य पालकों अच्छी आमदनी का रास्ता खोल सकते हैं।
उपनिदेशक (मत्स्य) सृष्टि यादव ने प्रधानमंत्री मत्स्य विकास योजना सहित विभाग की सभी योजनाओं की विस्तार से जानकारी देते हुए मत्स्य पालकों से इनका अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक धर्मेंद्र मिश्रा ने बताया कि मत्स्य पालकों के लिए बैंक के माध्यम से ऋण संबंधी सुविधाएं नियमित रूप से प्रदान की जा रही हैं। इनमें जो समस्याएं आ रही हैं, उनमें सुधार के लिए नाबार्ड निरंतर प्रयासरत है। कार्यक्रम में पशुधन उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग के डॉ. सुमन ताल्लुकदार ने संस्थान द्वारा विकसित मत्स्य उत्पादों की विस्तार से जानकारी दी और मत्स्य पालकों को इन्हें अपनाकर अपनी आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
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पशुधन उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग ने संस्थान द्वारा विकसित मत्स्य उत्पादों का प्रदर्शन किया। अन्य संस्थाओं ने भी मत्स्य आहार, मत्स्य औषधि और सचल मत्स्य उत्पाद विक्रम केंद्र आदि ने अपने स्टाल लगाए। कार्यक्रम में मंडल के चारों जिलों के दो-दो प्रगतिशील मत्स्य पालकों को शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
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बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के कृषि विज्ञान केंद्र और मत्स्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में विश्व मत्स्य दिवस का आयोजन किया गया। इसमें मत्स्य पालकों को कृषक उत्पादन संघ बनाकर आमदनी के नए मंत्र के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में सीडीओ चंद्र मोहन गर्ग ने मत्स्य पालकों को और बेहतर तरह से काम करने के लिए प्रेरित किया। संयुक्त निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. महेश चंदर ने मत्स्य पालन की एकीकृत प्रणालियों को अपनाकर आय बढ़ाने के साथ उत्पाद के बेहतर विक्रय के लिए अच्छी पैकिंग करने की सलाह दी। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. राजकरन सिंह ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से कार्य करने के साथ कृषक उत्पादक संघ बनाकर मत्स्य पालकों अच्छी आमदनी का रास्ता खोल सकते हैं।
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उपनिदेशक (मत्स्य) सृष्टि यादव ने प्रधानमंत्री मत्स्य विकास योजना सहित विभाग की सभी योजनाओं की विस्तार से जानकारी देते हुए मत्स्य पालकों से इनका अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक धर्मेंद्र मिश्रा ने बताया कि मत्स्य पालकों के लिए बैंक के माध्यम से ऋण संबंधी सुविधाएं नियमित रूप से प्रदान की जा रही हैं। इनमें जो समस्याएं आ रही हैं, उनमें सुधार के लिए नाबार्ड निरंतर प्रयासरत है। कार्यक्रम में पशुधन उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग के डॉ. सुमन ताल्लुकदार ने संस्थान द्वारा विकसित मत्स्य उत्पादों की विस्तार से जानकारी दी और मत्स्य पालकों को इन्हें अपनाकर अपनी आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
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पशुधन उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग ने संस्थान द्वारा विकसित मत्स्य उत्पादों का प्रदर्शन किया। अन्य संस्थाओं ने भी मत्स्य आहार, मत्स्य औषधि और सचल मत्स्य उत्पाद विक्रम केंद्र आदि ने अपने स्टाल लगाए। कार्यक्रम में मंडल के चारों जिलों के दो-दो प्रगतिशील मत्स्य पालकों को शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।